उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ मेला 2025 को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। 12 सालों बाद प्रयागराज के संगमतट पर महाकुंभ मेले का आयोजन इस बार होने वाला है। लेकिन इसके साथ-साथ गंगा नदी और बंगाल की खाड़ी के संगम स्थल यानी गंगासागर में भी मेले की तैयारियां बड़े स्तर पर की जा रही हैं। इस मेले में सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड जैसे राज्यों से भी लोग शामिल होने के लिए पहुंचते हैं।
इस साल कब से शुरू हो रहा है गंगासागर मेला? इस मेले को लेकर कौन सी खास तैयारियां की जा रही हैं? कोलकाता से कैसे जाएं सागरद्वीप, जहां आयोजित होता है गंगासागर मेला। इन सभी सवालों का जवाब हम आपको इस आर्टिकल में देने वाले हैं, तो इसे पूरा जरूर पढ़े।

कब से शुरू हो रहा है गंगासागर मेला 2025?
गंगासागर मेला का आयोजन मुख्य रूप से मकर संक्रांति को केंद्र में रखकर ही होता है। इसलिए मकर संक्रांति से कुछ दिनों पहले से ही गंगासागर मेला की शुरुआत हो जाती है। इस साल गंगासागर मेला की शुरुआत 8 जनवरी 2025 से हो रही है। यह मेला 17 जनवरी 2025 तक चलेगा।
पुरानी कहावत है, सब तीर्थ बार-बार, गंगासागर एक बार यानी सभी तीर्थ पर बार-बार जाकर जो पुण्य मिलता है, वह गंगासागर में एक बार जाकर ही मिल जाता है। पश्चिम बंगाल राज्य के दक्षिण 24 परगना जिला के सागरद्वीप में स्थित कपिल मुनि आश्रम परिसर में इस मेले का आयोजन किया जाता है।
कब है पुण्य स्नान का समय?
जानकारी के अनुसार मकर संक्रांति 14 जनवरी की दोपहर को 2.58 बजे से शुरू हो रहा है, लेकिन पुण्य स्नान का समय 14 जनवरी की अहले सुबह से ही शुरू हो जा रहा है। 14 जनवरी की सुबह 6.58 बजे से 15 जनवरी की सुबह 6.58 बजे तक पुण्य स्नान का समय है। कहा जाता है कि पुण्य स्नान करने से न सिर्फ व्यक्ति के सारे पाप धुल जाते हैं बल्कि वह आजीवन स्वस्थ बना रहता है।
इस दिन देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगाने के लिए गंगासागर पहुंचते हैं। पुण्य स्नान के बाद श्रद्धालु कपिल मुनि आश्रम में जाते हैं, जहां पूजा-अर्चना के बाद पुण्यार्थी अपने-अपने घरों के लिए वापस रवाना होते हैं।

क्या-क्या की जा रही हैं खास व्यवस्थाएं?
गंगासागर मेले को लेकर प. बंगाल सरकार की ओर से खास तैयारियां की जा रही हैं। मीडिया रिपोर्ट में दक्षिण 24 परगना के जिलाधिकारी सुमीत गुप्त के हवाले से बताया गया है कि कोलकाता से गंगासागर के बीच अतिरिक्त सरकारी बसें चलायी जाएंगी। इसके अलावा 12 से ज्यादा ट्रेनों का संचालन भी किया जाएगा।
काकद्वीप और सागरद्वीप को जोड़ने वाली मुरीगंगा नदी को पार करना श्रद्धालुओं के लिए चिंता का विषय बन जाता है क्योंकि पानी का बहाव कम होने की वजह से कई बार जहाज उसमें फंस जाते हैं। ऐसे में तीर्थयात्रियों को पानी, भोजन व आपातकालिन सामग्रियां पहुंचाने के लिए विशेष ड्रोन को तैनात किया जाएगा। इसके साथ ही जो विशेष तैयारियां की जा रही हैं, उनके बारे में आगे जानकारी दी जा रही है -
- कोलकाता से गंगासागर के बीच 36 जगहों पर बायोटॉयलेट की व्यवस्था रहेगी।
- तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए पेयजल की 80 लाख से ज्यादा पाउच और 48 वाटर वेंडिंग मशीन लगाई जा रही है।
- गंगासागर मेला में सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए 31 वाच टावर का निर्माण किया गया है।
- मोबाइल चार्जिंग के लिए 150 मोबाइल चार्जिंग यूनिट तैयार किया गया है।
- तीर्थ यात्रियों के ठहरने के लिए अस्थायी 1559 टेंट की व्यवस्था की गयी है।
- मुड़ी गंगा में टावरों पर रोशनी की पूरी व्यवस्था की गयी है ताकि जेट्टी घाट पर रोशनी की कोई परेशानी न हो।
- गंगासागर मेला में 1150 सीसीटीवी कैमरे लगाए गये हैं।
- यहां 100 सोलर लाइट की व्यवस्था की गयी है।

