अगर आप दक्षिण भारत में रहते हैं और बेंगलुरु से चेन्नई के बीच व्यापार या फिर ऑफिस के काम के सिलसिले में आवाजाही करनी पड़ती है तो आपके लिए एक अच्छी खबर है। बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे का वह हिस्सा जो कर्नाटक से होकर गुजरता है, के निर्माण में आ रही बाधा का आखिरकार समाधान हो गया है और जल्द ही इसका निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
संभावना जतायी जा रही है कि जल्द ही इसे खोल दिया जाएगा। क्या थी वह बाधा जिसकी वजह से पिछले लंबे समय से बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य बाधित हो रहा था? कैसे दूर हुई वह बाधा और कब तक इसे खोलने की है योजना?

क्या थी निर्माण में देरी की वजह?
बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे, जो दक्षिण भारत के 3 राज्यों कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को जोड़ने का काम करेगी। मीडिया रिपोर्ट्स में किये गये दावों को अगर सच माने तो यह दक्षिण भारत का पहला ग्रीनफिल्ड एक्सप्रेसवे होगा। इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 260 किमी होगी जिसमें से कर्नाटक वाला हिस्सा लगभग 71 किमी लंबा होगा।
इस एक्सप्रेसवे का निर्माण नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा किया जा रहा है। बताया जाता है कि जिन्नगर में होस्कोट के पास इस एक्सप्रेसवे के निर्माण के रास्ते में एक मंदिर बाधा बन रही थी। उस मंदिर को वहां से दूसरे किसी स्थान पर स्थानांतरित करने की जरूरत है। मंदिर के कारण इस एक्सप्रेसवे पर लगभग 400 मीटर लंबे हिस्से का निर्माण बाधित हो रहा था।
कैसे दूर हुई बाधा?
The New Indian Express की रिपोर्ट से हुई बातचीत के दौरान NHAI के बेंगलुरु क्षेत्र के अधिकारी विलास पी ब्राह्मणकर ने बताया कि इस मंदिर को यहां से हटाकर दूसरी जगह पर स्थापित करने का काम कर दिया गया है। ऐसा करने के बाद कर्नाटक से होकर एक्सप्रेसवे का गुजरने वाले हिस्से में से 400 मीटर का बाकी बचे हिस्से का निर्माण भी अब पूरा हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस हिस्से का काम इस साल दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद इसे गाड़ियों की आवाजाही के लिए खोल दिया जाएगा। बताया जाता है कि इस एक्सप्रेसवे का निर्माण करीब ₹17,900 करोड़ की लागत से की जा रही है।

घटेगी दोनों शहरों के बीच की दूरी
मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे का निर्माण हो जाने से दोनों शहरों के बीच की दूरी निश्चित रूप से घट जाएगी। अभी बेंगलुरु से चेन्नई तक सड़क मार्ग से आवाजाही करने में लगभग 6 से 7 घंटों का समय लगता है। लेकिन इस एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा हो जाने के बाद इस दूरी को तय करने में करीब 3 घंटे का ही समय लगेगा। यानी दोनों शहरों के बीच की दूरी लगभग आधी हो जाएगी। 4 लेन के इस एक्सप्रेसवे का निर्माण कई चरणों में किया जा रहा है, जो निम्न हैं :
- पहला चरण (पैकेज 1) - होस्कोट से मलूर तक (27.1 किमी)
- दूसरा चरण (पैकेज 2) - मलूर से बंगरपेट तक (27.1 किमी)
- तीसरा चरण (पैकेज 3) - बंगरपेट से बेथामंगला तक (17.5 किमी)
कब पूरा खुलेगा एक्सप्रेसवे?
पहले केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी ने इस साल जुलाई के महीने में घोषणा की थी कि इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन इस साल दिसंबर से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। लेकिन अब इसे अगले साल (2025) मार्च तक पूरी तरह से खोल देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
वहीं ब्राह्मणकर का कहना है कि जब तक 260 किमी लंबे स्ट्रेच पर पूरी तरह से यातायात सेवाएं शुरू नहीं हो जाती हैं, इस एक्सप्रेसवे के एक हिस्से को, जो कर्नाटक में मौजूद होगा, को गाड़ियों की आवाजाही के लिए खोल दिया जाएगा।



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