वीकेंड आते ही लोग आसपास घुमने की जगह ढूंढने लग जाते हैं। कुछ लोग इसके लिए इंटरनेट ब्राउजर का सहारा लेते हैं तो कुछ सोशल मीडिया की मदद से किसी यूनिक जगह की तलाश करने की कोशिश करते हैं। अगर आप बैंगलोर में रहते हैं या बैंगलोर के आसपास घुमने की जगहों के बारे में कभी सर्च किया होगा, तो आपको एक काफी जाना-पहचाना नाम जरूर दिखा होगा और वह है 'छोटा लद्दाख'।

जी हां, बैंगलोर से लगभग 62 किमी की दूरी पर मौजूद है छोटा लद्दाख व्यू प्वाएंट। यह जगह उन लोगों को भी आकर्षित करता है जो लद्दाख जाने का सपना तो देखते हैं लेकिन समय की कमी की वजह से अभी तक नहीं जा सके हैं। सोशल मीडिया पर भी अगर सर्च किया जाए तो 'छोटा लद्दाख' के बारे में आपको ढेर सारे पोस्ट मिल जाएंगे। लेकिन क्या सच में बैंगलोर से सिर्फ ढाई घंटे की दूरी पर मौजूद यह जगह 'छोटा लद्दाख' जैसा ही है या फिर यह वर्चुअल दुनिया और सोशल मीडिया पर फैला कोई भ्रम का जाल है?
क्या है इस जगह का असली नाम

कर्नाटक में राजधानी बैंगलोर से सिर्फ 62 किमी की दूरी पर मौजूद वह जगह जिसे लोग 'छोटा लद्दाख' के नाम से जानते हैं, का असली नाम डोड्डा अयूर है। यह दक्षिण भारतीय एक छोटा सा गांव है। बैंगलोर से इस गांव की दूरी कम होने की वजह से घुमने जाने के लिए यह एक आसान जगह है। अगर शहरों के हलचल से दूर प्रकृति के बीच सुकून के साथ एक दिन बिताना हो तो लोगों के लिए बिल्कुल आदर्श जगह हो सकती है। सुबह और शाम के वक्त यहां से सुरज उगने और डूबने का नजारा काफी सुन्दर दिखता है। हां, दिन के वक्त तेज धूप की वजह से यहां टिकना मुश्किल जरूर हो जाता है।
क्यों कहा जाता है इसे 'छोटा लद्दाख'
आपके मन में यह उत्सुकता जरूर आ रही होगी कि आखिर इस जगह को 'छोटा लद्दाख' क्यों कहा जाता है। दरअसल, इस जगह, यहां की मिट्टी और आसपास के क्षेत्र को देखकर लद्दाख जैसा आभास होता है। उबड़-खाबड़ जमीन, छोटा सा झील जैसा तालाब इसकी लद्दाख के साथ समानता है। पर यकिन मानिए, बतौर 'छोटा लद्दाख' यह जितना सोशल मीडिया पर वायरल है, आपको यहां पहुंचकर उतनी ही निराशा होने वाली है।

दरअसल, यह जगह एक परित्यक्त खदान का परिसर है, जहां की मिट्टी उबड़-खाबड़ और गड्ढों में बारिश का पानी जमा होने की वजह से झील जैसा दिखाई देता है। यह जगह कैंपिंग करने के शौकिन, बाईकर्स को अधिक भाती है, क्योंकि यह शहर के हलचल से उन्हें कुछ समय के लिए शांति प्रदान करती है।
क्या है 'छोटा लद्दाख' की सच्चाई
'छोटा लद्दाख' की असली सच्चाई जानने के लिए हमने थोड़ी पड़ताल की, ताकि असली दुनिया और वर्चुअल दुनिया के बीच की खाई को पाटा जा सकें। अपनी पड़ताल में हमें पता चला कि यह चट्टानी पहाड़ों के बीच में एक बड़ा सा गड्ढ़ा जैसा है, जो एक झील की तरह दिखाई देता है। कुछ ट्रैवलर्स से बात करने पर हमें इस जगह के बारे में कुछ चौंकाने वाली जानकारी भी हाथ लगी। ट्रैवलर्स का कहना है कि 'छोटा लद्दाख' में किसी भी तरह की फीस वसूलने की अनुमति सरकार की तरफ से नहीं दी गयी है लेकिन कुछ असमाजिक तत्व यहां आने वाली हर गाड़ी से टोल वसूलते हैं।

यहां सरकारी रूप से किसी भी गाड़ी से कोई टोल लेने का प्रावधान नहीं है लेकिन इस जगह को अपना अड्डा बना चुके असमाजिक तत्व गाड़ियों से ₹400 तक का टोल वसूलते हैं। यह जगह कोई पर्यटन स्थल तो नहीं है, बल्कि यह सिर्फ एक परित्यक्त खदान है, जहां लोग कुछ समय के लिए घूमने जरूर आते हैं। इसके बावजूद यहां आने-जाने वाली हर गाड़ी से स्थानीय लोग रूपयों की मांग करते हैं और उन्हें रूपये ना दिये जाए तो वे अपशब्दों का इस्तेमाल करने लगते हैं। ट्रैवलर्स के मुताबिक छोटा लद्दाख परिवार और बच्चों को लेकर जाने के लिए सुरक्षित जगह नहीं है।
आज के समय में सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने वाले असंख्य लोग मौजूद हैं, जो किसी भी जगह के बारे में सच्ची और झुठी कहानियां और जानकारियां देते रहते हैं। ऐसे में कौन कितना सच कह रहा है और कौन झुठ इस बात पर यकिन करना बहुत मुश्किल हो गया है। इसलिए किसी भी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर या वीडियो पर भरोसा करने से पहले 10 या 100 नहीं बल्कि 1000 बार सोचने की जरूरत है। हमारी सलाह है कि अगर किसी भी ऐसी जगह पर जाने का आप प्लान बना रहे हैं जो सोशल मीडिया पर हाल के दिनों में काफी वायरल हुआ है तो सिर्फ वीडियो के भरोसे ही ना बैठकर संभव सभी माध्यमों से उस जगह के बारे में जानकारी एकत्र करने की कोशिश करें और सावधान रहें।



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