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वाराणसी में है 70 से ज्यादा गंगा घाट, जानिए क्या है उनका महत्व!

वाराणसी (काशी) में दो चीजें सबसे ज्यादा लोकप्रिय होती है जिसकी वजह से विदेशों से भी हर साल हजारों पर्यटक बनारस आते रहते हैं। बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर के बाद गंगा के घाट सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। क्या आपको पता है बनारस में कुछ कितने घाट हैं?

varanasi

इन घाटों का क्या महत्व है? चलिए हम आपकी मुश्किल को थोड़ा आसान बनाते हैं और इन सवालों के जवाब बताते हैं।

बनारस में कितने गंगा के घाट हैं

varanasi

बनारस में 80 से ज्यादा गंगा हैं। बनारस के सभी घाट गंगा के किनारे ही बने हुए हैं लेकिन हर घाट का नाम तथ्य और उनके कर्मों के हिसाब से अलग-अलग रखा गया है। बनारस का गंगा घाट ही है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां एक बार डूबकी लगाने से हर तरह के पाप धुल जाते हैं। वाराणसी की यात्रा इसके घाटों पर बिना घूमे अधुरी मानी जाती है।

वाराणसी में कौन सा घाट सबसे महत्वपूर्ण है

वाराणसी के हर घाट का अपना-अपना अलग महत्व है लेकिन हम आपको कुछ घाटों के बारे में अभी मुख्य तौर पर बता रहे हैं। पहला घाट दशाश्वमेध घाट है जो पूजा और स्नान के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा मणिकर्णिका घाट, जहां मृतकों का दाह-संस्कार किया जाता है। कहा जाता है कि बनारस में अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उसे मोक्ष प्राप्त हो जाता है।

आइए बनारस के पंचतीर्थ घाटों के बारे में जानते हैं :

Dashashmedh ghat

दशाश्वमेध घाट - वाराणसी का सबसे प्रमुख गंगा का घाट दशाश्वमेध घाट है। इसी घाट पर शाम के समय होने वाली गंगा आरती बेहद अध्यात्मिक होती है, जिसे देखने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगा के घाट पर जमा होते हैं। इस घाट पर सीढ़ियां बनी हुई हैं, जिनसे होकर आप मां गंगा तक पहुंच सकते हैं। मान्यता है कि काशी विश्वनाथ मंदिर से सबसे नजदीक इस घाट का निर्माण भगवान ब्रह्मा ने 10 घोड़ों की बलि देने के लिए किया था।

manikarnika ghat

मणिकर्णिका घाट - इस घाट के बारे में लगभग सभी को पता है। मणिकर्णिका घाट 24 घंटे लगातार जलती चिताओं की वजह से सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। मान्यता है कि एक बार भगवान शिव और माता पार्वती इस घाट पर बैठे हुए थे, जब माता पार्वती के कानों के कुंडल की मणी खुलकर गिर गयी। उसके बाद से ही इस घाट का नाम मणिकर्णिका घाट रखा गया। इस घाट पर दाह-संस्कार होने से मृतक को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

ganga ghat

पंचगंगा घाट - इस घाट के बारे में कहा जाता है कि यहां 5 नदियों, गंगा, यमुना, किरना, सरस्वती और धुपापापा का संगम होता है। गंगा के अलावा बाकी सभी नदिया पृथ्वी के नीचे से होकर बहती हैं। इसलिए यहां सिर्फ गंगा ही दिखायी देती है। मान्यता है कि गोस्वामी तुलसी दास, जो तुलसीघाट के निकट रहा करते थे, ने इसी घाट पर विनायक पत्रिका की रचना की थी।

assi ghat

असि घाट - यह संभवतः बनारस का सबसे विशाल घाट है। इस घाट पर असि नदी आकर गंगा में मिलती है। इसलिए इस घाट का नाम असि घाट रखा गया है। इस घाट पर हर समय पर्यटकों की भारी भीड़ नजर आती है लेकिन सुबह के समय सुबह ए बनारस कार्यक्रम देखने वालों की तादाद काफी ज्यादा होती है।

ghat

आदि केशव घाट - इस घाट पर गढ़वाल वंश के राजाओं ने 11वीं सदी में आदि केशव मंदिर का निर्माण करवाया था। कहा जाता है कि इस घाट पर भगवान विष्णु स्नान किया करते थे इसलिए यहां आदि केशव मंदिर बनवाया गया।