कैसे पहुंचे सागरद्वीप?
गंगासागर मेला में पहुंचने का सबसे आसान तरीका सेवा संस्थाओं के साथ जाना और वापस लौटना होता है। कोलकाता के आउट्राम घाट पर गंगासागर मेला को लेकर सेवा संस्थाओं का जमा होना शुरू हो चुका है, जो तीर्थ यात्रियों को लेकर गंगासागर मेला में जाती हैं और पुण्य स्नान के बाद वापस कोलकाता लेकर आती हैं। ये सभी सेवा संस्थाएं ही तीर्थ यात्रियों के रहने और खाने-पीने से संबंधित सारी व्यवस्थाएं करती हैं। इसके साथ ही तीर्थ यात्रियों को कोलकाता से गंगासागर और गंगासागर से वापस कोलकाता के आउट्राम घाट तक वापस लाने के लिए गाड़ी-बस आदि का इंतजाम करने की जिम्मेदारी इन सेवा संस्थाओं पर ही होती है।
अगर आप कोलकाता से खुद गंगासागर मेले में जाना चाहते हैं तो इसके लिए दो रास्ते हैं - रेलमार्ग और सड़क मार्ग।
अगर आप रेलमार्ग से गंगासागर जाना चाहते हैं तो सियालदह दक्षिण शाखा से ट्रेन से सबसे पहले काकद्वीप पहुंचे। यहां से काकद्वीप स्टेशन से ऑटो या ई-रिक्शा से आपको लॉट 8 घाट जाना होगा। इसके बाद वेसल या लॉन्च से कचुबेड़िया तक पहुंचना पड़ेगा। फिर वहां से गंगासागर के लिए आपको बस मिल जाएगी।
अगर आप सड़क मार्ग से गंगासागर मेला जाना चाहते हैं, तो कोलकाता से द्वारा पहले आपको डायमंड हार्बर होकर लॉट 8 घाट मोड़ तक जाना होगा। वहां बस से उतरकर ऑटो या ई-रिक्शा से लॉट 8 घाट पर जाना होगा। फिर वेसल या लॉन्च से कचुबेड़िया और वहां से बस से गंगासागर मेला तक आप पहुंच सकते हैं।
मिली जानकारी के अनुसार इस साल तीर्थयात्रियों को गंगासागर मेला तक ले जाने और वापस लाने के लिए 2250 सरकारी बस, 250 निजी बस, 6 बर्ज, 100 लॉन्च की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा कोलकाता में 10 टूरिस्ट बस की व्यवस्था भी की गयी है। कचुबेड़िया से सागरद्वीप तक के लिए अतिरिक्त 200 बसों की व्यवस्था भी की जाएगी।

पूर्व रेल चलाएगी गंगासागर स्पेशल 12 ट्रेन
Hindustan Times Bangla की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार गंगासागर मेला को लेकर पूर्व रेलवे 12 स्पेशल ट्रेनों का संचालन 17 जनवरी तक करेगी। इनमें से सियालदह दक्षिण शाखा से 3, कोलकाता स्टेशन से 2, नामखाना से 5, लक्ष्मीकांतपुर से 1 और काकद्वीप से 1 ट्रेन खुलेगी।
- सियालदह दक्षिण शाखा से मेला स्पेशल 3 ट्रेन सुबह 6.15 और दोपहर 2.40 बजे (नामखाना के लिए) और शाम को 4.24 बजे (लक्ष्मीकांतपुर के लिए) खुलेगी।
- ये सभी स्पेशल ट्रेनें 13 जनवरी से 17 जनवरी तक चलेगी।
- नामखाना से मेला स्पेशल ट्रेन सुबह 7.35 बजे और रात 9.30 बजे खुलेगी। सुबह वाली ट्रेन 12 और 14 जनवरी को खुलेगी।
- इसके अलावा नामखाना से 5 गंगासागर मेला स्पेशल ट्रेन रात को 2.05 बजे, सुबह 9.10 बजे और सुबह 11.18 बजे खुलेगी। इनमें से आधी रात के बाद वाली ट्रेन नामखाना के लिए और बाकी की दोनों ट्रेन सियालदह के लिए खुलेगी। ये सभी ट्रेनें 12 और 14 जनवरी को चलेगी। 13 और 14 जनवरी की शाम को 6.35 और 7.05 बजे दो ट्रेन सियालदह के लिए खुलेगी।
- 13 से 16 जनवरी तक काकद्वीप से दोपहर 2.40 बजे और लक्ष्मीकांतपुर से रात 11.15 बजे एक गंगासागर मेला स्पेशल ट्रेन सियालदह के लिए रवाना होगी।

मिली जानकारी के अनुसार इन सभी मेला स्पेशल ट्रेनों का ठहराव सियालदह से काकद्वीप के बीच बालीगंज, सोनारपुर, बारुईपुर, लक्ष्मीकांतपुर, निश्चिंदपुर और काकद्वीप में होगा। कोलकाता स्टेशन से खुलने वाली सभी मेला स्पेशल ट्रेनें कोलकाता से माझेरहाट के बीच सभी स्टेशनों पर रुकेगी।
पिछले साल गंगासागर मेले में लगभग 1 करोड़ तीर्थ यात्री पहुंचे थे लेकिन इस साल महाकुंभ मेला भी आयोजित होने वाला है। इसलिए कितने तीर्थ यात्री गंगासागर मेले में आएंगे, इस बात का अंदाजा अभी नहीं लगाया जा सकता है।



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