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चलों इन छुट्टियों में घूमे झुमरी तल्लैया

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बचपन से जब मम्मी पापा से घूमने की जिद करते थे, तो उनका कहना होता था, चलो तुम्हे इस बार झुमरी तल्लैया दिखा लायें, फिर कभी भुलकर घूमने का नाम नहीं लोगे। यकीन मानिये उस समय झुमरी तल्लैया का नाम लोगों को डराने के लिए खासा प्रयोग किया जाता था। यकीन मानिए मुझे तो पता भी नहीं था कि, झुमरी तल्लैया नाम की कोई जगह भी है।

खैर! झुमरी तल्लैया नाम का स्थान हकीकत में है, जोकि झारखंड प्रांत के कोडरमा जिले का एक छोटा लेकिन मशहूर कस्‍बा है। कहा जाता है कि, इस गांव में दामोदर नदी के विनाशकारी वेग से बचने के लिए बाँध का निर्माण किया गया, जिसे तल्लैया बांध नाम दिया गया। झुमरी गांव में बना यह बांध 100 फीट ऊँचा और 1200 फीट लम्बा एक ऐतिहासिक बांध है। बताया जाता है कि, आजादी के बाद सबसे पहले बनने वाला बांध तल्लैया बांध ही था। 36 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ ये क्षेत्र बेहद प्राकृतिक है, जोकि स्थानीय लोगों के बीच में पिकनिक स्थल के रूप में जाना जाता है। झुमरी तल्लैया घूमने आने वाले पर्यटक यहां आसपास कई अन्य दार्शनिक स्थल भी देख सकते हैं, जैसे राजगिर, नालंदा और हजारीबाग राष्ट्रीय पार्क आदि।

कहां है झुमरी तल्लैया?

कहां है झुमरी तल्लैया?

झुमरी झारखंड में एक गाँव है, जबकि तलैया शब्द हिन्दी शब्द ताल से आया है जिसका मतलब है तालाब। कहा जाता है कि, झुमरी एक स्थानीय लोकनृत्य भी है। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि इसकी उत्पत्ति झुरी से हुई है जो ब्रश के लिए स्थानीय शब्द है, जिसका प्रयोग गाँव में खाना पकाने के ईंधन के रूप में किया जाता है। तो दूसरी ओर एक और सिद्धान्त यह है कि झुमरी तलैया का नाम इसके दो अलग-अलग गाँवों झुमरी और तल्लैया बाँध के बीच अवस्थित होने से पड़ा है।

तल्लैया डैम और जलाशय

तल्लैया डैम और जलाशय

Pc: unknown
तल्लैया बाँध दामोदर घाटी निगम द्वारा बनाया गया पहला बाँध और जलविद्युत स्टेशन है। इस बाँध का ऐतिहासिक महत्त्व भी है कि यह आजादी के बाद भारत में बनाया गया पहला बाँध है और इसका उद्घाटन तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने किया था।

अबरख खदान के लिए था मशहूर

अबरख खदान के लिए था मशहूर

बताया जाता है कि, झुमरी तल्लैया एक समय में अपने अबरख की खदानों के लिये मशहूर था। 1890 में कोडरमा के आसपास रेल की पटरी बिछाने के दौरान यहां अबरख की खानों का पता चला,जिसके बाद यहां के लोग सम्पति वाले हो गया।

जिसके बाद यहां कई बड़े उद्योगपतियों ने अपनी कम्पनियां खोली। हालांकि एक दौर के बाद यह काफी कम हो गया।

60 के दशक का भारत का सबसे रईस शहर था झुमरी तल्लैय्या?

60 के दशक का भारत का सबसे रईस शहर था झुमरी तल्लैय्या?

जी हां, पढ़कर आपको अटपटा लग सकता है, लेकिन जैसे ही गांव में अबरख की खदानों का लोगो को पता लगा तो, यहां के लोग रातों-रात रईस हो गये। 1960 के दशक में यहां कई औद्योगिक घरानों ने कई विला और आलीशान घर बनाये, उस दौर में यहां मर्सीडीज, पोर्श और कई लग्जरी गाड़ियों के ब्रांड बेहद आम थे।

रेडियों के लिए थे प्रसिद्ध

रेडियों के लिए थे प्रसिद्ध

बताया जाता है कि, वर्ष 1957 में जब भारत में टीवी चैनल और एफ एम रेडियो स्टेशन शुरू भी नहीं हुए थे, तब झुमरी तिलैया अपने विविध भारती से संबंध के चलते लोकप्रिय हो गया था। इतना ही नहीं विविध भारती के कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में अनुरोध झुमरी तलैया से आया करते थे। यहां के लोग आपस में प्रतियोगिता आयोजित करते थे, कि एक दिन में या एक महीने में किसके कितने गानों की फरमाइश होती है।

खास मिठाई के लिए है मशहूर?

खास मिठाई के लिए है मशहूर?

Pc: Thamizhpparithi Maari
झुमरी तल्लैय्या एक खास मिठाई के लिए जाना जाता है, जिसका नाम है कलाकंद। तो अगर आप इस जगह की यात्रा करने का विचार कर रहे हैं, तो कलाकंद खाना कतई ना भूलें।

कैसे पहुंच- झुमरी तल्लैया?

कैसे पहुंच- झुमरी तल्लैया?

हवाईजहाज द्वारा
झुमरी तल्लैया का नजदीकी हवाई अड्डा राँची, झारखंड की राजधानी है (162 km)। पटना (बिहार की राजधानी) इससे 175 किलोमीटर दूर स्थित है। पर्यटक यहां से बस या कैब के जरिये झुमरी तल्लैया पहुंच सकते हैं।

ट्रेन द्वारा
इस कस्बे का अपना रेलवे स्टेशन है-जिसका नाम है कोडरमा रेलवे स्टेशन, जोकि बड़े-बड़े शहरों जैसे दिल्ली, कलकत्ता, मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, भुवनेश्वर से कई ट्रेनों के जरिए जुड़ा हुआ है, जिनमें राजधानी एक्सप्रेस भी है।

सड़क द्वारा
झुमरी तल्लैया सड़क से अच्छे से जुड़ा हुआ है, अगर आप सड़क द्वारा जा रहे हैं तो नेशनल हाइवे 31 ले सकते हैं जोकि राँची-पटना रोड कहलाता है। यह ग्रांड ट्रंक रोड से 23 किलोमीटर दूर स्थित है। कोडरमा घाटी अपने यू-आकार के मोड़ों के लिए प्रसिद्ध है और जिलेबी घाटी (जलेबी घाटी) के नाम से जानी जाती है।

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