» »स्लम पर्यटन: सिर्फ दो हजार में करीब से देखें झोपड़ पट्टी की जिंदगी को

स्लम पर्यटन: सिर्फ दो हजार में करीब से देखें झोपड़ पट्टी की जिंदगी को

Written By: Goldi

भारत में घूमने के लिए असंख्य जगहे हैं, जिन्हें घूमने के लिए सिर्फ देशी ही नहीं बल्कि विदेशी भी पहुंचते हैं। भारत में पर्यटन का विस्तार काफी बड़ा है, जेल पर्यटन, एडवेंचर स्पोर्ट्स पर्यटन, नेचर पर्यटन ,आदि, लेकिन अब इसी में एक और नाम जुड़ गया है, जो है स्लम पर्यटन। पढ़कर आपको थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह सच है, और स्लम पर्यटन की खास बात यह है कि, इसकी शुरुआत एक विदेशी की पहल से हुई है।

यकीनन स्लम का नाम सुनते ही, हमारे दिमाग में कूड़े के ढेर, मलिन बस्तियां, तंग गलियां आती हैं, लेकिन इस स्लम पर्यटन के मेजबान का उद्देश्य उनके यहां आने पर्यटक को एकदम घर जैसी फिलिंग देना है, साथ ही स्लम में गुजर बसर कर रहे लोगो की जिन्दगी को भी समझाता है।

भारत में स्लम पर्यटन का मजा आप मुंबई के स्लम इलाके में ले सकते हैं। जैसा की सभी जानते हैं, मुंबई में धारावी स्लम एशिया का दूसरा सबसे बड़ा स्लम एरिया है। इसके अलावा यहां के कुछ खास स्लम है, धारावी, कुर्ला(कुछ जगह), बादुप पहाड़ी आदि।
 आखिर क्यों एक मंदिर को अढ़ाई दिन में बना दिया था मस्जिद? 

स्लम पर्यटन की शुरुआत कैसे हुई?

स्लम पर्यटन की शुरुआत कैसे हुई?

स्लम पर्यटन के मेजबान रवि सांसी वर्ष 2015 में सड़कों पर मैप बेचने का काम करते थे, इसी दौरान उन्होंने देखा कि, कुछ लडके विदेशी पर्यटकों को परेशान कर रहे हैं, यह देख सांसी ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने के बारे में सोचा, और उन्होंने उस विदेशी को अपनी खार चौपाटी ले जाने की बात कही, जिसे विदेशी पर्यटकों ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। रवि की मां को 28 साल की वह पर्यटक बहुत अच्छी लगी और उन्होंने उसे 16 सदस्यों के परिवार के साथ एक कमरे में उन्हें रहने के लिए कहा और वह मान गई।Pc:Pál Baross

अतिथि सत्कार से भाव विभोर थी विदेशी पर्यटक

अतिथि सत्कार से भाव विभोर थी विदेशी पर्यटक

खार चौपाटी में रहने वाले रवि के अतिथि सत्कार के कारण वह विदेशी पर्यटक जब घर से विदा होने लगी तो वह काफी उदास थी, क्योंकि वह हम लोगों से मिलकर बहुत खुश थी।Pc:Madhav Pai

कहां से आया स्लम पर्यटन का आईडिया?

कहां से आया स्लम पर्यटन का आईडिया?

सबसे पहले यह आइडिया 32 साल के डेविड बिज्ल ने दिया जो खुद नीदरलैंड से हैं और फिलहाल एक एनजीओ के लिए काम कर रहे हैं। इसी दौरान उनकी मुलाकात संसी से हुई। संसी के घर में रहने के लिए दो लोगों का एक रात का खर्च दो हजार रुपये होगा।

स्लम पर्यटन का उद्देश्य

स्लम पर्यटन का उद्देश्य

मेजबान का उद्देश्य मुंबई की स्लम झोपड़ी में ठहरने वाले पर्यटकों को घर की फीलिंग देना है। रवि टोनिया सांसी ने अपने 16 सदस्यों के परिवार के साथ में 12/6 फीट के अपने छोटे घर में पर्यटकों को ठहरने की व्यवस्था की है। मेहमानों को ठहराने के लिए, उन्होंने अपने घर के पास ही एक दूसरे कमरे का निर्माण किया है। इसके अलावा, उन्होंने अपने घर की पहली मंजिल पर बने कमरे को फिर से री-फर्निश किया है। इस कमरे में उनकी सुविधा के लिए गद्दे, एक बड़ा फ्लैट स्क्रीन टीवी और एक खिड़की एयर कंडीशनर लगाया गया है।
Pc:Slum Homestay Mumbai

फेसबुक पेज

फेसबुक पेज

बताया जाता है कि यह विचार नीदरलैंड मूल के निवासी डेविड बीजिल द्वारा दिया गया है, जो एक एनजीओ के सुपरवाइजर हैं जहां रवि टोनिया काम करते हैं। वे बताते हैं उन्होंने खुद ही टोनिया परिवार की आतिथ्य का अनुभव किया है जिसके बाद उन्होंने इसका उपयोग अन्य पर्यटकों के लिए करने का निर्णय लिया। संसी ने इसके लिए एक फेसबुक पेज बनाया है जहां लोगों से उन्हें मिलीजुली प्रतिक्रिया आ रही है।
Pc: Slum Homestay Mumbai