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Durga Puja 2024 : कोलकाता के वो दुर्गा पूजा पंडाल जिनकी सोच आपको कर देगी अचंभित!

देशभर में एक बार फिर से त्योहारों का खुमार छाया हुआ है। अलग-अलग शहरों में नवरात्रि से लेकर डांडिया नाइट्स, गरबा और न जाने कितने प्रकारों से दुर्गा पूजा मनायी जा रही है। लेकिन हर साल दुर्गा पूजा के दौरान पूरी दुनिया के आकर्षण का केंद्र बना रहता है वह है पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता। यहां हजारों की संख्या में छोटे-बड़े पंडाल बनाकर मां दुर्गा और उनके चारों बच्चों (लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती और कार्तिकेय) की पूजा की जाती है।

कोलकाता के अधिकांश दुर्गा पूजा पंडाल किसी न किसी थीम के आधार पर बनाए जाते हैं। इन सभी थीम को काफी सोच-विचार के बाद निर्धारित और पंडालों व मूर्तियों में उन्हें ढाला जाता है। लेकिन इस साल की दुर्गा पूजा में कोलकाता के कुछ पंडालों को इतनी रचनात्मकता के साथ बनाया गया है कि इनके पीछे की सोच आपको अचंभित कर देगी।

durga puja kolkata

हम यहां कोलकाता के कुछ बेस्ट दुर्गा पूजा पंडालों और उनकी रचनात्मक थीम के बारे में बता रहे हैं। अगर आप इस साल दुर्गा पूजा के समय कोलकाता में हैं तो एक बार इन पंडालों को जरूर देखें। और अगर आप देश या दुनिया के किसी और कोने से बैठकर इस आर्टिकल को पढ़ रहे हैं तो आप भी महसूस करें इन शानदार थीम के आधार पर बनाए गये दुर्गा पूजा पंडालों की रचनात्मकता को।

lalabagan durga puja 2024

1. लालाबागान दुर्गा पूजा

इस दिनों कोलकाता का जो दुर्गा पूजा पंडाल सबसे ज्यादा सुर्खियों में छाया हुआ है वह है लालाबागान दुर्गा पूजा कमेटी का पंडाल। इस पंडाल को ग्रीन दुर्गा पूजा के नाम से भी जाना जा रहा है। पूरे पंडाल की साज-सज्जा से लेकर देवी दुर्गा और दूसरे सभी देवी-देवताओं के वस्त्र आदि के लिए 8000 जीवित पौधों का इस्तेमाल किया गया है। इस दुर्गा पूजा पंडाल को कोलकाता का एकमात्र इको-फ्रेंडली दुर्गा पूजा पंडाल का खिताब दिया गया है।

2. संतोष मित्रा स्क्वायर

लास वेगास का स्फेरे, जिसे देखने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंचते हैं। इस साल आपको कोलकाता में ही लास वेगास की झलक देखने को मिलेगी। नियॉन लाइट्स से सजे स्फेरे को देखने के लिए श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ रही है। पिछले साल इस दुर्गा पूजा पंडाल का थीम अयोध्या के राम मंदिर रखा गया था।

sribhumi

3. श्रीभूमि

हर साल किसी न किसी खास थीम के आधार पर भी श्रीभूमि दुर्गा पूजा कमेटी अपने पंडाल का निर्माण करती है। इस साल दक्षिण भारतीय प्रसिद्ध मंदिर तिरुमाला तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर के तर्ज पर श्रीभूमि का पूजा पंडाल बनाया गया है। सिर्फ पूजा पंडाल ही नहीं बल्कि मां दुर्गा समेत दूसरे सभी देवी-देवताओं की मूर्तियों और उनकी साज-सज्जा में भी दक्षिण भारतीय सजावट की झलक भी दिखाई दे रही है।

4. सॉल्टलेक AK ब्लॉक

कोलकाता के सॉल्टलेक इलाके के AK ब्लॉक के दुर्गा पूजा पंडाल में इस साल का थीम वर्षाजल संरक्षण है। इस पूजा पंडाल की सबसे बड़ी खासियत यहां बारिश के पानी से बनने वाला संगीत है। दरअसल, इस पूजा पंडाल के इस क्षेत्र में विभिन्न प्रकारों और आकारों वाले बर्तनों को रखा गया है।

