गणपति महोत्सव की शुरुआत बस होने ही वाली है। देश भर में भगवान गणेश के प्रमुख मंदिरों में से एक है पुणे का श्रीमंत दगड़ूशेठ गणपति मंदिर। इस साल गणेशोत्सव का बड़े ही भव्य अंदाज में दगड़ूशेठ गणपति मंदिर में आयोजन किया जा रहा है। इस साल पुणे के इस प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर में कुछ ऐसा देखने को मिलेगा, जिसे आप लंबे समय तक याद रखेंगे।
पुणे के श्रीमंत दगड़ूशेठ हलवाई गणपति मंदिर में हिमाचल प्रदेश के जलोटी शिव मंदिर के तर्ज पर पंडाल का निर्माण किया गया है। हिमाचल प्रदेश के सोलन घाटी में मौजूद जटोली मंदिर को एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है, जिसकी प्रतिकृति इस साल पुणे के श्रीमंत दगड़ूशेठ हलवाई गणपति मंदिर में श्रद्धालु देख सकेंगे।
क्यों खास है जटोली शिव मंदिर
हिमाचल प्रदेश के सोलन में स्थित जटोली शिव मंदिर यूं तो उत्तर भारत में मौजूद एक मंदिर है। लेकिन इस मंदिर को खास इसकी वास्तुकला बनाती है। दरअसल, इस मंदिर का निर्माण दक्षिण भारतीय द्रविड़ियन शैली में किया गया है। बॉलीवुड प्रोडक्शन डायरेक्टर अमन विधाते ने दगड़ूशेठ पंडाल का डिजाइन तैयार किया है। Indian Express की एक रिपोर्ट के अनुसार पुणे के दगड़ूशेठ गणपति मंदिर ट्रस्ट ने सबसे पहले तमिलनाडु के रामेश्वरम मंदिर, उसके बार उत्तराखंड के शिखर मंदिर के बारे में भी सोच-विचार किया था।
लेकिन आखिरकार हिमाचल प्रदेश के जटोली मंदिर के तर्ज पर ही पंडाल का निर्माण करने का फैसला लिया गया। इसकी वजह बताते हुए विधाते ने मीडिया को कहा कि जटोली मंदिर को चुनने की वजह इसकी 122 फीट की ऊंचाई ही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंडाल की ऊंचाई वास्तविक मंदिर की ऊंचाई से ज्यादा ही होगी, करीब 125-137 फीट।
1 महीने से ज्यादा का लगा समय
बताया जाता है कि इस पंडाल को बनाने में 40-45 दिनों का समय लग गया है। 3 सितंबर तक पंडाल के निर्माण का 90 फीसदी काम पूरा कर लिया गया था। बस कुछ छिटपुट काम ही थे, जिन्हें उसके बाद पूरा किया गया है। पूरे पंडाल को एक बार में ही न बनाकर अलग-अलग टुकड़ों में तैयार किया गया है। एक बार सभी टुकड़ों का निर्माण पूरा होने के बाद उन्हें एक साथ में जोड़कर जटोली मंदिर का आकार दिया गया है।
विधाते ने बताया कि इस पंडाल का निर्माण 650 से अधिक कारीगरों ने किया है और पंडाल के सभी हिस्सों को मुंबई और पुणे के अलग-अलग वर्कशॉप में तैयार किया गया है। पंडाल के निर्माण के लिए क्ले और मोल्डिंग का काम मुंबई के अंधेरी में किया गया और डिजाइनिंग का काम करद में। सभी हिस्सों के पूरी तरह से बन जाने के बाद उन्हें ट्रकों से पुणे लाया गया, जिसे जोड़कर पूरे पंडाल का आकार प्रदान किया गया है।
कल होगी स्थापना
गणेश चतुर्थी के दिन यानी 7 सितंबर को सुबह 11.11 बजे कर्नाटक के हुमानाबाद के श्री दत्ता संप्रदाय के श्री गणराज महाराज माणिक प्रभु प्राणप्रतिष्ठा समारोह को संपन्न करवाएंगे। शाम को केंद्रीय मंदिर मुरलीधर मोहोल पंडाल की लाइटिंग का उद्घाटन करेंगे।
बता दें, पिछले करीब 132 सालों से पुणे के श्रीमंत दगड़ूशेठ हलवाई गणपति मंदिर में भगवान गणेश की पूजा की जा रही है। दगड़ूशेठ गणपति ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी हेमंत रसाने ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 17 सितंबर को दगड़ूशेठ की बारात निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
क्या होगा गणेशोत्सव का शेड्यूल :
गणेश चतुर्थी के दिन (7 सितंबर)
- गणेश आगमन : सुबह 8.30 बजे
- प्राण प्रतिष्ठा : सुबह 11.11 बजे
- दैनिक अभिषेक-पूजा : 8 सितंबर-16 सितंबर तक, सुबह 7 से शाम 5 बजे तक
- अथर्वशिर्ष का पाठ : 8 सितंबर को सुबह 6 बजे 31,000 महिलाएं यहां एकत्र होकर अथर्वशिर्ष का पाठ करेंगी।
- सत्यविनायक पूजा : 16 सितंबर को मुख्य पंडाल में सत्यविनायक पूजा का आयोजन किया जाएगा।
- गणेश विसर्जन : 17 सितंबर, शाम 4 बजे
- आम श्रद्धालुओं के लिए पंडाल खुलने का समय : सुबह 5.30 बजे से रात 11 बजे तक



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