बैंगलोर में अगर आप सिग्नल तोड़ते हुए आगे बढ़ जाते हैं तब भी आपका चालान नहीं कटेगा। जी हां, हम मजाक नहीं कर रहे बल्कि बिल्कुल सच कह रहे हैं। बैंगलोर ट्रैफिक पुलिस की तरफ से जारी बयान में कुछ ऐसा ही कहा गया है। लेकिन इसके लिए बस एक ही शर्त है। और वो शर्त क्या होगी? बैंगलोर में अगर आप किसी एंबुलेंस को जगह देते हुए सिग्नल तोड़ते हैं और थोड़ा आगे बढ़ जाते हैं, तब भी आपका चालान नहीं कटेगा।
तो फिर अगली बार जब कहीं भी ट्रैफिक जाम में फंस जाएं और अगर आपके पीछे कोई एंबुलेंस नजर आए तो चालान कटने के डर से सिग्नल पर खड़े न रहकर थोड़ा आगे सरक जाएं जिससे एंबुलेंस को निकल जाने की जगह मिल सकें। भले ही नहीं वजह से आपको जेब्रा क्रॉसिंग पर ही थोड़ा खड़ा क्यों न होना पड़ जाए!

Times of India की एक रिपोर्ट के अनुसार अगर बैंगलोर सिटी पुलिस की तरफ से किसी एंबुलेंस को जगह देने के लिए थोड़ा सा आगे बढ़ने के कारण आपका चालान कट भी गया तो चिंता करने की बात नहीं है। चालान को रद्द कर दिया जाएगा। इस बाबत बैंगलोर के ज्वाएंट पुलिस कमिश्नर (ट्रैफिक) एमएन अनुचेत के हवाले से बताया गया है कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें एंबुलेंस को जगह देने की वजह से सिग्नल पर लगे कैमरा द्वारा चालान काट दिया गया है।
क्या होगा अगर कट चुका है चालान?
किसी एंबुलेंस को रास्ता देने की वजह से कैमरे ने अगर आपको सिग्नल तोड़ते हुए पकड़ लिया हो और आपका चालान कट चुका हो, तो ऐसी स्थिति में क्या होगा? अगर एंबुलेंस के लिए रास्ता बनाने की वजह से किसी वाहन चालक का चालान कट चुका हो तो उसे तुरंत बैंगलोर के इंफैन्ट्री रोड स्थित ट्रैफिक मैनेजमेंट सेंटर में आकर मामले की जानकारी देनी होगी।
इसके अलावा ऐसी स्थिति में कर्नाटक राज्य पुलिस ऐप के माध्यम से भी चालान कटने की जानकारी दे सकते हैं। अनुचेत ने आगे बताया कि सिग्नल तोड़ने की घटनाओं को सभी सिग्नल जहां कैमरे लगे हो, 5 सेकंड के लिए रिकॉर्ड करते हैं। अगर यह पाया जाता है कि वाहन चालक या बाइक सवार ने किसी एंबुलेंस को रास्ता देने के लिए सिग्नल तोड़ा है या जेब्रा क्रॉसिंग पर खड़ा है तो ऐसे मामलों में चालान तुरंत रद्द कर दिया जाएगा।

एंबुलेंस देख सिग्नल तुरंत खुद से हो जाएगा हरा
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार ट्रैफिक पुलिस ने 10 ट्रैफिक सिग्नल जंक्शनों पर जिओफेंसिंग को लागू किया है। इसमें जीपीएस लगे हुए एंबुलेंस दिखते ही सिग्नल तुरंत खुद से हरा हो जाता है। बताया जाता है कि पायलट परियोजना के तहत स्वास्थ्य व वेलफेयर विभाग ने लगभग 80 एंबुलेंस में जीपीएस लगाया है जो इन 10 जंक्शनों से होकर ज्यादा गुजरते हैं।
बताया जाता है कि जब एंबुलेंस करीब 100 मीटर की दूरी पर होगा, उस समय ही उसकी पहचान कर ली जाएगी। AI तकनीक से लैस इस कैमरे की परफॉर्मेंस से संतुष्ट होने के बाद इसे दूसरे सिग्नल जंक्शन पर भी लगाया जाएगा।



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