कुछ सीधे तो कुछ उल्टे रखे गये हैं। इन सभी बर्तनों और बाल्टियों पर लगातार पानी की बूंदें टपकायी जा रही हैं, जिससे निकलने वाला संगीत बेहद आकर्षक है। पंडाल में आने वाले श्रद्धालुओं को वर्षा जल का यह संगीत अच्छी तरह सुनाई दे सकें, इसे सुनिश्चित करते हुए यहां शांति भी बनाकर रखी जा रही है।

5. जगत मुखर्जी पार्क

उत्तर कोलकाता का जगत मुखर्जी पार्क दुर्गा पूजा पंडाल भी इन दिनों काफी चर्चाओं में छाया हुआ है। इस दुर्गा पूजा पंडाल में भारत के पहले अंडरवाटर मेट्रो कॉरिडोर के स्टेशन हावड़ा मैदान प्लेटफार्म को बनाया गया है। यह प्लेटफार्म गंगा नदी के नीचे बना हुआ है। हालांकि यहां असली की गंगा नदी नहीं बल्कि लाइट्स और साउंड इफेक्ट के माध्यम से ऐसा भी आभास करवाया जा रहा है। इस दुर्गा पूजा पंडाल को मेट्रो के एक कोच के तर्ज पर बनाया गया है जो एक मेट्रो स्टेशन पर रुकी हुई है।

6. चेतला अग्रणी

त्योहारों का और काशी का रिश्ता बड़ा ही गहरा है। दक्षिण कोलकाता के चेतला अग्रणी दुर्गा पूजा पंडाल में इसी बात को दर्शाया गया है। यहां काशी के घाटों की थीम पर दुर्गा पूजा पंडाल बनाया गया है, जहां गंगा आरती के दौरान कभी हर-हर महादेव तो कभी पार्वती पतये हर-हर महादेव की ध्वनि गूंजती हैं। यहां गंगा घाटों को लाइटिंग के माध्यम से बड़े से सुन्दर तरीके से दर्शाया गया है। इसके साथ ही गंगा नदी में बढ़ते प्रदूषण की मात्रा को लेकर भी लोगों में जागरुकता जगाने का प्रयास किया गया है ।

7. त्रिधारा सम्मेलनी

पुराने जमाने में हर घर में एक आंगन जरूर हुआ करता था, जहां पूरा परिवार दिनभर की अपनी रोजमर्रा के कामों को निपटाना, पूजा पाठ और भजन कीर्तन करना, साथ बैठकर गप्पे मारने से लेकर आराम तक किया करते थे। इसी बात को ध्यान में रखते हुए दक्षिण कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल त्रिधारा सम्मेलनी ने 'आंगन' की थीम पर पंडाल तैयार किया है। आज के समय में जगह के अभाव में घरों में आंगन बनाने की परंपरा भले ही गायब हो गयी है लेकिन गांवों में अभी भी घर आंगन के बिना अधूरे ही दिखते हैं। यह थीम हमारे देश की अटूट परंपरा को दर्शाता है।

8. दक्षिणपाड़ा दुर्गोत्सव

कोलकाता के चुनिंदा प्रसिद्ध दुर्गा पूजा पंडालों में से एक है दक्षिणपाड़ा दुर्गोत्सव कमेटी। पिछले कुछ सालों के दौरान इस दुर्गा पूजा कमेटी ने काफी लोकप्रियता हासिल की है। इस दुर्गा पूजा पंडाल को कबाड़ से बनाया गया है। यकीन नहीं हो रहा है न... लेकिन यह पूरी तरह से सच है। दक्षिणपाड़ा दुर्गोत्सव के पंडाल से लेकर मां दुर्गा व अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं समेत पंडाल की साज-सज्जा में यंत्राशों व अन्य कबाड़ों का इस्तेमाल किया गया है।

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