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मकर संक्रांति : उत्तर से लेकर दक्षिण भारत की फूड सफारी का बनें हिस्सा, उठाएं लजीज व्यंजनों का लुफ्त

14 से 15 जनवरी के बीच भारतीय भूमि नाना प्रकार के व्यंजनों से सजने वाली है, जिसकी तैयारी आज से ही भारत के सभी प्रांतों में शुरू हो चुकी है। उत्तर से लेकर दक्षिण, सभी दिशाएं मौसम की करवट के साथ भारतीय स

By NRIPENDRA BALMIKI

भारत को किसानों की भूमि कहा जाता है, जिसका कारण, यहां की कृषि प्रधान संस्कृति। दिन-रात एक कर माटी को सोने में परिवर्तित कर रहे धरतीपुत्र भारत के मूल शिल्पकार माने जाते हैं। सुबह से लेकर शाम तक हमारी थाली में सजने वाले विभिन्न स्वादिष्ट व्यंजनों के चटखारे लेने के दौरान, भले ही हम अन्नदाताओं को याद न करते हों, पर हमें ये नहीं भूलना चाहिए, कि ये सब इन्हीं की ही देन है।

14 से 15 जनवरी के बीच भारतीय भूमि नाना प्रकार के व्यंजनों से सजने वाली है, जिसकी तैयारी आज से ही भारत के सभी प्रांतों में शुरू हो चुकी है। उत्तर से लेकर दक्षिण, सभी दिशाएं मौसम की करवट के साथ, भारतीय संस्कृति की सौंधी सुगंध लिए खिल उठने के लिए तैयार हैं। 'नेटिव प्लानेट' के आज के विशेष लेख में जानिए 'मकर संक्रांति' के दिन सतरंगी भारत के अगल-अलग हिस्सों से स्वाद की कौन-कौन सी महक आने वाली है।

खिचड़ी के साथ उत्तर भारत का रंग

खिचड़ी के साथ उत्तर भारत का रंग

pc Khichdi Khichri

विविधता में एकता प्रदर्शित करते भारतीय त्योहारों की असल झलक 'मकर संक्रांति' के माध्यम से देखी जा सकती है। उत्तर भारत के हरियाणा-पंजाब प्रांत में जहां इस पर्व को लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है तो वहीं उत्तर प्रदेश में 'दान' व बिहार में इसे 'खिचड़ी' का पर्व कहा जाता है। इस अवसर पर सिख समुदाय तिल से बने 'गजक' व 'रेवड़ियों' को आपस में बांटकर खुशियां मनाते हैं। साथ ही पारंपरिक 'मक्के की रोटी-सरसों का साग' भी बनाया जाता है। उत्तर प्रदेश व बिहार में इस दिन 'काली दाल की खिचड़ी' बनाने की परंपरा है। खिचड़ी के साथ-साथ इस दिन बिहार में दही - चूड़ा, तिलकुट भी खाए जाते हैं।

'पारंपरिक खीर' के साथ दक्षिण भारत

'पारंपरिक खीर' के साथ दक्षिण भारत

pc-Venkat478

दक्षिण भारत विशेषकर तमिलनाडु में 'मकर संक्रांति' को 'पोंगल' के नाम से जाना जाता है। चार दिन तक चलने वाले इस पर्व के दौरान अगल-अलग रीति - रिवाजों का पालन करने की अनूठी परंपरा है। इस पर्व का यहां इसलिए भी ज्यादा महत्व है क्योंकि यह तमिल माह की पहली तारीख से शुरू होता है। इस दिन मिट्टी के बर्तन में 'पोंगल' नामक पारंपरिक 'खीर' बनाने का रिवाज है, जिसे (नए धान) चावल, मूंग की दाल और गुड़ से बनाकर तैयार किया जाता है। जिसके बाद सूर्य देवता को पहला भोग लगता है।

