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एक ट्रैवलर के लिए क्यों खास है नासिक का भास्करगढ़ फोर्ट ?

नासिक गोदावरी नदी के तट पर स्थित महाराष्ट्र का एक महत्वपूर्ण शहर है, जो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से काफी खास माना जाता है। यह शहर अपने महाकुंभ मेले के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है, जब यहां लाखों की तादाद में श्रद्धालुओं का आगमन होता है। इस दौरान यहां के दृश्य देखने लायक होते हैं, जब मोक्ष प्राप्ति के लिए श्रद्धालु एकसाथ गोदावरी नदी में डुबकी लगाकर पवित्र स्नान करते हैं। यह शहर तीर्थनगरी के नाम से जाना जाता है। त्रिम्बाकेश्वर यहां के प्रसिद्ध मंदिरों में गिना जाता है। लेकिन इसके अलावा इस शहर का अपना वृहद इतिहास भी है, जो कई सौ साल पुराना है।

जानकारी के अनुसार यह प्राचीन समय में गुलशनबाद के नाम से जाना जाता था। इस शहर का अपना अलग ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। अतीत से जुड़ी कई महत्वपूर्ण संरचनाओं को यहां आज भी देखा सकता है। इस लेख में आज हम आपको नासिक स्थित एक प्राचीन किले (भास्करगढ़ फोर्ट) के बारे में बताने जा रहे हैं, जानिए यह किला आपकी नासिक यात्रा को किस प्रकार खास बना सकता है।

भास्करगढ़ किला

भास्करगढ़ किला

PC-Ccmarathe

भास्करगढ़ महाराष्ट्र के नासिक स्थित एक ऐतिहासिक किला है, जिसे बासगढ़ के नाम से भी संबोधित किया जाता है। यह किला नासिक के इगतपुरी से 48 कि.मी की दूरी पर त्र्यंबक पहाड़ी श्रृंखला में स्थित है। अतीत से जुड़े पन्नों के अनुसार इस किले का निर्माण देवगिरी के यादव राजवंश के दौरान किया गया था। लगभग 1279 से लेकर 1308 तक यह यादवों के अधीन रहा, जिसके बाद इसपर बहमनी सल्तनत और अहमदनगर के निजामशाही का कब्जा हुआ। 1619 में शाहजी राजे ने बिजापुर के मोहम्मद आदिल शाह पर चढ़ाई की और किले पर अधिकार कर लिया। बाद में यह किला फिर से आदिल शाह के पास चला गया। 1688 में यह किला मुगलों के साम्राज्य में शामिल हुआ और बाद में इस किले को मराठा शासकों ने मुगलों को हराकर इसपर अपना पताका फहरा दिया। इस किले को लेकर इतिहास में कई लड़ाइयां दर्ज हैं।

आने का सही समय

आने का सही समय

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चुंकि यह एक ऐतिहासिक किला है, और पहाड़ी पर स्थित है, इसलिए यहां सालभर ट्रेकर्स और इतिहास प्रेमियों का आवागमन लगा रहता है। लेकिन अगर आप अनुकूल मौसम में यहां का भ्रमण करना चाहते हैं तो आप अक्टूबर से लेकर मार्च के मध्य यहां आ सकते हैं। ग्रीष्मकाल के दौरान यह स्थल काफी ज्यादा उष्मा ग्रहण करता है। आप यहां मॉनसून के दौरान भी यहां आ सकते हैं।

क्यों आएं भास्करगढ़ ?

क्यों आएं भास्करगढ़ ?

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भास्करगढ़ किले का भ्रमण कई उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है। यह स्थल प्राकृतिक, ऐतिहासिक और एडवेंचर के लिहाज से काफी खास माना जाता है। एक प्रकृति प्रेमी से लेकर रोमांच का शौक रखने वालों के लिए यहां बहुत कुछ उपलब्ध है। इतिहास में दिलचस्पी रखने वालों और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थल किसी खजाने से कम नहीं। अगर आप एडवेंचर का शौक रखते हैं, तो यहां ट्रेकिंग और हाइकिंग का रोमांच भरा अनुभव ले सकते हैं। अगर आप फोटोग्राफी का शौक रखते हैं, तो यहां के शानदार दृश्यों को अपने कैमरे में कैद कर सकते हैं। इसके अलावा आप यहां पास में स्थित हनुमान मंदिर के दर्शन का सौभाग्य भी प्राप्त कर सकते हैं।

कैसे करें प्रवेश

कैसे करें प्रवेश

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चूंकि यह नासिक के पास स्थित है, इसलिए आप यहां सड़क मार्ग के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं। नासिक का अपना हवाईअड्डा और रेलवे स्टेशन भी है, इसलिए आप यहां हवाई और रेल मार्गों की मदद से पहुंच सकते हैं। नासिक पहुंचने के बाद प्राइवेट टैक्सी या कैब की मदद से किले के आधार तक पहुंच सकते हैं। पहाड़ी के नीचे दहेलपड़ गांव है, जहां से आपको किले तक ट्रेकिंग के जरिए पहुंचना होगा। लगभग 1 घंटे की ट्रेकिंग के जरिए आप आसानी से किले तक पहुंच सकते हैं।

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