मध्य प्रदेश अपने अंदर कई इतिहास समेटे हुए हैं। यहां आपको धार्मिक व ऐतिहासिक स्मारकों का समायोजन देखने को मिलता है। यहां आपको कई खास स्मारक देखने को मिलती है, जो आज भी अपनी खूबसूरती से पर्यटकों को दीवाना बना देती है। इसी में से एक है मुगल काल में बनी काला ताजमहल।
जी हां, काला ताजमहल... मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में स्थित ये स्मारक शाह नवाज खान का मकबरा है। कहा जाता है कि दक्कन के युद्ध में शाह नवाज ने जहांगीर को विजय दिलाई थी, जिसके बाद ही जहांगीर ने उसे शाह नवाज की उपाधि से नवाजा था। उसका असली नाम इरज था, जो अब्दुर्रहीम खान-ए-खाना का ज्येष्ठ पुत्र और मुगलों का सेनापति था। यही पर शाह नवाज की पत्नी को भी दफनाया गया था।
जहांगीर ने बनवाया था काला ताजमहल
इस मकबरे का निर्माण 1622 ईस्वी में मुगल बादशाह जहांगीर ने उसकी याद में करवाया था, जिसे बनने में एक साल का समय लगा था। कहा जाता है कि इस मकबरे के किनारे पर चार छोटी मीनारें है, जिसकी तरह ही आगरा के ताजमहल की मीनारें बनाई गई हैं। उतावली नदी के किनारे पर स्थित मुख्य शहर के 4 किमी. दूर काला ताजमहल मुगल वास्तुकला का एक सुंदर नमूना है। यहां पर आपको एक बगीचा भी देखने को मिलेगा।
काले पत्थर से बना है शाह नवाज की कब्र
इस कब्र के अंदर की दीवारों पर आपको कई खूबसूरत पेंटिंग भी देखने को मिलेगी। कहा जाता है कि शाह नवाज खान मुगल वंश का ही था। इस मकबरे को बनाने के लिए काल पत्थरों का उपयोग किया गया था, इसीलिए इसे काला ताजमहल भी कहा जाता है। हालांकि, इसे ताजमहल नाम आगरा के ताजमहल बनने के बाद दिया गया था।
काला ताजमहल को देखकर ही बनाया गया ताजमहल
इस मकबरे का आकार पानदार के आकार का है, इसीलिए इसे पांडन महल भी कहा जाता है। इसके अलावा, इसे पहलवान शाह की दरगाह के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि मुगल बादशाह शाहजहां ने ताजमहल बनाने का विचार भी इसी से लिया था। यह आगरा के ताजमहल से काफी छोटा है, लेकिन आज भी इसकी खूबसूरती देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।
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