पश्चिम बंगाल या यूं कहें भारत का आखिरी छोर जहां, पवित्र गंगा नदी और बंगाल की खाड़ी का संगम होता है। उस जगह को गंगासागर के नाम से जाना जाता है। हर साल लाखों की तादाद में लोग मकर संक्रांति के दिन गंगा और सागर के इस संगम स्थल पर आस्था की पवित्र डूबकी लगाने के लिए सागरद्वीप पहुंचते हैं। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में मौजूद सागर द्वीप तक पहुंचने के लिए कोलकाता के गंगा घाटों से वेसल और जहाज खुलते हैं। लेकिन...

इस साल गंगासागर के रास्ते में एक नयी मुसीबत खड़ी हो गयी है, जिसकी शुरुआत 10 साल पहले पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में हुई थी। चिंता का विषय यह है कि अभी तक इस समस्या का कोई समाधान भी नहीं मिल पाया है।
सस्पेंस को ज्यादा न बढ़ाते हुए हम बताते हैं, कैसे 10 साल पहले डूबा बांग्लादेशी जहाज गंगासागर के रास्ते का रोड़ा बन गया है।
साल 2013 में गंगा नदी की सहायक नदी मुरीगंगा में बांग्लादेश का एक जहाज (ट्रॉलर) डुब गया था। इतने सालों तक जलसमाधी लेने के बाद अब अचानक इस साल वह डूबा हुआ जहाज पानी से बाहर निकल आया है और वह भी एक द्वीप के रूप में। यह द्वीप काकद्वीप लॉट- 8 से कचुबेड़िया जाने के जलपथ वाली सहायक नदी की धारा में उभरकर सामने आया है।
यानी कोलकाता से गंगासागर जाने के रास्ते में यह द्वीप पड़ रहा है और सहायक नदी की धारा यहां इतनी संकरी है कि अगर जरा सी भी लापरवाही हुई तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार (28 दिसंबर) को अपने प्रशासनिक भवन नवान्न में हुई बैठक में इस द्वीप को लेकर चिंता जाहिर की थी।

क्या जहाज को रास्ते से हटाया जा सकता है?
पिछले 10 सालों तक यह बांग्लादेशी जहाज मिट्टी और कीचड़ में धंसे रहने के कारण नदी की तलहटी में बैठा हुआ था। इतने सालों तक यह दिखाई नहीं दे रहा था, इसलिए इसे उस जगह से हटाने के बारे में भी कुछ नहीं सोचा जा सका था। सागरद्वीप के तत्कालिन जिलाधिकारी पी. उलगनाथन ने इस जहाज को वहां से हटाने की कोशिश भी की थी, लेकिन वह इसमें असफल हुए थे।
वर्तमान में नौसेना के पास न तो इस समस्या का समाधान के लिए कोई विशेषज्ञ है, ना ही आपदा प्रबंधन के पास इस समस्या का कोई समाधान है। यह एक तकनीकि समस्या है, जिसका समाधान ड्रिजींग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पास ही मिल सकता है जिनकी कुछ ऐसी संस्थाएं हैं जो इस तरह की समस्याओं को सुलझाते हैं।
क्यों नहीं हटाया सकता है जहाज?
ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि अगर ड्रिजींग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पास इस समस्या का समाधान है तो फिर उनसे मदद क्यों नहीं ली जा रही है। अगले साल गंगासागर मेला 8 जनवरी 2024 से शुरू होगा, जो 17 जनवरी 2024 तक चलेगा। उससे पहले ही सभी सेवा शिविर लगाने वाली संस्थानों से लेकर प्रशासनीक अधिकारी व अन्य सारी व्यवस्थाएं करने वाले सागरद्वीप आना-जाना शुरू कर देंगे।
वहीं ड्रिजींग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पास जहाज को हटाने वाली जो संस्थाएं हैं, उनसे मदद मांगने के लिए राज्य सरकार को आवेदन करना पड़ेगा। इसके बाद उस जगह का मुआयना करने के बाद ही ड्रिजींग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया जहाज को हटाने की कवायद शुरू कर सकती है। लेकिन यह पूरी प्रक्रिया 8 जनवरी से पहले पूरी कर पाना संभव नहीं है, इसमें लंबा वक्त लग सकता है।

दुर्घटना रोकने के लिए क्या कदम उठाएगी सरकार?
गंगासागर के रास्ते में अचानक सामने आया यह बिन बुलायी मुसीबत, जो हादसे को निमंत्रण दे रहा है, उससे बचने के लिए राज्य सरकार को महत्वपूर्ण कदम उठाना पड़ेगा। प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल सरकार कचुबेड़िया में मुरीगंगा में उस जगह को चिन्हित करने वाली है, जहां यह डुब चुका जहाज द्वीप के रूप में उभर कर सामने आ गया है।
बताया जाता है कि रात के समय भी इस जगह को चिन्हित करके रखने की योजना बनायी गयी है ताकि गंगासागर मेले के समय कोई भी अप्रिय घटना या हादसा न हो सके। इस बारे में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सिंचाई विभाग के सचिव को आवश्यक निर्देश दिये हैं।



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