वाराणसी के गंगा घाटों के नाम

गंगा घाटों के नाम
1 असि घाट
2 दशाश्वमेध घाट
3 गंगा महल घाट
4 रेवान घाट
5 तुलसी घाट
6 भदैनी घाट
7 जानकी घाट
8

माता आनंदमयी घाट

9 वच्चराजा घाट
10 जैन घाट
11 निशाद घाट
12 प्रभु घाट
13 पंचकोटी घाट
14 चेत सिंह घाट
15 ब्रह्मा घाट
16 निरंजनी घाट
17 बुंदी परकोटा घाट
18 महानिर्वाणी घाट
19 शिवाला घाट
20 गुलरिया घाट
21 त्रिपुरा भैरवी घाट
22 हनुमानगढ़ी घाट
23 दंडी घाट
24 डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट
25 हनुमान घाट
26 प्राचीन हनुमान घाट
27 नेपाली घाट
28 कर्नाटक घाट
29 हरिश्चंद्र घाट
30 बावली/अमरोहा घाट
31 लाली घाट
32 विजयनगरम घाट
33 केदार घाट
34 चौकी घाट
35 सोमेश्वर घाट
36 मानसरोवर घाट
37 राजा घाट
38 चौसट्टी घाट
39 जटार घाट
40 भोंसले घाट
41 संकठा घाट
42 आदि केशव घाट
43 सिंधिया घाट
44 राज घाट
45 बाजीराव घाट
46 पहलदा घाट
47 मणिकर्णिका घाट
48 नया/फुटा घाट
49 खिड़की घाट
50 तेलियानाला घाट
51 जलसयी घाट
52 सक्का घाट
53 नांदेश्वर घाट
54 ललिता घाट
55 गोला घाट
56 त्रिलोचन घाट
57 बद्रीनारायण घाट
58 गया/गाई घाट
59 मानमंदिर घाट
60 लाला घाट
61 मीर घाट
62 (आदि) शीतला घाट
63 गणेश घाट
64 शीतला घाट
65 दुर्गा घाट
66 अहिल्याबाई घाट
67 पंचगंगा घाट
68 मुंशी घाट
69 वेणीमाधव घाट
70 दरभंगा घाट
71 मंगल गौरी घाट
72 राणा महल घाट
73 राजा ग्वालियर घाट
74 दिग्पतिया घाट
75 राम घाट
76 मेहता घाट
77 सर्वेश्वर घाट
78 पांडे घाट
79 प्रयाग घाट
80 खोरी घाट
81 दत्तात्रेय घाट
82 नया घाट
83 नारद घाट
FAQs
बनारस के सभी घाटों में सबसे प्रमुख कौन सा है?

बनारस के सभी घाटों में सबसे प्रमुख दशाश्वमेध घाट है। इस घाट पर शाम के समय होने वाली गंगा आरती को देखने के लिए लाखों लोगों की भीड़ उमड़ती है।

वाराणसी में पंचतीर्थ घाट कौन कौन से हैं?

बनारस के पंचतीर्थ घाट दशाश्वमेध घाट, मणिकर्णिका घाट - महाश्मशान, पंचगंगा घाट, आदि केशव घाट और असि घाट को कहा जाता है। ये सभी घाट बनारस की जान कहलाते हैं।

बनारस के प्रमुख घाट कौन-कौन से हैं?

बनारस में 80 से ज्यादा गंगा घाट हैं। लेकिन इनमें असि घाट, दशाश्वमेघ घाट, पंचगंगा घाट, मणिकर्णिका घाट, तुलसी घाट सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं।

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