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वाया रोड, क्या क्या देख सकते हैं आप बैंगलोर से मद्दुर के बीच

Posted By: Goldi

बैंगलोर, भारत के सबसे विकसित और उद्यमी शहरों में से एक है। पेड़-पौधों और पार्को से घिरे होने के कारण इसे गार्डन सिटी ऑफ इंडिया भी कहा जाता है। हालांकि, पिछले 20 सालों में इस शहर का काफी विकास हुआ है। अब बैंगलोर को भारत की सिलिकॉन घाटी के नाम से पुकारा जाता है।

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बैंगलोर शहर पुराने और नए को बेजोड़ मेल है। हालांकि इस शहर में अब भीड़ और प्रदूषण भी बहुत ज्‍यादा है। सालभर बैंगलोर का मौसम काफी सुहावना रहता है। ये शहर भारत के सभी हिस्‍सों और अंतर्राष्‍ट्रीय जगहों से जुड़ा हुआ है। इस शहर में कन्‍नड़ भाषा बोली जाती है और यहां पर हर इंसान को कम से कम दो भाषाएं तो आती ही हैं।

बैंगलोर की कुछ खास तस्वीरें

कर्नाटक के मंड्या जिले का छोटा सा शहर है मद्दुर जोकि बैंगलोर शहर से 82 किमी की दूरी पर स्थित है। लगभग 662 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है मद्दुर। ये शिमशा नदी के तट पर है। मद्दुर को भारत की कोकोनट कैपिटल के नाम से भी जाना जाता है। यहां से 300 ट्रकों से नारियल भरकर गोवा, हैदराबाद, अहमदाबाद, पंजाब और महाराष्‍ट्र तक पहुंचाया जाता है।

मद्दुर घूमने का सही समय

मद्दुर घूमने का सही समय

मद्दुर में गर्मी के मौसम में तापमान 34 डिग्री सेल्‍सियस तक पहुंच जाता है। वहीं सर्दियों के मौसम में तापमान काफी ठंडा रहता है। यहां का सबसे ठंडा महीना जनवरी का होता है। इस दौरान यहां रात के समय तापमान 16 डिग्री सेल्‍सियस से भी नीचे पहुंच जाता है।
PC: Shailesh.patil

मद्दुर कैसे पहुंचे

मद्दुर कैसे पहुंचे

वायु मार्ग : बैंगलोर से मद्दुर के लिए केंपे गोवड़ा अंतर्राष्‍ट्रीय हवाईअड्डा सबसे निकटतम एयरपोर्ट है। यहां से आपको मद्दुर पहुंचने के लिए केंपे गोवड़ा बस टर्मिनल से टैक्‍सी या बस मिल जाएगी।

रेल मार्ग : यहां पर लगभग बैंगलोर से मद्दुर के लिए 10 ट्रेनें चलती हैं। मद्दुर पहुंचने में आपको कितना समय लगेगा ये इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कौन सी ट्रेन चुनी है। बैंगलोर से मद्दुर पहुंचने में आपको कम से कम ढाई घंटे का समय तो लगेगा।

सड़क मार्ग : सड़क द्वारा बैंगलोर से मद्दुर जाने के लिए दो रूट हैं।

पहला रूट : रामनगर - चन्‍नापटना - मद्दुर तक मैसूर रोड़ और एनएच 275। यहां से आपको 82 किमी का रास्‍ता तय करने में 2 घंटे का समय लगेगा।

दूसरा रूट : कुनिगल - हुलीयुरदुर्गा - तुबिनकेरे - मद्दुर तक एनएच 75 और कुनिगल - मद्दुर रोड़। 123 किमी लंबे इस सफर को तय करने में आपको 2 घंटे 39 मिनट का समय लग सकता है।PC:Lawrence

 कब्बन पार्क

कब्बन पार्क

शहर के मध्‍य में स्थित कूब्‍बोन पार्क भी लोगों को शहर की भागदौड़ से दूर रखने के लिए बेहतर स्‍थल है। 300 एकड़ में फैला ये गार्डन बांस की झाडियों, पक्‍का रास्‍ता और पत्‍थरों से भरा हुआ है। इस सुंदर पार्क में आपको 6000 से भी ज्‍यादा पेड़ दिख सकते हैं।

आगंतुकों के लिए ये पार्क सुबह 5 बजे से शाम के 8 बजे तक खुला रहता है। यहां पर लोग जॉगिंग, व्‍यायाम और ताजी एवं खुली हवा के बीच सैर करने के लिए आते हैं।PC:Yair Aronshtam

विधान सउदा

विधान सउदा

द्रविड शैली की शिल्‍पकला में तैयार विधान सोढ़ा बेहद खूबसूरत इमारत है। इस इमारत में कर्नाटक के राज्‍य विधायक बैठते हैं और यह केंगल हनुमंतिया की अवधारणा पर आधारित है। इस मंदिर की एक प्रतिकृति भी बनाई गई थी जिसका नाम विकास सोढ़ा है और इसे विधान सोढ़ा में जगह की कमी के कारण 2005 में बनवाया गया था।

