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सोनपुर मेला : हाथियों की खरीदारी करने अपने लाव-लश्कर समेत यहां आते थे चंद्रगुप्त मौर्य और अकबर

बिहार में गुलाबी ठंड ने दस्तक दे दी है। अगर आप पटना के रहने वाले हैं तो एक दिन कामकाज से छुट्टी लेकर परिवार और दोस्तों के साथ थोड़ा समय एंजॉय करें और पकड़ ले सोनपुर की गाड़ी। क्योंकि यहां जल्द शुरू होने वाला है विश्वप्रसिद्ध सोनपुर पशु मेला। दावा किया जाता है कि सोनपुर का पशु मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है। इस मेले की तुलना राजस्थान के पुष्कर में लगने वाले ऊंटों के मेले से भी की जाती है।

किसी जमाने में सोनपुर मेले में सुईं से लेकर हाथी तक, सब कुछ बिकता था जिसकी खरीदारी करने यहां खुद बादशाह अकबर और मगध सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य भी आया करते थे।

बिकती थी सुईं से लेकर हाथी

सोनपुर मेला जिसे हरिहर क्षेत्र मेला भी कहा जाता है, एशिया के सबसे बड़े पशु मेले के तौर पर विख्यात है। इस मेले में हर तरह के पशु जैसे अलग-अलग नस्ल के घोड़े, कुत्ते, ऊंट और कई प्रजातियों के पक्षी बिका करते हैं। पिछले साल इस मेले में 5500 घोड़े आए थे। लेकिन सोनपुर मेले का मुख्य आकर्षण यहां बिक्री के लिए आने वाले हाथी होते हैं।

sonpur

हालांकि पिछले कुछ सालों से हाथियों की बिक्री यहां बंद कर दी गयी थी और उन्हें सिर्फ दान में देने के लिए ही मेले में लाया जाता था। लेकिन इस साल से सोनपुर मेले में हाथियों को दान में भी देने पर पाबंदी लगा दी गयी है। मिली जानकारी के अनुसार इस साल सिर्फ पुरानी रीति के अनुसार ही मेले में हाथियों को लाया जाएगा और उन्हें वापस उनके मालिक के पास ही भेज दिया जाएगा।

अपने लाव-लश्कर समेत आते थे अकबर-चंद्रगुप्त

मुगलकाल हो या मौर्य वंश का शासनकाल, युद्धों में हाथियों और घोड़ों की अलग भूमिका होती थी। इतिहास में हमने कई युद्धों के बारे में भी पढ़ा है जिन्हें हाथियों के सहारे ही जीता गया था। सैंकड़ों साल पहले सोनपुर मेला युद्धों में जाने वाले लड़ाकु हाथियों की खरीद-बिक्री के लिए प्रसिद्ध था। स्थानीय लोगों की मानें तो बादशाह अकबर के साथ विभिन्न युद्ध में जाने के लिए जिन हाथियों को तैयार किया जाता था, उन्हें सोनपुर मेले से ही खरीदा जाता था और इन हाथियों का चुनाव करने खुद अकबर सोनपुर आते थे।

कई बार जब बादशाह अकबर खुद मेले में नहीं आ पाते थे, तब वह अपने सेनापति मानसिंह को मेले से हाथियों व अस्त्र-शस्त्रों की खरीदारी करने का काम सौंपते थे। मगध सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य की सेना के घोड़े, हाथी और बैल की खरीदारी भी सोनपुर मेले से ही होती थी। 1857 की लड़ाई में अपनी सेना के लिए वीर कुंवर सिंह ने अरबी घोड़ों, हाथी व हथियारों की खरीदारी के लिए सोनपुर मेले को ही चुना था।

हाईटेक बन रहा है हरिहर क्षेत्र मेला

mela sonpur

सोनपुर का हरिहर क्षेत्र पशु मेला अब सिर्फ पशुओं की खरीद-बिक्री तक ही नहीं, बल्कि समय के साथ हाईटेक भी बनता जा रहा है। धीरे-धीरे मेले में पशुओं की बिक्री कम होने लगी तो अब यहां किसानों के ट्रैक्टर और युवाओं के लिए बाईक्स की बिक्री ने जोर पकड़ लिया है। मेले में कई ऑटो कंपनियां अपने शोरूम खोलती हैं, जहां से लोग अपनी मनपसंद ट्रैक्टर और बाईक्स की खरीदारी करते हैं।

