उत्तराखंड के सबसे पवित्र नगरी कहे जाने वाली हरिद्वार में मंदिरों की कोई कमी नहीं है। लेकिन यहां का चंडी देवी मंदिर सबसे प्राचीन व सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। कहा जाता है कि माता का यह मंदिर करीब 1200 साल पुराना है। सभी प्रसिद्ध मंदिरों की तरह ही इस मंदिर की भी अपनी एक पौराणिक मान्यता है। माता का मंदिर भक्तों के लिए सुबह 06:00 बजे से रात के 09:00 बजे तक खुला रहता है। इस बीच मंदिर दोपहर 12:00 बजे से लेकर 02:00 बजे बंद भी रहता है।
राक्षसों का वध किया था माता चंडी देवी ने
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब दानवों के राजा शुम्भ और निशुम्भ देवताओं पर काफी अत्याचार करने लगे थे और स्वर्ग लोक पर कब्जा जमाना चाहते थे, तब माता पार्वती के तेज से चंडिका देवी का उदय हुआ था। उस समय माता चंडिका ने इसी स्थान पर दोनों राक्षसों का वध किया था और कुछ समय विश्राम भी किया था। इसी कारणवश इस पहाड़ी पर माता का मंदिर बना, जिसे वर्तमान समय में देशभर के लोग जानते हैं और माता के मंदिर में अपना शीष नवाने आते हैं।

आदि गुरु शंकराचार्य ने बनवाया था मंदिर
कहा जाता है कि 8वीं शाताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य ने मंदिर में मूर्ति स्थापित की थी, जिसका वर्तमान समय में पूजा-अर्चना किया जाता है। आज जिस मंदिर की पूजा की जाती है, उसका स्वरूप साल 1929 ईस्वी में राजा सूचेत सिंह ने दिया था। हरिद्वार में स्थित माता चंडी देवी का मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता खंभ रूप में विराजित है और अपने भक्तों को दर्शन देती हैं। कहा जाता है कि माता के मंदिर जो भी भक्त सच्चे मन से वर मांगता है, माता उसे अवश्य पूरा करती हैं।

चंडी देवी मंदिर कैसे पहुंचें?
चंडी देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट देहरादून (जॉली ग्रांट हवाई अड्डा) में स्थित है, जो यहां से करीब 70 किमी. की दूरी पर स्थित है। वहीं, यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन हरिद्वार में ही है। इसके अलावा बस की भी सुविधा यहां पहुंचने के लिए मौजूद है। माता की चढ़ाई करीब 3 किमी. की है, जो भक्त जय माता के जयकारों के साथ एक से डेढ़ घंटे में पूरा कर लेते हैं।
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