विधान सउदा के ठीक सामने कर्नाटक का उच्‍च न्‍यायालय स्थित है। लाल रंग की इस इमारत को अट्टारा कचहरी कहा जाता है। इसे ब्रिटिशों द्वारा ग्रीक रोमन शैली की स्‍थापत्‍यकला में बनवाया गया है।

PC:Priyambada Nath

लालबाग

लालबाग

इसे रैड गार्डन भी कहा जाता है। ये बेहद ही खूबसूरत बगीचा है जिसे मैसूर के शासक हैदर अली ने बनवाना शुरु किया था और इसका निर्माण कार्य उनके पुत्र टीपू सुल्‍तान ने पूरा करवाया था। शहर का ये शानदार गार्डन सभी उम्र के लोगों का पसंदीदा स्‍थल है। इस गार्डन में एक ग्‍लासहाउस भी है जहां हर साल गणतंत्र दिवस और स्‍वतंत्रता दिवस के अवसर पर फ्लॉवर शो का आयोजन किया जाता है।

शानदार और खूबसूरत फूलों के अलावा इस गार्डन में एक झील, प्राचीन पेड़ और एक जापानी डेकोरेटिव इमारत भी है। ये गार्डन रोज़ सुबह 6 बजे से शाम के 7 बजे तक खुला रहता है।PC:Prasanth M J

फ्रीडम पार्क

फ्रीडम पार्क

अन्‍य पार्कों की तरह इस पार्क में चलने के लिए मार्ग, पेड़ और रंग-बिरंगे फूल नहीं हैं। इस पार्क की जगह पी पहले सेंट्रल जेल हुआ करती थी। इस पार्क में जेल म्‍यूजियम, वॉटर फाउंटेन, प्राचीन बैरक और वॉचटावर आकर्षण का मुख्‍य केंद्र है।

इस पार्क में रेग्‍युलर मीटिंग और रैलियों का आयोजन किया जाता है। इस पार्क को लंदन के हाइड पार्क का अनुसरण कर बनाया गया है। ये पार्क रोज़ शाम को 5 बजे से रात 8 बजे तक खुलता है।

PC:nanuseena

बैंगलोर पैलेस

बैंगलोर पैलेस

टुडोर शैली में बना बैंगलोर पैलेस स्‍थापत्‍यकला का खूबसूरत नमूना है। इसे 1878 में मैसूर के महाराजा ने बनवाया था। अब इस पैलेस में शो, शादियां और प्रदर्शनी आदि का आयोजन किया जाता है।
PC:Masaru Kamikura

बनरघट्टा नेशनल पार्क

बनरघट्टा नेशनल पार्क

बनरघट्टा नेशनल पार्क को 1970 में बनाया गया था। इसमें एक चिडियाघर, बटरफ्लाई डिस्‍पले, एक्‍वेरियम, स्‍नेक हाउस और पैट कॉर्नर है। यहां पर जंगल सफारी की सुविधा भी उपलब्‍ध है।PC:Karunakar Rayker

 इस्कॉन मंदिर

इस्कॉन मंदिर

बैंगलोर में में इस्कॉन मंदिर विश्व के सबसे बड़े इस्कॉन मंदिरों में से एक है! यह मंदिर, भगवान कृष्ण को समर्पित है, जोकि हरे कृष्ण हिल पर स्थित है। इसका निर्माण 1997 में मधु पंडित दास ने कराया था।
PC:Shiva Shenoy

रामनगर

रामनगर

ट्रैफिक से बचने के लिए सुबह जल्‍दी बैंगलोर से निकलें। रास्‍ते में सबसे पहले रामनगर पड़ेगा जोकि बैंगलोर से 55 किमी की दूरी पर स्थित है।

इस सफर में आपको 1 घंटे 25 मिनट का समय लगेगा। रामनगर में लोकप्रिय बॉलीवुड फिल्‍म शोले की शूटिंग हुई थी। रामदेवरा बेट्टा के ऊपर ही गब्‍बर सिंह का ठिकाना हुआ करता था। आप बेट्टा पर्वत पर चढाई कर पर्वत की चोटी पर स्थित मंदिर के दर्शन कर सकते हैं।

PC:Navaneeth KN

चन्‍नापटना

चन्‍नापटना

रामनगर से 30 किमी की दूरी है चन्‍नापटना। यहां से चन्‍नापटना 15 किमी दूर है। लकड़ी से बने खिलौनों के लिए चन्‍नापटना बहुत लोकप्रिय है। इसे गोंबेगला नगर के नाम से भी जाना जाता है। इस शहर में लकड़ी के खिलौनों को बनाने की कला को टीपू सुल्‍तान द्वारा प्रोतसाहित किया गया था और उन्‍होंने ही पर्शिया से कलाकारों को भारत के स्‍थानीय कलाकारों को इसे सिखाने के लिए बुलाया था।

