वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार, 23 जुलाई को वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया, जिसमें ओडिशा में पर्यटन आकर्षणों के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा सहायता प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, मंदिरों, शिल्प, प्राकृतिक परिदृश्य, वन्यजीव अभयारण्यों और स्वच्छ समुद्र तटों पर जोर देते हुए ओडिशा में पर्यटन को समर्थन देने की प्रतिबद्धता जताई।
ओडिशा अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, जो हर साल बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करती है। आइए इस समर्थन से राज्य को मिलने वाले फायदों और उन पर्यटक स्थलों की समीक्षा करें जिन्हें और अधिक विकसित किया जा सकता है।

नीचे ओडिशा में पर्यटक स्थलों की श्रेणीबद्ध सूची और उनके वार्षिक पर्यटक संख्या के बारे में जानकारी दी गई है। ये वो पर्यटन स्थल हैं, जहां पर पर्यटन के विकास के लिए केंद्र सरकार धन आवंटित कर सकती है। इनमें से किस स्थल को प्राथमिकता दी जाएगी और किसे विकास के रथ में पीछे रखा जायेगा, यह केंद्र सरकार जल्द ही तय करेगी।
धार्मिक स्थल
- जगन्नाथ मंदिर, पुरी
- वार्षिक आगंतुक संख्या: लगभग 3 करोड़
- विवरण: हिंदुओं के चार धाम यात्रा स्थलों में से एक, रथ यात्रा (रथ उत्सव) के लिए प्रसिद्ध।
- लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर
- वार्षिक आगंतुक संख्या: लगभग 15 लाख
- विवरण: भगवान शिव को समर्पित प्राचीन हिंदू मंदिर, अपनी कलिंग वास्तुकला के लिए जाना जाता है।
- कोणार्क सूर्य मंदिर
वार्षिक आगंतुक संख्या: लगभग 25 लाख
विवरण: यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, अपने रथ के आकार की वास्तुकला और जटिल नक्काशी के लिए प्रसिद्ध।
- चिल्का झील (कालिजाई मंदिर)
- वार्षिक आगंतुक संख्या: लगभग 10 लाख
- विवरण: एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झील, कालिजाई मंदिर और पक्षी देखने के लिए प्रसिद्ध।

पर्यटन सर्किट के विकास के लाभ
स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: बढ़ते पर्यटन से स्थानीय व्यवसायों जैसे होटल, रेस्तरां और दुकानों में वृद्धि हो सकती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा।
रोजगार सृजन: पर्यटन विकास विभिन्न क्षेत्रों जैसे आतिथ्य, परिवहन और पर्यटन मार्गदर्शन में नौकरियां पैदा करता है, जिससे स्थानीय निवासियों को रोजगार के अवसर मिलते हैं।
राजस्व सृजन: पर्यटकों की बढ़ती संख्या से स्थानीय और राज्य सरकारों के लिए उच्च राजस्व उत्पन्न होता है, जिसे समुदाय में पुनर्निवेश किया जा सकता है।
स्मारक और ऐतिहासिक स्थल
- कोणार्क सूर्य मंदिर
वार्षिक आगंतुक संख्या: लगभग 25 लाख
विवरण: कोणार्क सूर्य मंदिर, जिसे काला पगोडा भी कहा जाता है, 13वीं शताब्दी में पूर्वी गंगा वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम द्वारा निर्मित किया गया था।
- उदयगिरि और खंडगिरि गुफाएं, भुवनेश्वर
- वार्षिक आगंतुक संख्या: लगभग 5 लाख
- विवरण: प्राचीन जैन रॉक-कट गुफाएं जिनमें ऐतिहासिक शिलालेख और नक्काशी शामिल हैं।
- राजारानी मंदिर, भुवनेश्वर
- वार्षिक आगंतुक संख्या: लगभग 3 लाख
- विवरण: 11वीं शताब्दी का मंदिर, अपनी अनूठी वास्तुकला और विस्तृत मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध।
ओडिशा के लिए अपेक्षित लाभ
विरासत संरक्षण: विरासत पर्यटन पर ध्यान केंद्रित करने से ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और बहाली को प्रोत्साहन मिलता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि इन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाए।
सांस्कृतिक विनिमय: पर्यटक विभिन्न दृष्टिकोण और संस्कृतियां लाते हैं, जिससे पारस्परिक सांस्कृतिक समझ और सराहना बढ़ती है।
निवेश आकर्षण: उन्नत पर्यटन बुनियादी ढांचा संबंधित क्षेत्रों में आगे के निवेश को आकर्षित करता है, समग्र आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।
प्राकृतिक और साहसिक स्थल
चिल्का झील
- वार्षिक आगंतुक संख्या: लगभग 10 लाख
- विवरण: (जैसा कि ऊपर उल्लेखित है)
सिमलीपाल राष्ट्रीय उद्यान
- वार्षिक आगंतुक संख्या: लगभग 2 लाख
- विवरण: एक बाघ अभयारण्य और जैव विविधता हॉटस्पॉट, वन्यजीव सफारी और प्रकृति की सैर के लिए आदर्श।
- भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान
- वार्षिक आगंतुक संख्या: लगभग 1 लाख
- विवरण: अपने मैंग्रोव वन, खारे पानी के मगरमच्छ और समृद्ध वन्यजीव के लिए जाना जाता है।
डारिंगबाड़ी
- वार्षिक आगंतुक संख्या: लगभग 1 लाख
- विवरण: "ओडिशा का कश्मीर" के नाम से जाना जाता है, अपने सुरम्य सौंदर्य और देवदार के जंगलों के लिए प्रसिद्ध।

