Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »गणेश चतुर्थी पर महाराष्ट्र के इन मंदिरों में जाकर प्राप्त कर गणपति का आर्शिवाद

गणेश चतुर्थी पर महाराष्ट्र के इन मंदिरों में जाकर प्राप्त कर गणपति का आर्शिवाद

गणेश चतुर्थी में बस कुछ दिनों का समय ही शेष रह गया है। महाराष्ट्र की गणेश चतुर्थी की चर्चा पूरे देश में होती है। गणेश चतुर्थी के समय तो लोग पंडालों में भगवान गणेश के दर्शन और आर्शिवाद के लिए आते रहते हैं। लेकिन आज हम आपको महाराष्ट्र के कुछ प्रसिद्ध गणेश मंदिरों के बारे में बता रहे हैं जहां खासतौर पर गणेश चतुर्थी के समय विनायक दर्शन और उनका आर्शिवाद लेने के लिए जरूर जाना चाहिए।

Vinayak

सिद्धिविनायक

महाराष्ट्र के प्रमुख गणपति मंदिरों में सबसे पहला नाम मुंबई के प्रभादेवी में स्थित सिद्धिविनायक का ही आता है। मुंबई जाने वाला हर व्यक्ति एक बार सिद्धिविनायक में भगवान गणेश के दर्शन करने जरूर जाता है। सिद्धिविनायक मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है कि इस मंदिर में भगवान गणेश का सूंड दाईं तरफ मुड़ा हुआ है।

siddhivinayak

कहा जाता है कि इस मंदिर में सच्चे दिल से भगवान गणेश से मांगी गयी हर मनोकामना जरूर पूरी होती है। सिद्धिविनायक मंदिर देश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक माना जाता है।

दगड़ू सेठ हलवाई

Dagadu seth

अपने भक्त दगड़ू सेठ हलवाई के नाम पर ही भगवान गणेश पुणे के इस मंदिर में विराजमान है। यह महाराष्ट्र का दूसरा सबसे लोकप्रिय मंदिर है। कहा जाता है कि इस मंदिर में भगवान गणेश काफी जागृत हैं। मंदिर में भगवान गणेश को सोने के आभुषणों से सजाया जाता है। गणपति की 7.5 फीट ऊंची और 4 फीट चौड़ी प्रतिमा है, जिसे सजाने के लिए लगभग 8 किलो सोने का इस्तेमाल किया जाता है। इस मूर्ति के दोनों कान सोने से निर्मित हैं।

दशभुजा गणेश

पुणे के कारवे रोड में स्थित है भगवान गणेश के दशभुजा स्वरूप का मंदिर। भगवान के इस स्वरूप के पीछे एक पौराणिक कहानी छिपी हुई है। कहा जाता है कि जब परमपिता ब्रह्मा सृष्टि का निर्माण कर रहे थे, तब दैत्य व असुर उनके इस काम में बार-बार बाधा पहुंचा रहे थे और देवों को परेशान कर रहे थे।

Ganesh idol

उस समय देवी दुर्गा ने सुरभि यानी कामधेनु गाय के गोबर से भगवान गणेश के इस स्वरूप का निर्माण किया और उन्हें अपना वाहन व अस्त्र-शस्त्र सौंपे। इसके बाद ही भगवान गणेश ने असुरों और दैत्यों का वध किया। दानवों का नाश करने के कारण उन्हें 'दशुभुजा आदिदेव गणपति' कहा जाता है।

अष्टविनायक गणेश

ganapati

110 किमी के दायरे में महाराष्ट्र में भगवान गणेश के 8 शक्तिपीठ स्थित हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि यहां भगवान गणेश स्वयंभू हैं। यानी इन मंदिरों में स्थित भगवान गणेश की मूर्ति को किसी व्यक्ति ने नहीं बनाया है। ये सभी मंदिर पुणे व इसके आसपास के गांवों में मौजूद हैं। इन मंदिरों के बारे में विस्तृत रूप से पढ़ने के लिए NativePlanet का नीचे दिये हुए आर्टिकल को क्लिक कर पढ़े :

नवशा गणपति

idol

नासिक के पेशवे कॉलोनी, आनंदवल्ली में करीब 400 साल पुराना नवशा गणपति का मंदिर स्थित है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पेशवा राघोबा और उनकी पत्नी आनंदीबाई ने 1774 में करवाया था। दोनों भगवान गणेश के बहुत बड़े भक्त थे। राघोबा पेशवा और आनंदीबाई ने अपने बेटे का नाम भी विनायक ही रखा था। यह मंदिर गोदावरी नदी के किनारे पर स्थित है। मंदिर के पास राघोबा पेशवा ने एक किले का भी निर्माण करवाया था लेकिन 1818 में अंग्रेजों ने उस किले को नष्ट कर दिया। हालांकि मंदिर को वे कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकें।

अदासा गणपति

lord bappa

नागपुर के पास अदासा गांव में स्थित है भगवान गणेश का मंदिर अदासा गणपति। यह गांव नागपुर से लगभग 50 किमी दूर है। कहा जाता है कि इस मंदिर में स्थापित बाप्पा भक्तों के बड़े से बड़े परेशानियों का हल कर देते हैं। यह एक स्वयंभू गणेश की मूर्ति है। अदासा गणपति की मूर्ति लगभग 11 फीट ऊंची और 7 फीट चौड़ी है, जो एक ही पत्थर से निर्मित है।

गणपति पुले

महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में स्थित है गणपति पुले का मंदिर। यह मंदिर भगवान गणेश के भक्तों के लिए काफी खास है। यह मंदिर उन चुनिंदा मंदिरों में से एक है जहां भगवान की मूर्ति का चेहरा पश्चिम की तरफ है। समुद्र तट पर स्थित होने की वजह से इस मंदिर में गणेश चतुर्थी के समय काफी संख्या में भक्त उपस्थित होते हैं।

More News

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+