यहां पर खिलौनों को लकड़ी और वेजीटेबल डाई से ब नाया जाता है जोकि बच्‍चों के लिए पूरी तरह से सुर‍क्षित है। चन्‍नापटना का खूबसूरत मंदिर है वरादराज मंदिर जोकि विजयनगर राजवंश की स्‍थापत्‍यकला को दर्शाता है।PC:Hari Prasad Nadig

मद्दुर

मद्दुर

चन्‍नापटना से मद्दुर 21 किमी दूर है। चन्‍नापटना से मद्दुर पहुंचने में 30 मिनट का समय लगता है। मद्दुर, मद्दुर वाड़े के लिए लोकप्रिय है। मद्दुर की ट्रेनों में ये स्‍वादिष्‍ट व्‍यंजन खूब मिलता है।

हालांकि, अधिक मांग होने के कारण अब ये स्‍नैक पूरे मद्दुर में मिलता है। ये चावल के आटे, सेमोलिना और प्‍याज, करी पत्ता, नारियल और हींग से बना है।

लॉन्‍ग ड्राइव और बाइकिंग के लिए भी मद्दुर बहुत लोकप्रिय है। यहां पर आप जब चाहें अपने दोस्‍तों और परिवार के साथ आ सकते हैं। इस छोटे से शहर में ज्‍यादा कुछ तो नहीं है लेकिन घूमने के लिए आप इन जगहों पर जा सकते हैं।PC:Charles Haynes

छेलुवानारायण स्‍वामी मंदिर

छेलुवानारायण स्‍वामी मंदिर

छेलुवानारायण को समर्पित इस मंदिर को तिरुनारायण के नाम से भी जाना जाता है। ये मंदिर भगवान विष्‍णु को समर्पित है। मेल्‍कोटे में स्थित यह मंदिर मद्दुर से 50 किमी की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर को मैसूर महाराजा से विशेष अधिकार प्राप्‍त हैं। मैसूर के राजा ने मंदिर में तीन मुकुट - राजामुड़ी, कृष्‍णराजमुड़ी और वाईरामुडी भेंट किए थे। वाईरामुड़ी एक वार्षिक त्‍योहार है जिसमें 4 लाख लोग हिस्‍सा लेते हैं।

PC:Prathyush Thomas

सौम्‍य केशव मंदिर

सौम्‍य केशव मंदिर

मद्दुर से 56 किमी की दूरी पर स्थित है ये मंदिर जहां पहुंचने में मद्दुर से एक से डेढ़ घंटे का समय लगेगा। इस क्षेत्र में भगवान विष्‍णु को समर्पित एक और मंदिर है। कला से जुड़े इतिहासकारों के अनुसार मूलाप्रसाद एक सितारे के आकार का है।

गगनचक्‍की और भाराचक्‍की झरना

गगनचक्‍की और भाराचक्‍की झरना

कावेरी नदी से बने ये दो झरने 75 मीटर की ऊंचाई से आकर गिरते हैं। इन्‍हें शिवानसमुद्रा झरनों के नाम से भी जाना जाता है। ये मद्दुर से 52 किमी दूर है। ये खूबसूरत झरने दुनिया के 100 सर्वश्रेष्‍ठ झरनों में शामिल हैं।PC:Bgajanan

दरिया दौलत बाग

दरिया दौलत बाग

यह टीपू सुल्‍तान का तत्‍कालीन ग्रीष्‍मकालीन महल हुआ करता था। उस सदी की खूबसूरत स्‍थापत्‍य कला की झलक आप इस महल में देख सकते हैं। इस महल में पि‍कनिक मनाने के लिए एक बड़ा सा लॉन है। महल के परिसर के भीतर आप तस्‍वीरें भी खिंचवा सकते हैं।

PC: Ahmad Faiz Mustafa

भीमेश्‍वरी कैंप

भीमेश्‍वरी कैंप

मंड्या जिले में स्थित है भीमेश्‍वरी कैंप। प्रकृति की गोद में बसी इस जगह पर आप खूब सारे एडवेंचर कर सकते हैं। यहां पर आप कायकिंग, राफ्टिंग, जिपलिंग और रोप वॉकिंग का मज़ा ले सकते हैं। इन जंगलों का वन्‍यजीवन, पशु और पक्षियों की 200 प्रजातियों को देख सकते हैं।

PC:Jagadish Katkar

कोक्‍करेबेलुर पक्षी अभ्‍यारण्‍य

कोक्‍करेबेलुर पक्षी अभ्‍यारण्‍य

पक्षियों को निहारने का शौक है तो आपको कोक्‍करेबेलुर पक्षी अभ्‍यारण्‍य जरूर आना चाहिए। दिसंबर और मार्च के बीच यहां घूमने आ सकते हैं। इस समय पक्षी यहां पर घोंसला बनाकर रहते हैं। यहां पर प्रवासी और स्‍वदेशी पक्षियों की 500 से ज्‍यादा प्रजातियां देखने को मिलेंगीं।

PC:Koshy Koshy

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