भारत का Tech सिटी बैंगलोर...! इस शहर की अच्छाई अगर गिनाने के लिए कहा जाए तो शायद कुतुब मीनार से भी ऊंची मीनार बन जाएगी। शानदार मौसम, महिलाओं के लिए सुरक्षित, नौकरीपेशा लोगों के लिए जन्नत, विकसित स्वास्थ्य सेवाएं। एक आधुनिक शहर में जिन सुविधाओं के बारे में कोई भी व्यक्ति सोचता है, वैसी हर सुविधा बैंगलोर में मौजूद है। विशेष रूप से पिछले 2 दशकों के दौरान बैंगलोर का काफी तेजी से विकास हुआ है।

यहीं वजह है कि दुनियाभर में रहने योग्य Top 6 शहरों में बैंगलोर ने भी अपनी जगह बनायी है। लेकिन पिछले 1 महीने से बैंगलोर सिर्फ नकरात्मक वजहों से ही सुर्खियों में छाया हुआ है, जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी छवि को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं।
कौन सी वजहें हैं, जिनके कारण बैंगलोर की छवि को नुकसान पहुंच रही है :-
बंद
पिछले 1 महीने में संभवतः तीसरी बार बैंगलोर में बंद बुलाया गया है। कर्नाटक की राजधानी होने की वजह से बैंगलोर को ही सबसे ज्यादा विरोध-प्रदर्शन सहना पड़ता है जिसका सबसे बुरा असर यहां रहने वाले लोगों के साथ ही इस छवि पर भी पड़ रहा है। कुछ दिनों के अंतराल में ही बैंगलोर में बार-बार बंद बुलाया जा रहा है यहां की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बैंगलोर की छवि को धुमिल कर रहा है।

लोगों को यह संदेश मिल रहा है कि बैंगलोर में राजनीतिक पार्टियों का काफी ज्यादा प्रभाव है। इस वजह से इस शहर में पर्यटन और व्यापारिक वजहों से आने वाले लोग दूसरे विकल्पों के बारे में भी सोच सकते हैं।
ट्रैफिक जाम
बैंगलोर की ट्रैफिक जाम पूरे भारत में मशहूर है। कहा जाता है कि बैंगलोर में रहने वाला कोई व्यक्ति अपने जीवन का तीन-चौथाई समय ट्रैफिक जाम में ही बीता देता है। पिछले साल बैंगलोर ने ट्रैफिक के लिहाज से दुनिया के सबसे धीमी रफ्तार से चलने वाले शहरों की लिस्ट में दूसरा स्थान पाया था। पिछले बुधवार को भी बैंगलोर के आउटर रिंग रोड में भयानक ट्रैफिक जाम लग गया था।
बारिश के समय में स्थिति और भी विकट हो जाती है, जब जलजमाव की वजह से गाड़ियां जहां की तहां बस खड़ी ही रहती है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में सामने आया है कि बैंगलोर में ट्रैफिक जाम की वजह से हर साल करीब 20,000 करोड़ रुपयों का नुकसान होता है। यह नुकसान में पानी, समय, ईंधन, सिग्नल स्टॉप, निर्धारित जगह पर पहुंचने की देरी आदि भी शामिल है।
घर का किराया
बैंगलोर को एक महंगा शहर माना जाता है जिसमें सबसे ज्यादा खर्च घर का किराया होता है। कोविड-19 अतिमारी के समय मकान किरायों में भारी गिरावट दर्ज की गयी थी। लेकिन वैश्विक अतिमारी के बाद जैसे-जैसे इस Tech सिटी में किराए के घर की मांग बढ़ने लगी, किरायों में भी वृद्ध देखी गयी। अतिमारी से पहले बैंगलोर के मरथ्हल्ली, बेल्लनदुर और ह्वाइटफिल्ड क्षेत्रों में औसतन 2 BHK फ्लैट का किराया 12,000 से 20,000 रुपये के बीच होता था लेकिन अब वहीं कीमत 25,000 से 40,000 पर पहुंच गयी है।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 1 BHK फ्लैट का किराया जहां 7,000 से 10,000 के बीच होता था, वहीं अब यह किराया 15,000 से 25,000 रुपये पर पहुंच गयी है। बैंगलोर में रहने वाले मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह बहुत बड़ी चुनौती पेश करता है। क्योंकि घर का किराया जितना ज्यादा होगा, ऐसे परिवार के सदस्य शिक्षा, स्वास्थ्य और बचत जैसी मूलभूत चीजों पर उतना कम रूपया खर्च करेंगे।
मंडरा रहा जल संकट
बैंगलोर कभी अपने झीलों की वजह से फेमस हुआ करता था। लेकिन विकास के साथ-साथ यहां हुए अवैध निर्माण की वजह से इसके जल संचयन की क्षमता में कमी आयी। नतीजा यह हुआ कि अब इस शहर की बारिश के पानी को जमीन के नीचे पहुंचाकर जलस्तर को फिर से रिचार्ज करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जा रही है। चूंकि अल्प वर्षा से भूजल कम हो जाता है और बोरवेल सूख जाते हैं, इसलिए कृष्णराज सागर, हरंगी, हेमावती या काबिनी जैसे जलाशयों पर शहर की निर्भरता काफी बढ़ जाएगी। बैंगलोर को अपना अस्तित्व बचाने के लिए निश्चित रूप से मेकेदातु परियोजना की आवश्यकता है।
हाल ही में अंतरराष्ट्रीय हास्य अभिनेता ट्रेवर नोआ का शो रद्द होना भी बैंगलोर की प्रतिष्ठा के एक बहुत बड़ा धक्का था। बुधवार को उनका शो अचानक से खराब ध्वनि तकनीकों की वजह से समाप्त कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने ट्वीट कर लिखा, "मैं आपके अद्भुत शहर में प्रदर्शन करने के लिए बहुत उत्सुक था, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण हमें दोनों शो रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा। हमने सब कुछ करने की कोशिश की, लेकिन दर्शक मंच पर हास्य कलाकारों को नहीं सुन पा रहे थे। इसलिए शो को रद्द कर देना पड़ा।"



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