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जाने कानपुर के प्रसिद्ध मन्दिरों के बारे में

By Goldi

उत्तरप्रदेश का सबसे बड़ा शहर कानपुर राजधानी लखनऊ से करीबन 92 किमी की दूरी पर स्थित है । किवदंती है कि भगवान कृष्ण के नाम के आधार पर इसका वास्तविक नाम कन्हैयापुर था और समय के साथ इसे इसका वर्तमान नाम मिला।

औद्योगिक क्षेत्र में कानपुर अपने चमड़े और कपास के उत्पादों के लिए प्रसिद्द है और भारत से तथा विदेशों से भी व्यापार को आकर्षित करता है। कानपुर तथा इसके आसपास पर्यटन स्थल पहली झलक में कानपुर भारत के अन्य शहरों की तरह ही है - अस्त व्यस्त, रंगीला, जीवंत और हमेशा किसी न किसी गतिविधि में लगा रहने वाला। हालांकि इसके बाहरी स्वरुप के अलावा यहाँ ऐसा बहुत कुछ है जिसे आप देख सकते हैं और कर सकते हैं। कानपुर के पर्यटन में कई मंदिर शामिल हैं जिनका आप भ्रमण कर सकते हैं जिसमें श्री राधाकृष्ण मंदिर , भीतरगाँव मंदिर और द्वारकाधीश मंदिर शामिल हैं। तो आइये इसी क्रम में जानते हैं कानपुर के कुछ पप्रसिद्ध मंदिरों के बारे में

 राधा कृष्ण मंदिर

राधा कृष्ण मंदिर

Pc:Sunshineroshan
कानपुर के प्रसिद्ध मन्दिरों में शुमार राधा कृष्ण मंदिर को जे.के मंदिर भी कहा जाता है। जे. के ट्रस्ट द्वारा निर्मित यह मंदिर आधुनिक शैली और वास्तुकला से परिपूर्ण है।मूल रूप से राधा कृष्ण को समर्पित इस मंदिर में लक्ष्मीनारायण, श्री अर्धनारीश्वर, नर्मदेश्वर और श्री हनुमान जी की मूर्तियां भी स्थापित है ।

जैन ग्लास मंदिर

जैन ग्लास मंदिर

नाम से मालूम होता है कि, यह मंदिर पूर्ण रूप से कांच से निर्मित है । बता दें, जैन मंदिर कानपुर के प्राचीन और भव्य मन्दिरों में से एक माना जाता है। यह खूबसूरत नक्काशियों से बना मंदिर पर्यटकों को खूब भाता है। मंदिर में कांच की और तारचिनी की अद्भुत सजावट की गई है। जैन ग्लास मंदिर का निर्माण जैन समुदाय द्वारा उनके धर्म के 24 तीर्थंकरों की स्मृति में करवाया गया। इस मंदिर में भगवान महावीर और तीर्थंकरों की मूर्तियां भी हैं। ये मूर्तियां एक विशाल छतरी के नीचे संगमरमर के मंच पर खड़ी है। दीवारों पर कांच के भित्ति चित्र बने हुए हैं और जैन ग्रंथों में निहित शिक्षाओं को चित्रित करते हैं।

उत्तर प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध मंदिर

द्वारकाधीश मंदिर

द्वारकाधीश मंदिर

द्वारकाधीश मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित मंदिर है, यह मंदिर कानपुर के कमला टावर के पास स्थित है । यह कानपुर का भव्य मंदिर है जो सभी रीती रिवाजो को फॉलो करता है। यह मंदिर अपने झूले के लिए प्रसिद्ध है जहाँ भक्त अत्यंत उत्साह के साथ देव युगल को झूला झुलाते हैं।

भीतरगाँव मंदिर

भीतरगाँव मंदिर

भीतरगाँव में एक प्राचीन मंदिर है जिसका निर्माण 6 वीं शताब्दी में भारत के स्वर्णिम गुप्तकाल के दौरान हुआ था। अत: इस मंदिर का नाम इस गाँव के आधार पर पड़ा। भीतरगाँव मंदिर को सबसे प्राचीन हिन्दू पवित्र स्थान माना जाता है जिसमें ऊंची छत या शिखर है। 68.25 ऊंची यह संरचना टेराकोटा और 18 इंच लम्बी, 9 इंच चौड़ी और 3 इंच मोटी ईंटों से बनी है। यह 36 फीट लंबे और 47 फीट चौड़े मंच पर बना है। मंदिर की दीवारों की मोटाई 8 फीट है। इसमें एक गुम्बदाकार मेहराब है जिसका उपयोग भारत में पहली बार किया गया। पूरा ढांचा उस समय की वास्तुकला का प्रमाण है। 15 फीट लम्बा और 15 फीट चौड़ा यह गर्भगृह दो मंजिला है और यह देवी सीता के अपहरण से अधिक नर और नारायण की पश्चाताप की हिंदु अवधारणा को प्रस्तुत करता है।

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