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हम्पी और कोंगथॉन्ग बना बेस्ट टूरिज्म विलेज 2023, जानिए क्यों हैं दोनों खास

कर्नाटक के ऐतिहासिक गांव हम्पी, यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल भी है, ने एक और उपलब्धि हासिल की है। हम्पी को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की तरफ बेस्ट टूरिज्म विलेज 2023 के खिताब से नवाजा गया है। कर्नाटक में विजयनगर राजवंश का हम्पी सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी पर्यटकों को अपनी ऐतिहासिकता और संस्कृति की वजह से हमेशा आकर्षित करता रहा है।

Best Tourism Village Hampi

सिर्फ हम्पी ही नहीं बल्कि बेस्ट टूरिज्म विलेज का खिताब मेघालय के अनोखे गांव कोंगथॉन्ग को भी प्रदान किया गया है। मेघालय का यह बहुत ही विचित्र गांव है जहां सीटी मारना किसी बद्तमिजी नहीं बल्कि एक-दूसरे से संपर्क करने का जरिया है।

आइए बताते हैं क्यों हम्पी और कोंगथॉन्ग को बेस्ट टूरिज्म विलेज का खिताब प्रदान किया गया है :-

9 श्रेणियों में हम्पी ने बनायी अपनी बढ़त

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 795 गांवों में हिस्सा लिया था। इनमें से कुछ चुनिंदा गांवों को ही बेस्ट टूरिज्म विलेज का खिताब दिया गया है जिसमें कर्नाटक का हम्पी भी प्रमुख है।

Hampi pillers

बताया जाता है कि इस प्रतियोगिता के दौरान हम्पी ने 9 श्रेणियों में अपनी बढ़त बना कर रखी थी। इस वजह से ही इसे यह पुरस्कार प्रदान किया गया है। हम्पी ने यह पुरस्कार 27 सितंबर को विश्व टूरिज्म डे के मौके पर प्राप्त किया। हम्पी अपनी प्राकृतिक सुन्दरता के साथ-साथ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर की वजह से ही यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में अपनी जगह बना सका है।

कोंगथॉन्ग में लोग एक-दूसरे का नहीं लेते हैं नाम

विश्व टूरिज्म डे पर जिन गांवों को बेस्ट टूरिज्म विलेज का खिताब प्रदान किया गया उनमें मेघालय का कोंगथॉन्ग गांव भी शामिल है। यह गांव सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में सबसे अनोखा है। इस गांव की सुन्दरता, प्राकृतिक परिवेश के साथ ही इसका 'व्हिसलिंग विलेज' होना भी खुबियों में शामिल है। दरअसल, कोंगथॉन्ग गांव में लोग एक-दूसरे को नाम से नहीं पुकारते हैं। इस गांव में हर व्यक्ति की पहचान उसका नाम नहीं बल्कि एक खास धुन या सीटी होती है।

Kongthong Village

जन्म के समय जिस तरह बच्चों के नाम रखें जाते हैं, ठीक उसी तरह कोंगथॉन्ग गांव में पैदा होने वाले हर बच्चे के लिए एक धुन का निर्धारण होता है। इस गांव में 600 से ज्यादा लोग रहते हैं और हर व्यक्ति की धुन दूसरे से अलग होती है। कोंगथॉन्ग के निवासियों का मानना है कि गांव के आसपास के जंगलों में भूतों का निवास है। अगर वे एक-दूसरे को नाम से पुकारेंगे तो भूत सुन लेंगे और उस व्यक्ति के साथ कुछ बुरा करेंगे। इसलिए गर्भवस्था के समय ही मां अपने बच्चे के लिए नाम नहीं बल्कि गाने की धुन ढूंढने लगती है।

बेस्ट टूरिज्म विलेज 2023 का खिताब मिलने की वजह से इन गांवों के विकास में काफी मदद मिलेगी। इसके साथ ही इन गांवों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में भी काफी मदद मिलेगी।

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