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चार धाम यात्रा - वो सुख जिसकी कल्पना शब्दों में नहीं हो सकती

By Syedbelal

चार धाम यानी बद्रीनाथ, रामेश्वरम, द्वारिका और पुरी की यात्रा से ज्यादा रोमांचक यात्रा दूसरी नहीं हो सकती। हिंदू धर्म में चार धाम यात्रा का वही महत्व है जो इस्माल में मक्का की यात्रा का है।

पूरे जीवन में एक बार चार धाम की यात्रा करने का विशेष महत्व है। अक्सर उत्तराखंड के छोटा चार धाम यात्रा को लेकर गफलत की स्थिति पैदा हो जाती है। इस यात्रा ने भी आधुनिक इतिहास में काफी ख्याति हासिल की है। वहीं वास्तविक चार धाम यात्रा पूरे भारत में फैला हुआ है।

चार धाम भारत के चारों कोणे पर स्थित है। उत्तर में बद्रीनाथ में बद्रीनाथ मंदिर, दक्षिण में रामेश्वर में रामनाथस्वामी मंदिर, पश्चिम में द्वारिका में द्वारिकाधीश मंदिर और पूर्व में पुरी में जगन्नाथ मंदिर स्थित है।

इन मंदिरों को घूमने की खूबसूरती और चुनौतियां गंतव्य स्थान में न होकर इसकी यात्रा में है। ऐसा कहा जाता है कि यात्रा में मुश्किलों के बढ़ने साथ-साथ आपका गुण भी बढ़ता है।

अगर आप पैदल यात्रा कर रहे हैं तो इससे भगवान ज्यादा प्रसन्न होते हैं। हालांकि समय के साथ-साथ सुविधाओं के आने से इन मंदिरों तक पहुंचना काफी आसान हो गया है।

चार धाम की यात्रा

चार धाम की यात्रा

चार धाम यात्रा के बारे में एक मान्यता यह है कि शंकराचार्य ने यह यात्रा की थी। चार धाम में से तीन वैष्णव पंथ और एक शिव पंथ से संबंधित है। आमतौर पर यह यात्रा पुरी से शुरू होकर दक्षिणवर्त दिशा में आगे बढ़ती है।

बद्रीनाथ

बद्रीनाथ

इसे बद्रीनारायण भी कहा जाता है। उत्तराखंड के बद्रीनाथ स्थित यह मंदिर भगवान विष्णु के एक रूप बद्रीनाथ को समर्पित है। यह पवित्र स्थान मूल चार धाम यात्रा और छोटा चार धाम यात्रा दोनों का हिस्सा है।

खराब मौसम के कारण इसे साल में सिर्फ अप्रैल से नवंबर तक ही खोला जाता है। बद्रीनाथ को सबसे पवित्र हिंदू तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है।

रामेश्वरम

रामेश्वरम

रामेश्वरम स्थित रामनाथस्वामी मंदिर की प्रतिष्ठा इस बात को लेकर है कि यहां पूरे भारत के हिंदू मंदिरों में से सबसे लंबा कॉरीडोर है। यह कॉरीडोर करीब 3850 फीट लंबा है और इसमें 1212 स्तंभ लगे हुए हैं।

इस खूबसूरत मंदिर का ज्यादातर विस्तार पांडेया के शासनकाल में किया गया था। शिवलिंग का पवित्र स्थान होने के साथ ही यह 12 ज्योतिर्लिगों में से एक है।

द्वारिका

द्वारिका

द्वारिकाधीश मंदिर गुजरात के द्वारिका शहर में स्थित है। ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर करीब 2500 साल पुराना है। द्वारिकाधीश का शब्दिक अर्थ होता है द्वारिका का पहला भगवान।

इस मंदिर को शहर की याद में यहां के राजा भगवान कृष्णा ने खुद बनवाया था। हालांकि महाभारत की लड़ाई के बाद यह मंदिर जलमग्न हो गया था। मंदिर का गर्भ गृह 72 स्तंभों पर टिका है और इसे जगत मंदिर कहा जाता है।

उत्तर के प्रवेश द्वार को मोक्ष द्वार यानी मुक्ति का दरवाजा कहा जाता है। वहीं दक्षिण के प्रवेश द्वार को स्वर्ग द्वार कहा जाता है।

पुरी

पुरी

ओडीशा स्थित पुरी का जगन्नाथ मंदिर वार्षिक रथ यात्रा के लिए प्रसिद्ध है। पूरे साल इस तटवर्ती क्षेत्र में उत्सव का माहौल रहता है।

यह हिंदुओं का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। इस मंदिर में सुदर्शन चक्र रखा हुआ है, जिसके लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यहां आभूषणों से बना एक चबूतरा है, जिसे रत्नवेदी कहा जाता है।

इस पर भगवान जगन्नाथ, बालभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमा रखी गई है। पारंपरिक तौर पर चारधाम की यात्रा यहीं से शुरू होती है।

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