बैंगलोर वालों के दोनों हाथों में लड्डू हैं। आप सोच रहे होंगे वो भला क्यों...दरअसल, अगले 8-10 सालों में बैंगलोर वालों को एक नहीं बल्कि दो-दो नये एयरपोर्ट मिलने वाले हैं। बैंगलोर में दूसरा एयरपोर्ट बनाने की तैयारियां कर्नाटक राज्य सरकार ने शुरू कर दी है, तो दूसरी तरफ तमिलनाडु सरकार ने भी बैंगलोर से सटे होसुर में नया एयरपोर्ट बनाने की घोषणा कर दी है।
इसके साथ ही बैंगलोर का वर्तमान केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तो होगा ही, जिसे यूनेस्को ने भी दुनिया के सबसे सुन्दर एयरपोर्ट की सूची में शामिल किया है।

5000 एकड़ की भूमि पर नया एयरपोर्ट
बैंगलोर वालों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी जो है, कि अब बैंगलोर में ही दूसरा नया एयरपोर्ट बनाया जाएगा। इस एयरपोर्ट को न सिर्फ यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए बल्कि एयरपोर्ट की जमीन का चुनाव करते समय इसकी वर्तमान बैंगलोर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से दूरी को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
हालांकि इस एयरपोर्ट का निर्माण 2032 तक नहीं हो सकता है लेकिन उसके बाद तो किया ही जा सकता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए ही राज्य सरकार ने अभी से ही नये एयरपोर्ट के लिए जगह ढूंढने, जमीन का चुनाव करने आदि तैयारियां शुरू कर दी है।
कर्नाटक मंत्रिमंडल के मंत्री एमबी पाटिल ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि बैंगलोर में प्रस्तावित दूसरे एयरपोर्ट के लिए करीब 4000-5000 एकड़ की भूमि अधिग्रहित की जाएगी। इसके लिए संभावित जगहें कनकपुरा रोड, मैसूर रोड, मगडी, डोड्डाबल्लपुर, डोब्सपेट और तुमकुरु है। उन्होंने बताया कि बैंगलोर के दूसरे एयरपोर्ट को भी नवी मुंबई और ग्रेटर नोएडा के जेवर एयरपोर्ट के तर्ज पर ही बनाया जाएगा।
जिन बातों को ध्यान में रखकर होगा जगह का चुनाव
दूसरे एयरपोर्ट के लिए जगह का चुनाव करते समय जिन बातों को ध्यान में रखा जाएगा उनमें सबसे ऊपर विमानों की आवाजाही के लिए तकनीकी सुविधा प्रदान करने की व्यवस्थाएं होंगी। जैसे उस क्षेत्र में कोई ऊंची इमारत का न होगा, मुख्य शहर से दूरी, जगह की उपलब्धता, मुआवजा आदि होगा। तमिलनाडु के होसुर में प्रस्तावित दूसरे एयरपोर्ट के लिए भी उन्होंने कहा कि बैंगलोर के KIA का एक्सक्लूसिविटी क्लॉज (2032 तक 150 किमी की दूरी में दूसरा एयरपोर्ट नहीं होगा) लागू होता है।
उन्होंने बताया कि इसलिए राज्य सरकार एयरपोर्ट बनाने की योजनाएं शुरू कर रही है ताकि 2033 तक बैंगलोर का दूसरा एयरपोर्ट बनकर तैयार हो जाए। बताया जाता है कि बैंगलोर का प्रस्तावित दूसरा एयरपोर्ट की हर साल लगभग 100 मिलियन यात्रियों को हैंडल करने की क्षमता होगी।

होसुर एयरपोर्ट से भी बैंगलोर वालों का फायदा
बैंगलोर में दूसरा एयरपोर्ट बनाने के कर्नाटक सरकार की घोषणा के कुछ दिनों बाद ही तमिलनाडु सरकार ने होसुर में नया एयरपोर्ट बनाने की घोषणा कर दी। इस एयरपोर्ट के बनने से न सिर्फ तमिलनाडु के कृष्णागिरी के लोगों को फायदा होगा बल्कि पड़ोसी राज्य के धर्मपुरी और सालेम जिलों को भी बड़ा फायदा मिलने वाला है।
होसुर एयरपोर्ट से बैंगलोर के इलेक्ट्रॉनिक सिटी और शहर के दक्षिणपूर्व हिस्से में रहने वाले लोगों को भी फायदा पहुंचेगा। होसुर का नया एयरपोर्ट ग्रीनफिल्ड होगा जो करीब 2000 एकड़ के क्षेत्र में फैला होगा। इस एयरपोर्ट की यात्रियों को हैंडल करने की वार्षिक क्षमता लगभग 30 मिलियन होने वाली है।
होसुर एयरपोर्ट के बनने से तमिलनाडु-कर्नाटक के सीमावर्ती इलाकों जैसे इलेक्ट्रॉनिक सिटी, चंदपुरा, अत्तीबेले आदि इलाकों के लोगों को काफी फायदा होगा। यह एयरपोर्ट बैंगलोर एयरपोर्ट तक पहुंचने के समय में कटौती करने के साथ-साथ जाम में फंसने से भी लोगों को बचाएगा। विभिन्न कंपनियों के कई मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट जो होसुर रोड के पास हैं, वहां तक क्लाइंट को पहुंचने में भी आसानी होगी इससे अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचेगा।
क्या मानते हैं स्थानीय लोग
चंदपुरा के रहने वाले एक निवासी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि होसुर का नया एयरपोर्ट शूलगिरी में बनने की संभावना है। अगर 280 किमी लंबा बैंगलोर सैटेलाइट टाउन रिंग रोड होसुर से जुड़ जाता है तो मलुर, हरोहल्ली और टेकल जैसे इलाकों में रहने वाले लोगों को सबसे ज्यादा आसानी होगी।
इन इलाकों में रहने वाले लोगों को बैंगलोर एयरपोर्ट पहुंचने में जहां 1 से 1.30 घंटे का वक्त लग जाता है, वहीं होसुर एयरपोर्ट के बन जाने से एयरपोर्ट पर पहुंचने में मात्र 30 मिनट का समय ही लगेगा।
इसका मतलब है कि होसुर और बैंगलोर का दूसरा एयरपोर्ट व वर्तमान एयरपोर्ट मिलकर बैंगलोर, कर्नाटक और तमिलनाडु के सीमावर्ती इलाकों की कनेक्टिविटी को वर्तमान समय के मुकाबले आने वाले समय में कई गुना बढ़ाने वाले हैं। यानी बैंगलोर वालों के इस हाथ में मोतीचुर के लड्डू तो दूसरे हाथ मैसूर पाक होगा।



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