इसके अलावा मेले में किसानों को खेती के आधुनिक पद्धतियों के बारे में भी बताया जाता है। सोनपुर मेले से गर्म कपड़ों की खरीदारी करना बिल्कुल मत भूलें, क्योंकि यहां कश्मीर और मेरठ से भी व्यापारी आते हैं। यहां आपको किफायती कीमतों पर अच्छी क्वालिटी के सामान मिल जाएंगे।

कब से शुरू होगा सोनपुर मेला

हर साल सोनपुर मेला की शुरुआत कार्तिक पूर्णिमा के समय से होती है। इस साल 25 नवंबर से मेले की शुरुआत होगी, जो अगले 32 दिनों तक चलेगा। 27 नवंबर को शाही गज स्नान होगा, जिसमें गंडक और गंगा नदी के संगम स्थल पर मेले में आने वाले हाथियों को नदी में डूबकी लगायी जाती है। इस मेले का विस्तार करीब 3 एकड़ के क्षेत्र में होता है। मेले में कई तरह के एक्टिविटिज का भी आयोजन किया जाता है, जिनमें घोड़े की चाल, कुश्ती, नौका दौड़ प्रतियोगिता आदि शामिल होते हैं।

harihar shetra mela

इसके अलावा सोनपुर मेले में होने वाला थिएटर भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र होता है। बिहार की लोक संस्कृति को समझने और यहां के जायकेदार व्यंजनों को चखने के लिए सोनपुर का मेला बिल्कुल परफेक्ट डेस्टिनेशन है। हर साल बड़ी तादाद में सोनपुर मेले में विदेशी मेहमान भी आते हैं। विदेशी पर्यटकों की सुविधा के लिए बिहार के पर्यटन विभाग की तरफ से मेला परिसर में करीब 20 स्वीस कॉटेज तैयार करने का काम किया जा रहा है, जिनकी बुकिंग शुरू हो चुकी है।

क्यों कहा जाता हरिहर क्षेत्र मेला

इस मेले का नाम यहां स्थापित भगवान शिव और विष्णु के मंदिर, हरिहरनाथ के कारण पड़ा है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु के दो भक्तों ने धरती पर हाथी और मगरमच्छ के रूप में जन्म लिया था। एक बार हाथी को मगरमच्छ ने पकड़ लिया। कई दिनों तक जब दोनों के बीच युद्ध चलता रहा तब हाथी ने भगवान विष्णु को याद किया, जिन्होंने मगरमच्छ के चुंगल से उसे छुड़ाया।

sonpur mela

इसके बाद ही यहां भगवान शिव और विष्णु को समर्पित हरिहरनाथ का मंदिर स्थापित किया गया। पशुओं के बीच हुए इस युद्धस्थल पर पशुओं की खरीद-बिक्री को काफी शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि पुराने समय में यह मेला हाजीपुर में लगता था और सोनपुर में लोग सिर्फ हरिहरनाथ मंदिर में पूजा करने जाते थे। बाद में मुगल शासनकाल के दौरान इस मेले का स्थान परिवर्तित किया गया।

कैसे पहुंचे सोनपुर

सोनपुर बिहार के सारण जिले में पटना से महज 25 किमी और हाजीपुर से 3 किमी की दूरी पर है। पटना से सोनपुर जाने का सबसे आसान रास्ता दीघा-सोनपुर पुल से होकर है। इस पुल से होकर पटना से सोनपुर तक पहुंचने में आपको महज 40-45 मिनट का समय लगता है। निजी गाड़ी के अलावा पटना से और सोनपुर से आपको ऑटो भी मिल जाएंगी, जो आपको दीघा-सोनपुर पुल पार कर मेला क्षेत्र में पहुंचा देंगी।

सोनपुर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन सोनपुर, पटना और हाजीपुर है। सभी स्टेशनों के बाहर से आपको सोनपुर के लिए ऑटो मिल जाएंगी। सोनपुर मेले में आने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पटना का जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट है। हाजीपुर के कोनहरा घाट से लेकर सारण के पहलेजा घाट तक फैले सोनपुर मेले को पूरा देखने में 3 से 4 दिनों का समय लग सकता है।

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