करीब 21 सालों तक बंद रहने के बाद छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सल प्रभावित इलाके में स्थित राम मंदिर को आखिरकार फिर से खोल दिया गया है। इस मंदिर को पिछले सोमवार को ही खोल दिया गया। मंदिर खुलने के बाद इलाके के सभी ग्रामवासी आगे आएं और उन्होंने मंदिर की साफ-सफाई की।
इसके बाद सभी ने साथ मिलकर भगवान राम, देवी सीता और लक्ष्मण की मूर्तियों को भी अच्छी तरह से साफ कर मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू की। 21 सालों बाद मंदिर के खुलने से खुश इलाके के निवासियों ने नाच-गाकर अपनी खुशी व्यक्त की।

भगवान राम का अतिप्राचीन यह मंदिर छत्तीसगढ़ के बस्तर डिविजन में सुकमा जिला मुख्यालय से लगभग 90 किमी दूर केरलापेंडा गांव में मौजूद है। मंदिर को खोलने में CRPF की 74वीं वाहिनी के जवानों ने प्रमुख भूमिका निभायी है। इस मौके पर सुकमा के एसपी किरण चव्हान ने बताया कि साल 2003 में नक्सलियों ने जोर-जबर्दस्ती इस मंदिर को बंद करवा दिया था। यह ऐसा समय था, जब इलाके में नक्सलियों का प्रभाव काफी ज्यादा था।
उन्होंने बताया कि नक्सलियों और माओवादियों ने धमकी दी थी कि कोई भी गांववासी न तो इस मंदिर को खोलेगा और न ही यहां पूजा-पाठ की जाएगी। उन्होंने बताया कि नक्सलियों और माओवादियों ने काफी सोची-समझी रणनीति के तहत ही इस मंदिर को बंद करवाया था। दरअसल, यह इलाका माओवादियों और नक्सलियों का गढ़ था। यहां वे अपनी सभी बैठकें और रणनीतियां तैयार करते थे। इन बैठकों में कोई बाधा न आएं, इसलिए मंदिर को बंद करवा दिया गया था।

बस्तर क्षेत्र में जब लगभग 40 सुरक्षा कैम्प लगाए गये तो सुरक्षाकर्मियों को गांवों तक पहुंचने में आसानी होने लगी। केरलापेंडा और लखपाल गांवों के बीच में भी एक सुरक्षा कैम्प लगाया गया ताकि स्थानीय आदिवासियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच संवाद स्थापित हो सके जो पहले नहीं हो पाता था।
इसी तरह से एक दिन बातचीत के दौरान CRPF के एक जवान का ध्यान इस बंद मंदिर की ओर गया। ग्रामीणों से पूछने पर पता चला कि नक्सलियों ने साल 2003 में इस मंदिर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी, जिस कारण इसे बंद कर दिया गया। यह मंदिर कब और किसने बनवाया था, इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी तो उपलब्ध नहीं है। लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह मंदिर 1970 के दशक में बनवाया गया था।

जमकर होगा राम नवमी का उत्सव
लगभग 2 दशकों तक बंद रहने के बाद छत्तीसगढ़ का यह मंदिर आखिरकार चैत्र नवरात्रि के समय खुला है। इस खुशी में स्थानीय गांव के निवासियों ने धूमधाम से राम नवमी का त्योहार मनाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। मिली जानकारी के अनुसार मंदिर के आसपास के गांवों में रहने वाले लगभग 800 लोगों ने राम नवमी के समय यहां भंडारा करने की योजना बनायी है। इसके साथ ही मंदिर परिसर को सजाया और पारंपरिक तरीके से रामलला का जन्मोत्सव मनाने की तैयारियां की जा रही हैं। बता दें, इस साल राम नवमी का उत्सव 17 अप्रैल (बुधवार) को मनाया जाएगा।



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