Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »जाने श्रीदेवी के जन्मस्थान के बारे में कुछ खास बातें

जाने श्रीदेवी के जन्मस्थान के बारे में कुछ खास बातें

भारत की पहली मेगास्टार श्रीदेवी का जन्म तमिलनाडु स्थित शिवकासी में हुआ था, जो आज भारत के सबसे बड़े पटाखा बाजार के नाम से प्रसिद्ध है.

By Goldi

अपनी खूबसूरती, अपनी अदाकारी, से सबको अपना दीवाना बनाने वाली श्रीदेवी के अकस्मात निधन ने बॉलीवुड जगत समेत उनके फैन्स को सदमा दे दिया हैं। बॉलीवुड की पहली महिला मेगास्टार श्रीदेवी आज बीता हुआ कल हो गयी हैं। श्रीदेवी के निधन की खबर सुनकर कोई भी इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहा है, कि क्या यह वाकई सच है या मात्र अफवाह, लेकिन ये अफवाह एक काला सच था, जिसे कोई भी समझने को या फिर मानने को तैयार नहीं था कि, बॉलीवुड की पहली महिला सुपर स्टार श्रीदेवी अब इस दुनिया में नहीं रहीं। बता दें, श्रीदेवी का निधन दिल का दौरान पड़ने से हुआ।

सभी जानते हैं कि, श्रीदेवी कपूर सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं बल्कि दक्षिण भारत की भी बड़ी स्टार थी। श्रीदेवी का जन्म तमिलनाडु के विरुधुनगर जिला के शिवकाशी शहर में हुआ था। तमिलनाडु का यह शहर भारत के सबसे बड़े पटाखा मार्केट के लिए जाना जाता है, इसके अलावा शिवकाशी अपने शक्तिशाली छपाई उद्योग और माचिस-निर्माण उद्योगों के लिए भी मशहूर हैं। जवाहरलाल नेहरू ने इसे "कुट्टी जापान" (अंग्रेजी में मिनी जापान) का नाम दिया था।

शिवकाशी का इतिहास

शिवकाशी का इतिहास

शिवकाशी को 15 वीं शताब्दी में पांड्या राजा हरिकेसी परकीकिमा पांडियन के शासनकाल के दौरान स्थापित किया गया था। यह शहर मदुरै साम्राज्य का एक हिस्सा था और बाद में पंड्या, विजयनगर साम्राज्य, मदुरै नायक, चंदा साहिब, कर्नाटक राज्य और ब्रिटिश द्वारा कई बार शासित किया गया है।Pc:Ssriram mt

काशी विश्वनाथ स्वामी मंदिर

काशी विश्वनाथ स्वामी मंदिर

यह मंदिर तमिलनाडु के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। दक्षिणी मदुरै के शासक राजा हरिकेसरी परक्किराम पांडियन, काशी से एक शिवलिंग लाए और उसे अपने राज्य के इस हिस्से में स्थापित किया। जिसने इस शहर को यह नाम दिया। बाद में 15 वीं और 16 वीं शताब्दी में, राजा पांडियन और राजा थिरुमलाई नायकर ने इस प्रसिद्ध शिव मंदिर को विस्तृत किया और इसे काशी विश्वनाथ स्वामी मंदिर के रूप में संबोधित किया। तब से लेकर अब तक यह मंदिर कई बार पुनर्निर्मित और पुनर्विकसित किया गया है। पहली बार इस मंदिर को आनईअप्पा ग्नानि ने पुनर्निर्मित किया। आगे चलकर नायकरों ने इस मंदिर को और विकसित किया और 1659 में मुथू वीरप्पा नायकर ने इस मंदिर को एक रथ भेंट किया जो त्योहारों के दौरान जुलूस में प्रयोग किया जाता है।Pc:Ssriram mt

