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जम्मू की वादियों में छुपा हुआ मिनी कश्मीर

By Goldi

उत्तर भारत में अगर घूमने की जगहों को खोजा जाए तो ऐसी कई अनगिनत जगह है,जो अभी पर्यटकों की नजरों से दूर है..इन्ही में से एक जगह है भद्रवाह जोकि जम्मू से करीब 200 किमी की दूरी पर स्थित है। यह डोडा जिले का सबसे सुंदर क्षेत्र है जो किल्‍ला मोहल्‍ला से गुप्‍त गंगा और कब्रिस्‍तान से गाथा तक फैला हुआ है। भद्रेवाह बाटोटे से 80 किमी. की दूरी पर स्थित है, जो यहां का एक हिल टाउन है।

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भद्रवाह को मिनी कश्मीर भी कहा जाता है, यहां सब्ज गहरी वादियां, कलकल करते दूध जैसे शीतल पानी के झरनों, लंबी-लंबी चारागाहों, ऊंचे-ऊंचे बर्फ से ढके पहाड़ दिन में सोने तो रात को चांदी जैसी छटा बिखेरते हैं। भद्रवाह की जाई वेली में पर्यटक लंबी-लंबी चारागाहों में सैर करते हैं। ठंडे झरनों के पानी में अठखेलियां करते हैं।

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भद्रवाह को थंबू नाग मंदिर, नागनी माता मंदिर और अलअलबानी मंदिर के लिए भी जाना जाता है। इस शहर में अप्रैल महीने की शुरूआत में कई त्‍यौहारों का आयोजन किया जाता है। पर्यटकों को समय निकाल कर अवश्‍य आना चाहिए। इस जगह को हिंदू धर्म की पवित्र यात्रा कैलाश यात्रा के लिए भी जाना जाता है। प्रकृति के बीच बने इस स्‍थल की अद्वितीय सुंदरता को देखना काफी मजेदार होता है। यहां आकर टूरिस्‍ट, ईको एडवेंचर एक्टिविटी में भी भाग ले सकते हैं, इसके लिए पाद्री सिओज, जनट्रॉन और रोसारिया प्रमुख प्‍वाइंट हैं। यहां की जय, केलार, ब्‍लेईसा, चिंटा और चिराला घाटियों में ट्रैकिंग और कैम्पिंग कर सकते हैं।

आइये स्लाइड्स में जानते हैं भद्रवाह में घूमने की कुछ खास जगहों के बारे में, जो पर्यटकों को जरुर घूमनी चाहिए

वासुकी नाग मंदिर

वासुकी नाग मंदिर

यह भद्रवाह का सबसे पुराना मंदिर है जो 11 वीं सदी में बना था। वासुकी का अर्थ संस्‍कृत में होता है - नाग। हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं के अनुसार, वासुकी नागों के राजा हुआ करते थे जिनके माथे पर नागमणि लगी थी। मंदिर में वासुकी भगवान की मूर्ति लगी हुई है जो एक बड़े से पत्‍थर से बनाई गई है। कैलाश यात्रा से पहले यहां विशेष पूजा को करने का प्रावधान है। कैलाश यात्रा, हिंदूओं की धार्मिक यात्रा है।

पाद्री गली

पाद्री गली

भद्रवाह से 40 किमी. की दूरी पर समुद्र स्‍तर से 10500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह एक पिकनिक स्‍पॉट है जहां साल में कई बार बर्फबारी का आनंद उठाने को मिलता है। जुलाई माह में की जाने वाली मणि महेश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को इसी रास्‍ते से होकर गुजरना होता है। यहां आकर पर्यटक, प्रकृति की गोद में घुडसवारी भी कर सकते है।

चिंता घाटी

चिंता घाटी

यह घाटी समुद्र स्‍तर से 6500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है जो चारों तरफ घने जंगलों से घिरी रहती है। यह घाटी कई टूरिस्‍ट प्‍वांइट से घिर हुई है जिसमें से एक थुंबा भी है जो चिंता नाल्‍हा पर बना है। थुंबा, एक सबसे ऊंचा प्‍वांइट है जो भद्रेवाह और चिंता वैली को डिवाइड करता है। यह जगह भद्रेवाह का सबसे ऊंचा प्‍वांइट है। यहां हिंदू धर्म के पूज्‍यनीय, भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर है। यहां आने वाले पर्यटक बग्‍गन से थुंबा तक घुडसवारी का मजा भी उठा सकते है। सुब्रनाग पीक और सुब्रनाग मंदिर भी इस घाटी में दर्शनीय स्‍थल हैं।

सारतीगाल

सारतीगाल

भद्रवाह के दक्षिण में स्थित खुबसूरत दृश्‍य वाला यह इलाका पर्यटकों को बेहद पसंद आता है। यहां कई पेड़ और पानी की धाराएं हैं। पास में ही कैलाश पर्वत और आशापति पहाड़ी भी स्थित हैं जो यहां के व्‍यू में चार चांद लगा देते हैं।

कब जाएँ

कब जाएँ

यहां घूमने का सबसे अच्छा मौसम है अक्टूबर से फ़रवरी तक का..इस दौरान यहां का मौसम बेहद ही सुहावना रहता है..दिसम्बर ओए जनवरी के दौरान तापमान गिर जाता है..तो आप यहां की यात्रा के दौरान आपने साथ गर्म कपड़े लाना बिल्कुल भी ना भूले।

कैसे पहुंचे

कैसे पहुंचे

जम्मू से भद्रवाह पहुंचना सबसे आसान है, जो शहर से 200 किलोमीटर दूर स्थित है। सड़क के द्वारा इस यात्रा का मार्ग चार भागों में विभाजित किया जा सकता है:

जम्मू - उधमपुर: 65 किमी से राष्ट्रीय राजमार्ग -1 ए
उधमपुर - बोटोटः 55 किमी से राष्ट्रीय राजमार्ग -1 ए
बटोटे - पुल डोडा: एनएच-1 बी के माध्यम से 50 किमी
पुल डोडा- भादरवाः 30 किलोमीटर

जम्मू पहुंचे

हवाईजहाज से: जम्मू हवाई अड्डा श्रीनगर, दिल्ली, अमृतसर, चंडीगढ़, मुंबई और बेंगलुरु के शहरों से जुड़ा हुआ है।

ट्रेन से: जम्मू से और जम्मू से चलने वाली कुछ प्रमुख ट्रेनें हैं - जम्मू मेल, जम्मू एक्सप्रेस, मालवा एक्सप्रेस, शालीमार एक्सप्रेस, सियालदह एक्सप्रेस, झेलम एक्सप्रेस, हिमगिरी एक्सप्रेस, हिमसागर एक्सप्रेस और लोहित
एक्सप्रेस आदि।

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