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महाभारत में वर्णित ये नगर आज भी मौजूद हैं

महाभारत का कुरुक्षेत्र तो आपको याद ही होगा ना, जहां महाभारत का युद्ध लड़ा गया था...जी हां यह कुरुक्षेत्र कहीं और नहीं बल्कि हरियाणा राज्य में स्थित है।

By Goldi

हम बचपन से ही टीवी पर महाभारत और रामायण जैसे टीवी शो देखते चलते आ रहे हैं...जहां कुछ लोग महाभारत को काल्पनिक बताते हैं तो वहीं इसे लेकर कई कहानियां और मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे सच मानते हैं तो कुछ इसे महज कथा बताते हैं।

जैसा की सभी जानते हैं, महाभारत का युद्ध कौरवों और पांडवों के बीच लड़ा गया था..युद्ध से पहले कौरवों ने कई बार छल से पांडवों को हराने की कोशिश की थी।अगर महाभारत को ढंग से देखा और समझा जाए तो महाभारत का युद्ध कौरवों के छल-कपट के खिलाफ था, जिसे पांडवों ने कृष्ण की सहायता से जीता था।

अगर आपने महाभारत देखा होगा तो आपको ज्ञात होगा कि, भारत देश महाभारतकाल में कई बड़े जनपदों में बंटा हुआ था। जी हां, आप बिल्कुल सही समझे आज हम आपको अपने लेख के जरिये महाभारत काल के उन शहरों से रूबरू कराने जा रहे हैं जो अब टूरिस्ट स्पॉट बन चुके हैं ।

महाभारत का कुरुक्षेत्र तो आपको याद ही होगा ना, जहां महाभारत का युद्ध लड़ा गया था...जी हां यह कुरुक्षेत्र कहीं और नहीं बल्कि हरियाणा राज्य में स्थित है। सिर्फ कुरुक्षेत्र ही नहीं बल्कि महाभारत की कई और खूबसूरत जगहें हैं जो भारत में आज लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में परवर्तित हो चुके हैं। तो आइये जानते हैं

कुरुक्षेत्र

कुरुक्षेत्र

हरियाणा के अम्बाला इलाके को कुरुक्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है। यहां महाभारत की प्रसिद्ध लड़ाई हुई थी। यही नहीं, आदिकाल में ब्रह्माजी ने यहां यज्ञ का आयोजन किया था। इस स्थान पर एक ब्रह्म सरोवर या ब्रह्मकुंड भी है। श्रीमद् भागवत में लिखा हुआ है कि महाभारत के युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने यदुवंश के अन्य सदस्यों के साथ इस सरोवर में स्नान किया था।

PC: Shekhartagra

वाणगंगा

वाणगंगा

कुरुक्षेत्र से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है वाणगंगा। कहा जाता है कि महाभारत की भीषण लड़ाई में घायल पितामह भीष्म को यहां सर-सैय्या पर लिटाया गया था। कथा के मुताबिक, भीष्ण ने प्यास लगने पर जब पानी की मांग की तो अर्जुन ने अपने वाणों से धरती पर प्रहार किया और गंगा की धारा फूट पड़ी। यही वजह है कि इस स्थान को वाणगंगा कहा जाता है।

हस्तिनापुर

हस्तिनापुर

महाभारत में उल्लिखित हस्तिनापुर का इलाका मेरठ के आसपास है। यह स्थान चन्द्रवंशी राजाओं की राजधानी थी। सही मायने में महाभारत युद्ध की पटकथा यहीं लिखी गई थी। महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने हस्तिनापुर को अपने राज्य की राजधानी बनाया।

pc:Sanjeev Kohli

इन्द्रप्रस्थ

इन्द्रप्रस्थ

मौजूदा समय में दक्षिण दिल्ली के इस इलाके का वर्णन महाभारत में इन्द्रप्रस्थ के रूप में है। कथा के मुताबिक, इस स्थान पर एक वियावान जंगल था, जिसका नाम खांडव-वन था। पांडवों ने विश्वकर्मा की मदद से यहां अपनी राजधानी बनाई थी। बता दें, इन्द्रप्रस्थ नामक छोटा सा कस्बा आज भी मौजूद है।

pc:Srinath G M

पांचाल प्रदेश

पांचाल प्रदेश

हिमाचल और चंबा नदी के मध्य के क्षेत्रों में बसा पांचाल प्रदेश के रूप में उल्लिखित है।पांचाल के राजा द्रुपद थे, जिनकी पुत्री द्रौपदी का विवाह अर्जुन के साथ हुआ था। द्रौपदी को पांचाली के नाम से भी जाना जाता है।

मथुरा

मथुरा

यमुना नदी के किनारे बसा हुआ यह प्रसिद्ध शहर हिन्दू धर्म के लिए अनुयायियों के लिए बेहद प्रसिद्ध है। यहां राजा कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। यहीं पर श्रीकृष्ण ने बाद में कंस की हत्या की थी। आज भी भक्त मथुरा में कृष्ण के दर्शन देश विदेश से पहुंचते हैं।

PC:Yadav Surbhi R.

वृन्दावन

वृन्दावन

महाभारत काल से ही इस जगह को वृन्दावन के नाम से जाना जाता है...यह जगह वर्तमान में उत्तर प्रदेश में मथुरा के निकट स्थित है.. वृन्दावन को भगवान कृष्ण की बाल-लीलाओं के लिए जाना जाता है। यहां का बांके-बिहारी मंदिर प्रसिद्ध है।

PC:आशीष भटनागर

वर्नावत

वर्नावत

वर्नावत उत्तर प्रदेश के मेरठ के नजदीक ही माना जाता है। वर्णावत में पांडवों को छल से मारने के लिए दुर्योधन ने लाक्षागृह का निर्माण करवाया था। यह स्थान गंगा नदी के किनारे है। महाभारत की कथा के मुताबिक, इस ऐतिहासिक युद्ध को टालने के लिए पांडवों ने जिन पांच गांवों की मांग रखी थी, उनमें एक वर्णावत भी था। आज भी यहां एक छोटा सा गांव है, जिसका नाम वर्णावा है।

केकय प्रदेश

केकय प्रदेश

जम्मू-कश्मीर के उत्तरी इलाके का उल्लेख महाभारत में केकय प्रदेश के रूप में है। केकय प्रदेश के राजा जयसेन का विवाह वसुदेव की बहन राधादेवी के साथ हुआ था। उनका पुत्र विन्द जरासंध, दुर्योधन का मित्र था। महाभारत के युद्ध में विन्द ने कौरवों का साथ दिया था।

उज्‍जान‌िक

उज्‍जान‌िक

महाभारत में ज‌िस उज्‍जान‌िक नामक स्‍थान का ज‌िक्र क‌िया गया है वह वर्तमान काशीपुर है जो उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्‍थ‌ित है। यहां पर गुरु द्रोणाचार्य ने कौरवों और पांडवों को श‌िक्षा दी थी। यहां स्‍थ‌ित द्रोणसागर झील के बारे में कहा जाता है क‌ि पांडवों ने गुरु दक्ष‌िणा के तौर पर इस झील का न‌िर्माण क‌िया था।

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