श्री भद्रकाली अम्मान मंदिर

श्री भद्रकाली अम्मान मंदिर

श्री भद्रकालीअम्मान मंदिर

श्री भद्रकालीअम्मान मंदिर

इस मंदिर में पंगुनी पोंगल और चिथिराई पोंगल त्यौहार अप्रैल और मई के महीनों में क्रमशः देवी "मरियम्मा" और "भद्रकालीअम्मा" के लिए मनाया जाता है। दोनों त्यौहार संबंधित मंदिरों में ध्वज उत्थापन के दिन से दस दिनों तक चलते रहते हैं।Pc:Ssriram mt

तिरुतनंगल

तिरुतनंगल

विरुधुनगर से शिवकाशी के मार्ग पर स्थित तिरुतनंगल, भगवान विष्णु के 108 पवित्र धामों में से एक है। तिरुतनंगल का आसपास का क्षेत्र लगभग 4000 ई.पू. से बसा है। यह माना जाता है कि संगम काल के मुदक्कोर्रनर, पोर्कोल्लन वेन्नहनर और अधिरेयन सेंगन्ननर नामक तीन कवि इस शहर में रहते थें। इस शहर का प्राचीन नाम थंगल था, और यह नाम सिलापड़िकरम में उल्लिखित है। तिरुतनंगल में एक कम ऊंची पहाड़ी पर स्थित निन्रनारायण पेरूमाल कोइल मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। यह मंदिर पांड़ियन के शासनकाल दौरान बनाया गया था। यह मंदिर 10 वीं सदी में पुनर्निर्मित किया गया और नायकों के शासनकाल दौरान फिर से पूरी तरह बनाया गया था।

पराशक्ति मरियम्मा मंदिर

पराशक्ति मरियम्मा मंदिर

पराशक्ति मरियम्मा मंदिर शिवकाशी शहर के मुख्य आकर्षणों में से एक है। यह एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। इस मंदिर में पंगुनी उत्तिरम त्योहार को बड़े धूमधाम तथा वैभव के साथ मनाया जाता है,21 दिनों के लिए मनाया जाने वाला यह त्योहार शिवकाशी तथा आसपास के स्थानों के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

पिलवक्कल बांध

पिलवक्कल बांध

मदुरै से 90 किमी और विरुधुनगर से 45 किमी की दूरी पर स्थित है। यह बांध विरुधुनगर जिले का एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल है। यह बांध कोविलर और पेरियार बांध नामक 2 भागों में विभाजित है। कोविलर बांध की पानी संग्रह करने की क्षमता 133 मीटर फुट की है और पेरियार बांध की क्षमती 192 मीटक फुट की है। ये बांध अक्टूबर से लेकर दिसंबर के महीनों के दौरान पानी से पूरी तरह भरा रहता है। इस बांध के आसपास कई रंग बिरंगे पक्षियों को भी देखा जा सकता है।

जरुर खाएं

जरुर खाएं

शिवकाशी के प्रसिद्ध पकवानों में से एक है, परोटा जिसे एक विशेष ग्रेवी के साथ परोसा जाता है। इसके अलावा शिवकाशी अपने अपने पकोड़ों के लिए प्रसिद्ध है। पकोड़ा के साथ आम तौर पर खीर (पाल साधम) दिया जाता है और इसे शादियों में भी परोसा जाता है। त्यौहारों के मौसम में, शहर की मिठाइयों की दुकानों में करूपट्टी मिठाई (चावल के आटे और ताड़ के शक्कर से बनी) और वेल्लाई मिठाई (चावल के आटे और चीनी से बनी) जैसी मिठाइयां बेची जाती हैं।

पटाखा फैक्ट्री

पटाखा फैक्ट्री

भारत में पटाखा उत्पादन का आधा हिस्सा (50 से 55 प्रतिशत) हिस्सा तमिलनाडु के शिवकाशी का ही है। औद्योगिक सूत्रों के मुताबिक, शिवकाशी साल में अकेले ही 50 हजार टन का पटाखा उत्पादन करता है और जिस हिसाब से इसका टर्नओवर करीब 350 करोड़ रुपए के करीब होता है।

More News

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+