तिल-गुड़ की खुशबू से महकेगा उत्तर-पश्चिम भारत

तिल-गुड़ की खुशबू से महकेगा उत्तर-पश्चिम भारत

pc-Aakash Singh Chauhan

भारत के उत्तर-पश्चिम प्रांत में भी मकर संक्रांति का पर्व देखने लायक होता है। महाराष्ट्र की बात की जाए, तो यहां तिल-गूल से बना स्वादिष्ट 'हलवा' बनाने की परंपरा है। तो वहीं राजस्थान में लोग नहा-धोकर तिल, मूंगफली व गजक का आनंद लेते हैं, साथ ही पारंपरिक पकवान बनाकर परिवार-रिश्तेदारों के साथ खुशियां मनाते हैं। गुजरात में मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की खास परंपरा है, इस दिन महिलाएं पारंपरिक व्यंजन ऊंधिया, ढोकला व तिल के लड्डू बनाकर पर्व में शामिल होती हैं।

पूर्वोत्तर राज्यों में बनेंगे स्वादिष्ट पीठे

पूर्वोत्तर राज्यों में बनेंगे स्वादिष्ट पीठे

pc - Reyacarmelite

'मकर संक्रांति' का पर्व मनाने में भारत का पूर्वोतर प्रांत भी किसी मायने में कम नहीं। बंगाल की बात की जाए तो यहां प्रात: स्नान के बाद तिल दान करने की प्रथा है। इस दिन हर घर में स्वादिष्ट 'पीठों' (पारंपरिक व्यंजन) को बनाकर तैयार किया जाता है। दूध, गुड़ व चावल के आटे से बने ये स्वादिष्ट पीठे वाकई लाजवाब होते हैं। साथ ही इस दिन 'खेजुर गुड़' का लुफ्त भी उठाया जाता है। पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी मकर संक्रांति का पर्व सांस्कृतिक दृष्टि से काफी मायने रखता है। इस दिन महिलाएं पारंपरिक व्यंजनों के साथ लोक कलाओं में भाग लेती हैं जिनमें पुरूष भी उनका साथ बढ़ चढ़कर देते हैं।

क्यों बनाई जाती है खिचड़ी

क्यों बनाई जाती है खिचड़ी

pc - Yuv103m

धार्मिक मान्यता व पौराणिक दंतकथा के अनुसार ऐसा कहा जाता है, कि गुरू गौरखनाथ एक बार भैरवनाथ के साथ भिक्षाटन के दौरान ज्वाला देवी के घर गए थे, जिसके बाद ज्वाला देवी ने उन्हे भोजन के लिए आमंत्रित किया। देवी ने उन्हें खाने के लिए खिचड़ी परोसना चाहती थीं, जिसके लिए उन्होनें अदहन( चावल पकाने के लिए आग पर चढ़ा पानी) चढ़ा दिया , इस दौरान चावल की कमी पड़ गई। जिसके बाद आसपास से इलाकों में खिचड़ी की आवश्यक साम्रगी जुटाने के लिए स्वयं गोरखनाथ निकल पड़े । मान्यता है कि गुरू गोरखनाथ तब से आजतक नहीं लौटे। कहा जाता है कांगड़ा स्थित जवाला देवी के मंदिर में आज भी वो अदहन गर्म कुंड के रूप में निरंतर खौल रहा है। यही वजह है कि गोरखपुर में स्थित 'गोरखनाथ मंदिर' में प्रति वर्ष श्रद्धालु मकर संक्रांति के अवसर पर खिचड़ी का भोग लगाने आते हैं।

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश

pc-Bhavishya Goel

किसानों के त्योहार 'मकर संक्रांति' के धार्मिक, पारंपरिक पहलुओं के बाद इससे जुड़े अन्य पहलुओं को भी जानना आपके लिए जरूरी है। अन्य दृष्टि से ये पर्व तब मनाया जाता है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इसी दिन सूर्य धनु राशि के स्थान से हट मकर राशि की ओर बढ़ता है। सूर्य की इसी उत्तरायण गति के कारण इस पर्व को 'उत्तरायणी' भी कहा जाता है।
अगर आप भारत की अनूठी परंपरा, संस्कृति को करीब से जनाना चाहते हैं तो मकर संक्रांति के पावन पर्व का हिस्सा जरूर बनें। 'नेटिव प्लानेट' की टीम की ओर से आप सभी को 'मकर संक्रांति' की ढेरों बधाइयां और शुभकामनाएं।

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