नौकरी के सिलसिले में दक्षिण भारतीय शहर बैंगलोर ही अब नया ठिकाना बन चुका है। ऑफिस से छुट्टी नहीं मिलने की वजह से त्योहारों के मौसम में भी घर आने का मौका नहीं मिल पाता है। इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि त्योहारों को सेलिब्रेट ही न किया जाए। और सेलिब्रेशन का यह जश्न और भी शानदार तब बन जाता है जब दक्षिण भारत में उत्तर भारत की झलक देखने को मिलती है।
दुर्गा पूजा का नाम लेते ही सबसे पहला जो शहर याद आता है वह है कोलकाता। तो क्यों न इस साल बैंगलोर में ही कोलकाता की झलक देखी जाए...। जी हां, इस साल दुर्गा पूजा में बैंगलोर में देखें कोलकाता की झलक क्योंकि बैंगलोर में बन रहा है विक्टोरिया मेमोरियल के तर्ज पर भव्य दुर्गा पूजा पंडाल। पर कहां?

काम के सिलसिले में बैंगलोर में रहने वाले ज्यादातर लोगों के मन में यह ख्वाहिश तो जरूर होती है कि दुर्गा पूजा या फिर दीवाली के मौके पर अपने शहर, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ अथवा पटना जाने का मौका मिल पाता जहां परिवार के बाकी सभी सदस्यों के साथ ठीक वैसे ही त्योहारों को एंजॉय करते जैसा बचपन में किया करते थे। अब ऐसा करना हर बार तो संभव नहीं हो पाता है।
लेकिन त्योहारों का जश्न मनाने के मामले में बैंगलोर भी भला पीछे कहां रहने वाला है। बैंगलोर के अलग-अलग इलाकों में कई दुर्गा पूजा पंडाल बनते हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग देवी दुर्गा के दर्शन करने भी पहुंचते हैं। इस साल दुर्गा पूजा पर घूमने के लिए जिन पंडालों की लिस्ट आपने तैयार की है, उनमें बरशा (Barsha) का नाम जरूर शामिल किजीएगा क्योंकि यहीं बन रहा है कोलकाता की धरोहर विक्टोरिया मेमोरियल की थीम पर भव्य दुर्गा पूजा पंडाल।

विक्टोरिया मेमोरियल ही क्यों?
महारानी विक्टोरिया के सम्मान में कोलकाता में सफेद संगमरमर से बना विक्टोरिया मेमोरियल न सिर्फ कोलकाता बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाता है। विक्टोरिया मेमोरियल की संरचनात्मक सुन्दरता को देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक कोलकाता आते रहते हैं। लेकिन बतौर थीम बैंगलोर के इस पूजा पंडाल ने विक्टोरिया मेमोरियल को ही क्यों चुना?
इस बारे में बात करते हुए बरशा पूजा कमेटी के एक सदस्य ने Asianet News को बताया कि विक्टोरिया मेमोरियल महज एक संरचना नहीं है। यह भारत की संस्कृति और रचनात्मकता का गौरव भी है। विक्टोरिया मेमोरियल की थीम पर दुर्गा पूजा पंडाल बनाने का हमारा उद्देश्य केवल इस ऐतिहासिक इमारत की प्रमुखता को दर्शाना ही नहीं है बल्कि एकता और कलात्मकता का शानदार उदाहरण भी प्रस्तुत करना है, जो दुर्गा पूजा का वास्तविक महत्व समझाता है।

पहली बार बनाया जा रहा है इतना शानदार पंडाल
बरशा में इस साल जितना शानदार दुर्गा पूजा पंडाल तैयार किया जा रहा है, ऐसा इससे पहले कभी नहीं किया गया था। केवल विक्टोरिया मेमोरियल की थीम पर पंडाल ही नहीं बल्कि इस पंडाल की लाइटिंग पर भी बहुत बारीकी से ध्यान दिया गया है। दावा किया जा रहा है कि इस दुर्गा पंडाल में पहुंचते ही श्रद्धालुओं को एक पल के लिए भी नहीं लगेगा कि वे बैंगलोर में मौजूद है।
श्रद्धालुओं को लगेगा कि बस कुछ ही मिनटों में वे कोलकाता में असली विक्टोरिया मेमोरियल के सामने पहुंच चुके हैं। इस पूजा पंडाल को बनाने के लिए कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, कोयंबटूर और हैदराबाद से कुशल कलाकारों को बुलाया गया है। पूजा कमेटी की ओर से दावा किया गया है कि बैंगलोर में पहली बार इतना शानदार दुर्गा पूजा पंडाल बनाया जा रहा है। लेकिन....
इस पूजा पंडाल का शो स्टॉपर पर मां दुर्गा की प्रतिमा ही होगी, जिसकी ऊंचाई 18 फीट होने वाली है। सुनहरे रंगों में सजी देवी दुर्गा के सिर पर 5 फीट ऊंचा मुकुट होगा, जो निश्चित रूप से बेहद शानदार दिखेगा।

नवमी पर धुनूची उत्सव
कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडालों में आपने अक्सर नवमी की शाम को धुनूची नृत्य करते हुए लोगों को देखा होगा, जिसमें महिला, पुरुष, वृद्ध से लेकर बच्चे तक सभी शामिल होते हैं। अब इसी धुनूची नृत्य का आनंद आप बैंगलोर में बरशा पूजा पंडाल में भी ले सकेंगे। जी हां, बरशा में पहली बार विशाल धुनूची (Biggest Dhunuchi Utsav) का आयोजन किया जा रहा है।
पूजा आयोजकों का दावा है कि हम न सिर्फ परंपरा के साथ दुर्गा पूजा का आयोजन करते हैं बल्कि सबको साथ लाकर खुशियां और जश्न मनाने में भी पीछे नहीं रहते हैं। इस धुनूची उत्सव में हर वह व्यक्ति शामिल हो सकेगा जो इसमें शामिल होना चाहता है। यानी नवमी पर बरशा का धुनूची उत्सव Open to all होगा।
अन्य कार्यक्रम
- सप्तमी (10 अक्तूबर) को अर्को मुखर्जी का कार्यक्रम।
- अष्टमी (11 अक्तूबर) को शिलाजीत मजूमदार का शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम।
कब : 9 से 13 अक्तूबर 2024
पता : बरशा बंगाली एसोसिएशन ग्राउंड, TCIS स्कूल के विपरित, HSR एक्सटेंशन, सिल्वर काउंटी रोड, हरालुर, सरजापुर रोड, बैंगलोर



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