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गोवा में 10 सालों बाद फिर से प्रदर्शित हो रही है सेंट जेवियर्स की 400 साल पुरानी जादुई ममी, कब और कहां देखें?

गोवा की राजधानी पणजी से करीब 10 किमी की दूरी पर मौजूद 'बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस' चर्च, जिसे ओल्ड गोवा चर्च भी कहा जाता है। इस चर्च में ही पिछले 400 सालों से सुरक्षित रखा हुआ है एक ममी। यह ममी है उस व्यक्ति की, जिसे गोवा का भगवान तक कहा जाता है। जी हां, गोवा के इस पुराने चर्च में सुरक्षित रखा हुआ है सेंट जेवियर्स की जादुई ममी।

अगर आप भी इस ममी को करीब से देखना और सेंट जेवियर्स के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहते हैं तो यह एक शानदार मौका है। क्योंकि 10 सालों बाद कैथोलिक संत फ्रांसिस जेवियर्स के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी एक बार फिर से शुरू हुई है। पर कब चल चलेगी यह प्रदर्शनी? कहां देख सकेंगे 400 साल पुरानी ममी, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि यह जादुई है।

आइए आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं -

सबसे पहले आपको बताते हैं, कौन थे सेंट फ्रांसिस जेवियर्स?

सेंट फ्रांसिस जेवियर्स सोसायटी ऑफ जीसस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। कहा जाता है कि वर्ष 1542 में जब गोवा एक पुर्तगाली उपनिवेश था, तब वह गोवा पहुंचे थे। गोवा में बसने वाले पुर्तगालियों के बीच ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार का आदेश किंग जॉन तृतीय ने उन्हें दिया था।

सेंट फ्रांसिस जेवियर को 'गोएनचो सैब' (गोवा के भगवान) भी कहा जाता है। वर्ष 1624 से उनका पार्थिव शरीर ओल्ड गोवा में बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस चर्च में सुरक्षित रखा हुआ है। हर 10 साल में इसे एक बार बाहर निकाला जाता है, जब श्रद्धालु उनके दर्शन करना चाहते हैं।

कब से कब प्रदर्शित होंगे अवशेष?

इससे पहले वर्ष 2014 में सेंट फ्रांसिस जेवियर्स के अवशेष (ममी) को बाहर निकाला गया था। अब 10 सालों बाद एक बार फिर से गोवा के बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस चर्च में उनके अवशेषों को बाहर निकाला गया है। यह प्रदर्शनी 21 नवंबर 2024 से शुरू हुई है, जो अगले 45 दिनों तक जारी रहेगी। यानी 5 जनवरी 2025 तक दुनिया भर से आने वाले पर्यटक और कैथोलिक ईसाई समुदाय के श्रद्धालु सेंट फ्रांसिस जेवियर्स को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे।

क्यों कहा जाता है जादुई ममी?

क्या आप जानते हैं सेंट जेवियर्स की ममी को जादुई कहा जाता है। पर ऐसा क्यों होता है? क्या वाकई यह ममी जादुई है? सेंट फ्रांसिस जेवियर्स की मृत्यु वर्ष 1552 में चीन में हुई थी। सबसे उन्हें एक द्वीप में दफनाया गया था। लेकिन अगले साल ही उनके पार्थिव शरीर को बाहर निकाल कर मलक्का ले जाया गया। लेकिन एक साल बाद भी शव जरा सी भी नहीं सड़ी थी। इसके बाद कई महीनों तक उनका पार्थिव शरीर सेंट पॉल चर्च में रखा गया। आखिरकार 1554 में उनके शव को गोवा भेज दिया गया।

यहां कुछ सालों तक उनका शव ओल्ड गोवा के सेंट पॉल कॉलेज में रखा गया। आखिरकार 1624 में उनके शव को बेसिलिका चर्च में सुरक्षित रखा गया। इस दौरान 3 बार से ज्यादा सेंट जेवियर्स के शव को कब्र में गाड़ा गया लेकिन कभी भी शव नहीं सड़ी। कहा जाता है कि मृत्यु से पहले ही संत ने अपना एक हाथ दिव्य शक्तियों के जरीए अपने शरीर से अलग कर दिया था, जो आज भी सुरक्षित रखा हुआ है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि एक श्रद्धालु महिला ने एक बार संत के पार्थिव शरीर में सूईं चुभा दी थी, तब उससे खून बहने लगा था। लेकिन आश्चर्य की बात है कि यह घटना तब की है जब उनके पार्थिव शरीर को सूखे हुए सैंकड़ों सालों का समय बीच चुका था।

क्या आप जानते हैं, बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस चर्च पर कोई क्रॉस नहीं टिकता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस चर्च को एक शिव मंदिर को तोड़कर बनाया गया था, इसलिए इसपर जब भी क्रॉस लगाने की कोशिश की गयी तो वह टूट कर गिर गया। यह एक हेरिटेज साइट है, जहां बाहर तो आप फोटोग्राफी का आनंद उठा सकते हैं लेकिन चर्च के अंदर फोटोग्राफी करना मना है।

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