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पुडुचेरी के इस मंदिर में मिलेगा रामसेतु में उपयोग हुए पत्थर के दर्शन करने का मौका

रामायणकाल में जब लक्ष्‍मण जी ने शूर्पनखा की नाक काटी, तो गुस्से से आग-बबूला उसके भाई रावण ने माता सीता का हरण पंचवटी से किया था। उस दौरान भगवान राम, सीता और लक्ष्‍मण पंचवटी में एक एक कुटिया में रहते थे। नाशिक में स्थि‍त पंचवटी धार्मिक स्थल इतना महत्वपूर्ण है कि इसके नाम के मंदिर देश के बाकी हिस्सों में भी मौजूद हैं। उन्हीं में से एक है पुडुचेरी का पंचवटी मंदिर।

panchavatee anjaneya temple

दरअसल पुडुचेरी का पंचवटी मंदिर हनुमान मंदिर है और दक्षिण के लोग इसे पंचवटी आंजनेय मंदिर कहते हैं। इससे भी खास बात यह है कि केवल इस मंदिर का नाम ही रामायण से नहीं जुड़ा है, बल्कि यहां पर कुछ ऐसा भी है जो आपको वानर सेना के नल और नील की याद दिलाता है।

आइए आपको पुडुचेरी के पंचवटी आंजनेय मंदिर के बारे में बताते हैं

36 फीट ऊंची है भगवान हनुमान की प्रतिमा

पुडुचेरी से लगभग 9 किमी की दूरी पर स्थित पांजावडी गांव में हैं पंचवटी आंजनेय मंदिर। इस मंदिर का नाम पंचवटी के नाम पर रखा गया है जहां 14 वर्षों के वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण कुटिया बनाकर रहते थे। इस मंदिर को आंजनेय (अंजनी का पुत्र) या हनुमान मंदिर भी कहा जाता है।

panchmukha hanuman

मंदिर में काले पत्थर से निर्मित भगवान हनुमान की पंचमुखी प्रतिमा है जो खड़ी मुद्रा में है। इस मूर्ति की लंबाई करीब 36 फीट और चौड़ाई 8 फीट है। यह संभवतः भारत का दूसरी सबसे ऊंची मूर्ति है। भगवान हनुमान की ऐसी अद्भुत और विलक्षण मूर्ति और कहीं भी देखने को नहीं मिलती है।

मन्नतें मांगने आते हैं लोग

इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा जून 2003 में हुई थी। मंदिर को लगभग डेढ़ एकड़ भूमी में बनाया गया है। शनिवार को इस मंदिर में श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा भीड़ लगती है, जो अपनी मन्नतें मांगने के लिए 5 शनिवार तक यहां लगातार साधना करने आते हैं। आंजनेय मंदिर में एक गणपति और एक राम दरबार भी है।

anjaneya temple puducherry

इसके अलावा मंदिर के पीछे से भी भगवान हनुमान पांचवें चेहरे का दर्शन हो सकता है। भक्त इस मंदिर में हनुमान जी को पान के पत्तों की माला, माखन और कपड़े चढ़ावे के तौर पर अर्पण करते हैं। इसके साथ ही कुछ भक्त वडा की माला भी भगवान को चढ़ाते हैं जिसे बाद में जरूरतमंदों में वितरित कर दिया जाता है।

रामसेतु के पत्थर का दर्शन

panchavatee anjaneya temple

पंचवटी आंजनेय मंदिर में एक अद्भुत पत्थर भी रखा हुआ है जिसके बारे में कहा जाता है कि इस पत्थर का उपयोग रामसेतु को बनाने में किया गया था। पानी में रखने पर यह पत्थर तैरने लगता है। यहां रखा पत्थर ठीक वैसा ही है जैसा तमिलनाडु के धनुषकोडी में पाया जाता है, जहां मौजूद बड़े-बड़े पत्थर आज भी समुद्र पर तैरते हैं। पंचवटी आंजनेय मंदिर सुबह 7 बजे से 11 बजे तक खुला रहता है और शाम को मंदिर 4 बजे से रात को 8 बजे तक खुलता है।

कैसे पहुंचे पंचवटी आंजनेय मंदिर

यह मंदिर पुडुचेरी से महज 12 किमी की दूरी पर ही स्थित है। मंदिर पुडुचेरी से सड़क मार्ग से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा अगर आप ट्रेन या विमान से इस मंदिर के दर्शन करने जाना चाहते हैं तो पंचवटी आंजनेय मंदिर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पुडुचेरी ही है। यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट चेन्नई एयरपोर्ट है। जहां से आपको पुडुचेरी और पंचवटी आंजनेय मंदिर के लिए गाड़ियां आसानी से मिल जाएंगी।

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