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जम्मू-कश्मीर : वादी-ए-लोलाब, जहां की हवाओं में ही है रूमानी एहसास

By Nripendra Balmiki

भारत में कुछ ऐसे भी खास स्थल मौजूद हैं, जिनकी खूबसूरती की तारिफ जितनी की जाए उतनी कम है, और कश्मीर कुछ ऐसा ही गंतव्य है, जहां की हसीन वादियां हमेशा से ही सैलानियों के मुख्य आकर्षण का केंद्र रही हैं। कश्मीर को पृथ्वी का स्वर्ग कहा जाता है, हर साल यहां भारी संख्या में देश-विदेश के पर्यटकों का आगमन होता है। हरा-भरा माहौल, यहां की बर्फीली चोटियां, नदी, झीलें और कश्मीरी लोक संस्कृति, आगंतुकों को काफी ज्यादा प्रभावित करती हैं।

कहते हैं कि यहां एक बार जो आ जाए, वो दोबारा यहां आना जरूर चाहेगा। श्रीनगर, सोनमर्ग, गुलमर्ग, लेह, पहलगाम आदि यहां के कुछ चुनिंदा पर्यटन स्थल हैं, जहां हर वक्त सैलानियों का मजमा लगा रहता है। पर इन सब के अलावा जम्मू-कश्मीर में कुछ छिपे हुए स्थल भी मौजूद हैं, जिनके विषय में अधिकांश सैलानियों को पता नहीं है।

आज के इस लेख में नेटिव प्लानेट आपको कश्मीर के एक ऐसे ही स्थल के बारे में बताने जा रहा है, जो 'वादी-ए-लोलाब' के नाम से मशहूर है। जानिए पर्यटन के लिहाज से यह स्थल आपको किस प्रकार आनंदित कर सकता है।

कश्मीर की लोलाब घाटी

कश्मीर की लोलाब घाटी

PC- Eshankaul007

कश्मीर के इस छिपे हुए पर्यटन स्थल का नाम है, 'लोलाब घाटी', जिसे स्थानीय लोग 'वादी-ए-लोलाब' के नाम से संबोधित करते हैं। लोलाब घाटी कश्मीर के सबसे खूबसूरत स्थलों में गिनी जाती है। कुपवाड़ा जिले में स्थित यह घाटी, अपने फलोद्यानों, मीडोज़ और आश्चर्यजनक झीलों से समृद्ध है। यह घाटी कुपवाड़ा शहर से 9 किमी उत्तर से शुरु होकर लगभग 15 मील तक फैली हुई है। भौगोलिक रूप से भी यह घाटी काफी खास है, यहां की लाहवाल नदी इसे कुछ अंडाकार रूप प्रदान करती है।

घाटी क्षेत्र में कई पुराने प्राकृतिक कुंड भी मौजूद हैं, जो इसके महत्व को और निखारते हैं। यह घाटी साल भर पाइन और देवदार के जंगलों से ढकी रहती है। इस क्षेत्र में आड़ू, सेब, खुबानी, चेरी और अखरोट जैसे फलों के पेड़ भी पाए जाते हैं।

तीन घाटियों का समूह

तीन घाटियों का समूह

दरअसल लोलाब तीन घाटियों का समूह हैं, एक कलारूस, दूसरी पोटानेई और तीसरी ब्रुनाई। लोलाब घाटी बांदीपुर से नागमर्ग से अलग होती है। लोलाब घाटी का मुख्यालय सोगम में स्थित है। कलारूस, किगाम, तेकोपोरा, कंडी, चंडीगाम और मुकाम शामिल है। कलारूस, लालपोर, किगम, तेकोपोरा, कंडी, चंडीगाम और मुकाम इस घाटी के चुनिंदा गांव हैं, जहां आप ठेठ कश्मीरी जीवन शैली को काफी नजदीक से देख सकते हैं। आगे जानिए इस घाटी से जुड़ी जरूरी बातों को।

क्यों आए लोलाब घाटी

क्यों आए लोलाब घाटी

लोलाब घाटी की सैर कई उद्देश्यों को पूरा करने के लिए की जा सकती है। यह घाटी चारों तरफ से प्राकृतिक आकर्षणों से घिरी हुई है, जहां आप एक शानदार अवकाश बिता सकते हैं। यहां के खूबसूरत फूलों और फलों के बगीचे पर्यटकों को काफी ज्यादा आनंदित करते हैं। इसके अलावा आप यहां ट्रेकिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का भी अनुभव ले सकते हैं। यहां के ट्रेक आपको रोमांच के साथ-साथ काफी ज्यादा आनंदित करेंगे। लोलाब घाटी से बांदीपुर की वूलर झील तक का ट्रेक रूट यहां ज्यादा लोकप्रिय है।

इसके अलावा आप यहां विभिन्न जीव जन्तु जैसे ब्लैक बीयर, ब्राउन बीयर, तेंदुआ, हिरण आदि को देख सकते हैं। यहां आप कैंपिंग का भी अनुभव ले सकते हैं, घाटी के आसपास आपको कई शानदार कैंपिंग साइट्स दिख जाएंगी।

आने का सही समय

आने का सही समय

लोलाब घाटी आने का सबसे आदर्श समय अगस्त से मार्च तक का माना जाता है। गर्मियों के दौरान भी यहां का मौसम अनुकून बना रहता है, और सर्दियों के समय भारी बर्फबारी होती है। यहां मॉनसून ज्यादा देर तक नहीं रहता।

कैसे करें प्रवेश

कैसे करें प्रवेश

लोआब घाटी, कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में गिना जाती है, जहां आप परिवहन के तीनों मार्गों से आ सकते हैं। यहां का निकटवर्ती हवाईअड्डा श्रीनगर स्थित है, जो दिल्ली और जम्मू से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। एयरपोर्ट से पर्यटक ट्रैक्सी का बस के द्वारा कुपवाड़ा तक आसानी से पहुंच सकते हैं। रेल मार्ग के लिए आप जम्मू रेलवे स्टेशन का सहारा ले सकते हैं। अगर आप चाहें तो सड़क मार्ग के द्वारा भी यहां तक का सफर तय कर सकते हैं। बेहतर सड़क मार्गों से लोलाब घाटी जम्मू और श्रीनगर से अच्छी तरह जुड़ी हुई है।

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