समुद्र तट
- पुरी समुद्र तट
- वार्षिक आगंतुक संख्या: लगभग 50 लाख
- विवरण: अपने सुनहरे रेत, समुद्र तट उत्सव और निकटवर्ती जगन्नाथ मंदिर के लिए प्रसिद्ध।
- चंद्रभागा समुद्र तट, कोणार्क
- वार्षिक आगंतुक संख्या: लगभग 5 लाख
- विवरण: अपने शांत वातावरण और सूर्य मंदिर के निकट होने के लिए प्रसिद्ध।
- गोपालपुर समुद्र तट
- वार्षिक आगंतुक संख्या: लगभग 2 लाख
- विवरण: अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जल क्रीड़ाओं के लिए प्रसिद्ध एक शांत समुद्र तट।
पर्यावरणीय लाभ
संरक्षण प्रयास: पर्यटन से उत्पन्न राजस्व को संरक्षण परियोजनाओं की ओर आवंटित किया जा सकता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित और संरक्षित किया जाए।
सतत प्रथाएं: पर्यटन सर्किट के विकास में अक्सर स्थायी पर्यटन प्रथाओं को बढ़ावा देने वाली पहल शामिल होती है, जैसे कि पर्यावरण के अनुकूल आवास और जिम्मेदार कचरा प्रबंधन।
जैव विविधता संरक्षण: बढ़ती जागरूकता और वित्तपोषण आसपास के प्राकृतिक आवासों की रक्षा का समर्थन कर सकते हैं, जिससे स्थानीय वनस्पति और जीवों को लाभ होता है।
सांस्कृतिक और जनजातीय पर्यटन
- रघुराजपुर हेरिटेज विलेज
- वार्षिक आगंतुक संख्या: लगभग 1 लाख
- विवरण: अपनी पट्टचित्र पेंटिंग्स और कारीगर समुदाय के लिए प्रसिद्ध।
- कोरापुट की जनजातिय गाँव
- वार्षिक आगंतुक संख्या: लगभग 50 हजार
- विवरण: ओडिशा की विविध जनजातीय संस्कृतियों और पारंपरिक जीवनशैली में अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
गुफा और पुरातात्विक स्थल
उदयगिरि और खंडगिरि गुफाएं
- वार्षिक आगंतुक संख्या: लगभग 5 लाख
- विवरण: (जैसा कि ऊपर उल्लेखित है)
- रत्नागिरी, ललितगिरी, और उदयगिरी (बौद्ध स्थल)
- वार्षिक आगंतुक संख्या: लगभग 3 लाख
- विवरण: प्राचीन मठ और स्तूप के साथ महत्वपूर्ण बौद्ध विरासत स्थल।
ओडिशा के लिए समग्र लाभ
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी: पर्यटन सर्किट के विकास से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे पर्यटकों के लिए कई स्थलों का दौरा करना आसान हो जाता है और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलता है।
वर्षभर पर्यटन: विविध पर्यटन सर्किट बनाने से सालभर पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे पर्यटन का मौसमी स्वभाव कम होता है और आय का स्थिर स्रोत मिलता है।
एकीकृत पर्यटन अनुभव: कई मंदिरों और सांस्कृतिक स्थलों को जोड़कर, पर्यटक एक व्यापक और समृद्ध यात्रा अनुभव का आनंद ले सकते हैं, जिससे लंबी अवधि और दोबारा यात्रा को प्रोत्साहन मिलता है।
कुल मिलाकर अगर सरकार ने पर्यटकों की संख्या के आधार पर विकास की रूपरेखा तैयार की तो जगन्नाथपुरी, लिंगराज मंदिर और करोनार्क मंदिर व उनके आसपास की जगहों का विकास निश्चित है, लेकिन अगर उन स्थलों पर फोकस किया जहां संख्या कम है, तो उदयगिरि, रत्नागिरि, रघुराजपुर, कोरापुट जैसी जगहों का न केवल पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि आर्थिक विकास भी होगा।



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