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गोवा में नरक चतुर्दशी के दिन होता है पुतला दहन, श्रीराम नहीं श्रीकृष्ण होते हैं यहां दीवाली के Hero

त्योहारों का मौसम चल रहा है और गोवा जाने का भी प्लान बन रहा है। तो क्यों न दीवाली के मौके पर ही गोवा में घूम आया जाए। हम सभी को पता है कि पूरे देश में दीवाली मनायी तो धूमधाम से जाती है, लेकिन हर राज्य का अपना अलग अंदाज और उसके पीछे की अलग कहानी होती है, जिसके आधार पर दीवाली मनायी जाती है। गोवा में कैसे मनायी जाती होगी दीवाली? क्या गोवा की दीवाली पर भी पुर्तगाली सभ्यता की छाप मिलती है या फिर ब्रिटिश सभ्यता से प्रभावित है गोवा की दीवाली?

अगर आप भी ऐसा ही सोच रहे हैं तो आपकी जानकारी के लिए बता दें, आप बिल्कुल गलत सोच रहे हैं।

गोवा में भी दीवाली हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के आधार पर ही मनायी जाती है। दीवाली को गोवा में भी बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर रोशनी की जीत के प्रतीक के तौर पर ही मनाया जाता है। इसके बावजूद गोवा की दीवाली देशभर में मनायी जाने वाली दीवाली से अलग होती है। चलिए पता लगाते हैं कैसे!

दीवाली नहीं नरक चतुर्दशी होती है खास

हम सभी जानते हैं दीवाली 5 दिनों का त्योहार होता है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और भाईदूज या भातृ द्वितीया पर खत्म होता है। इन 5 दिनों के दौरान दीवाली सबसे ज्यादा लोकप्रिय और धूमधाम के साथ मनाया जाने वाला पर्व है, जो त्योहारों की इस श्रृंखला का तीसरा दिन होता है।

लेकिन गोवा में सबसे ज्यादा धूमधाम के साथ नरक चतुर्दशी को मनाया जाता है, जो त्योहारों की इस श्रृंखला का दूसरा दिन होता है। इस दिन लोग दीयों से अपने घरों को सजाते हैं और पुतला दहन भी करते हैं जो अच्छाई की जीत का प्रतीक होता है। लेकिन गोवा में जिस पुतले को दहन किया जाता है कि वह लंकापति रावण का नहीं होता है।

किया जाता है पुतला दहन

मान्यताओं के अनुसार दीवाली के दिन श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण, माता सीता और परम भक्त हनुमान समेत 14 वर्षों का वनवास काट कर अयोध्या लौटे थे। उससे पहले नवरात्रि में दशहरा के दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था, जिसके प्रतीक स्वरूप आज भी लोग दशहरा के दिन रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण का पुतला जलाते हैं। लेकिन गोवा में दशहरा नहीं बल्कि नरक चतुर्दशी के दिन पुतला दहन किया जाता है और जो पुतला दहन होता है, वह लंकेश रावण का नहीं बल्कि नरकासुर होता है।

श्रीराम नहीं श्रीकृष्ण हैं गोवा में दीवाली के हीरो

पूरी देश में जहां श्रीराम के 14 वर्षों का वनवास खत्म कर अयोध्या वापस लौटने की खुशी में दीवाली मनायी जाती है, वहीं गोवा में श्रीकृष्ण की जीत की खुशियां मनायी जाती है। दरअसल, पौराणिक मान्यताओं में कहा जाता है कि नरकासुर से स्थानीय निवासी आतंकित रहा करते थे। उससे छुटकारा पाने के लिए लोगों ने भगवान श्रीकृष्ण से मदद मांगी थी।

श्रीकृष्ण ने गोवावासियों की रक्षा के लिए नरकासुर से युद्ध लड़कर उसका वध किया था। उसका वध कर श्रीकृष्ण ने न सिर्फ गोवावासियों को बल्कि 16 हजार कन्याओं को भी नरकासुर से मुक्ति दिलायी थी, जिनसे बाद में श्रीकृष्ण ने विवाह किया था। इसलिए गोवा में दीवाली के हीरो भगवान श्रीराम नहीं, बल्कि श्रीकृष्ण होते हैं। गोवा के गांवों में जन्माष्टमी की तरह ही नरक चतुर्दशी के दिन भी युवक और छोटे-छोटे बच्चे श्रीकृष्ण के वेश में नरकासुर का पुतला दहन करते हैं।

सुगंधित उबटन से महिलाएं करती हैं श्रृंगार

गोवा में नरक चतुर्दशी के दिन पुरुष नरकासुर का पुतला दहन करने से पहले अपने शरीर पर पवित्र तेल का लेप लगाते हैं। वहीं महिलाएं दीवाली वाले दिन चंदन, हल्दी और सुगंधित तेल व अन्य सामग्रियों से बना उबटन लगाती हैं। इस के बाद घर सभी सदस्यों के साथ मिलकर मां लक्ष्मी की पूजा करके स्थानीय मंदिरों में भगवान के दर्शन करने जाते हैं।

एक-दूसरे को मिठाईयां दी जाती हैं और इस शुभ दिन को गांव के सभी लोगों के साथ मिलकर जमकर खुशियां मनाते हुए मनाया जाता है। दूसरे राज्यों की तरह ही दीवाली पर गोवा में भी खास तौर पर घरों को रोशनी से सजाया जाता है और हां, पटाखे भी जमकर फोड़े जाते हैं।

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