गोवा, सावन और लता मंगेशकर...तीनों एक-दूसरे से बड़े घुले-मिले हुए हैं। यकिन नहीं हो रहा है? पर यह सच है। गोवा का सावन से और गोवा का लता मंगेशकर के साथ बड़ा ही गहरा रिश्ता है। जब भी हम गोवा का नाम लेते हैं तो सबसे पहले समुद्रतट, बीच पार्टी और चर्च ही ध्यान में आता है। लेकिन गोवा में बीच और चर्च के अलावा भी काफी कुछ है, जो देखने लायक है।
गोवा में मानसून का लुत्फ उठाने के लिए अगर आपने सावन के महीने में ही गोवा जाने का प्लान बनाया है तो मंगेशी शिव मंदिर में जरूर घूम आइए। सावन में शिवभक्ति भी हो जाएगी और वास्तुकला के साथ-साथ इतिहास के पन्ने भी एक बार फिर से पलट लिये जाएंगे।
क्या है मंगेशी शिव मंदिर का इतिहास?
मान्यताओं की मानें तो गोवा के मंगेशी या मंगिरीश शिव मंदिर का इतिहास 450 सालों से भी अधिक पुराना है। कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना 18वीं शताब्दी में की गयी थी। स्थानीय लोगों का मानना है कि एक बार इस स्थान पर भगवान शिव एक बाघ के रूप में माता पार्वती के सामने आए थे।
उन्हें देख कर माता पार्वती के मुंह से निकल पड़ा था, 'रक्षाम् गिरीश' और कुछ का मानना है कि माता पार्वती ने कहा था 'मम् गिरीश'। कहा जाता है कि तब से ही गोवा के इस मंदिर में महादेव की पूजा मंगिरीश के नाम से होने लगी।
शिवलिंग को किया गया स्थानांतरित
गोवा के पोंडा क्षेत्र में मोंगरी पहाड़ी के बीच बने इस मंदिर की वजह से ही इस स्थान को भी पहचान मिली और इस गांव का नाम मंगेशी गांव पड़ा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी स्थान पर भगवान परशुराम ने यज्ञ किया था। उन्होंने अपने बाणों से समुद्र को पीछे ढकेल कर इस शहर की रचना की थी। जिस स्थान पर भगवान परशुराम ने समुद्र को अपने बाणों से पीछे ढकेला था, उस जगह को बाणस्थली के नाम से जाना जाता है।
वर्ष 1560 में जब पुर्तगालियों ने गोवा पर आक्रमण किया था, जब इस मंदिर को बचाने के लिए शिवलिंग को मूल मंदिर से हटाकर प्रियोल के वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया था। बाद में वर्ष 1973 में मंदिर के गुंबद पर स्वर्ण कलश की स्थापना की गयी थी।
अद्भुत है वास्तुकला
गोवा का मंगेशी महादेव का मंदिर शांतादुर्गा की शैली में बना हुआ है। मंदिर में पानी के कुंड बने हुए हैं जो इसकी प्राकृतिक सुन्दरता को कई गुना बढ़ा देते हैं। मंदिर के अंदर कई गुंबई और झरोखे बने हुए हैं। लेकिन पर्यटकों का सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित करते हैं मंदिर में स्थापित भव्य दीपस्तंभ।
यह दीपस्तंभ मंदिर के ठीक बीचोबीच स्थापित है, जो 7 मंजीला है। जब इस दीपस्तंभ के सभी दीपों को जलाया जाता है तब वह नजारा अद्भुत होता है। मंदिर में भगवान शिव के वाहन नंदी महाराज की एक प्रतिमा भी स्थापित है। हर सोमवार को मंदिर में महाआरती का आयोजन किया जाता है। मंदिर में दर्शन करने के लिए किसी भी दिन जा सकते हैं।
लता मंगेशकर के दादा थे पुजारी
स्वर कोकिला लता मंगेशकर को पुरखों से मिला उपनाम 'मंगेशकर' इसी गांव की देन बतायी जाती है। कहा जाता है कि लता मंगेशकर के दादाजी गणेश भट्ट नवाथे किसी समय मंगेशी महादेव के मंदिर के पुजारी हुआ करते थे। इसी गांव से उन्हें उपनाम मंगेशकर मिला, जो आगे चलकर उनकी पहचान बन गया।
एक बार जब मुंबई में लता मंगेशकर बीमार पड़ गयी थी, तब उनके लिए कई मंदिरों में पूजा-अर्चना की गयी थी। इसमें मंगेशी गांव का मंगेशी महादेव का मंदिर भी शामिल था। इस बात की जानकारी खुद लता दीदी ने ही सोशल मीडिया पर दी थी।
मंगेशी मंदिर गोवा की राजधानी पणजी से लगभग 21 किमी की दूरी पर मौजूद मंगेशी गांव में स्थित है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर न सिर्फ ऐतिहासिक और लता मंगेशकर से संबंधित होने की वजह से प्रसिद्ध है बल्कि इसकी वास्तुकला भी देखने लायक है।



Click it and Unblock the Notifications















