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वो गोपुरम जिनकी ऊंचाइयां आपको गहराई में जाने पर मजबूर करेंगी

By Belal Jafri

अगर आपने दक्षिण भारत का दौर किया हो वहां के मंदिरों के दर्शन किये हों तो अवश्य ही आप एक प्रमुख और बिलकुल नयी चीज से अवगत हुए होंगे। ये हैं इन मंदिरों के गोपुरम या प्रवेश द्वार।

अगर आपने इन गोपुरमों पर ध्यान दिया हो तो आप महसूस करेंगे की ये गोपुरम पिरामिड के आकार के हैं। आगे बढ़ने से पहले आपको बताते चहले कि आखिर गोपुरम होता क्या है।

गोपुरम या गोपुर (जिसे विमानम भी कहते हैं) एक स्मारकीय अट्टालिका होती है, प्रायः शिल्प से सज्जित, एवं अधिकतर दक्षिण भारत के मन्दिरोंमें पाया जाने वाला गोपुरम हिन्दु मन्दिरों के स्थापत्य का प्रमुख अंग है और ऊपर किरीट कलश से शोभायमान होता है।

यह मन्दिरों की चारदीवारी में बने द्वार का काम देते हैं। अगर गोपुरमों के इतिहास पर नज़र डाले तो पता चलता है कि सबसे पहले इसका इस्तेमाल दक्षिण भारत में पल्लव वंश के पांड्य शासकओं द्वारा किया गया।

शासकों द्वारा गोपुरमों को बनवाने का प्रमुख उद्देश्य मंदिर के प्रवेश को ढंकना भी था क्यूंकि इनकी लम्बाई और चौड़ाई मुख्य मंदिर से काफी बड़ी भी होती थी। गोपुरम अधिकतर आयताकार होते हैं, जिनके भूमि तल पर बड़ा सा द्वार होते हैं, जो अंदर का मार्ग बताते हैं, और खूब अलंकृत होते हैं।

ऊपर का गोपुरम कई तलों में बंटा होता है, एवं ऊपर जाते जाते तंग होता जाता है। इसके सबसे ऊपर प्रायः ढोलक आकार का शिखर होता है, एवं उसके ऊपर विषम संख्या में कलशों को रखा जाता है।

इन गोपुरमों की सबसे बड़ी ख़ास बात ये होती है कि इन्हे शिल्प एवं चित्रकारी से अत्यधिक सजाया जाता है। यह चित्रकारी मंदिर के प्रधान देवता से सम्बंधित होती है।

श्रीरंगम जहां है सबसे लम्बा गोपुरम

श्रीरंगम जहां है सबसे लम्बा गोपुरम

तमिलनाडु राज्य के अंतर्गत आने वाले श्रीरंगम में मौजूद श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर के गोपुरम को भारत का सबसे लंबा गोपुरम का दर्ज प्राप्त है। कावेरी नदी के किनारे बने इस मंदिर में 21 गोपुरम हैं।

राजा गोपुरम जो यहां का प्रमुख प्रवेश द्वार है एक 236 फीट ऊंचा गोपुरम है। इस गोपुरम के शीर्ष पर तांबे से बने 13 भारी कलशों को सजाया गया है।

इस मंदिर की सबसे प्रमुख बात ये है कि यहां मंदिर को घेरती साथ दीवारों को सात तत्वों पृथ्वी, जल, तेजस, वायु, आकाश, मानस, और बुद्धि के रूप में देखा जाता है ज्ञात हो कि इन सातों तत्वों को हिन्दू धर्म में बड़ी प्रमुखता दी गयी है।

मदुरई मीनाक्षी जो है सबसे शानदार

मदुरई मीनाक्षी जो है सबसे शानदार

कहा जाता है कि भारत में जितने भी गोपुरम हैं उनमें मदुरई के मीनाक्षी मंदिर में मौजूद गोपुरम सबसे शानदार है। बारीक नक्काशी और भव्य ऊंचाई के साथ ब्लॉक ग्रेनाइट पर बनाए गए यहां के दस गोपुरम बेहद शानदार हैं।

बताया जाता है कि मंदिर के पूर्व में बने गोपुरम का निर्माण सुंदरा पंड्या के अथक प्रयासों द्वारा करवाया गया था। कहा जाता है कि इस गोपुरम के निर्माण के बाद से ही ये मन्दिर लोगों के बीच लोकप्रिय हुआ।

श्रीविल्लीपुतुर जिसे कहते हैं द्योतक

श्रीविल्लीपुतुर जिसे कहते हैं द्योतक

मदुरई नायकों के शासनकाल में निर्मित सबसे ऊंचे इस गोपुरम और श्रीविल्लीपुतुर के अंतर्गत आने वाले तिरुविल्लीपुतुर के दिव्य देशम गोपुरम को तमिलनाडु राज्य के प्रतीक के रूप में भी जाना जाता है।

2000 साल पुराना मंदिर होने का कारण इस मंदिर का शुमार भारत के प्राचीन मंदिरों में किया जाता है। ये मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित मंदिर है।

ये 59 मीटर ऊंचा होने के अलावा ये गोपुरम एक 11 मंजिला ऊंची संरचना भी है।
ये स्थान इस राज्य से जुड़े दो प्राचीन कवियों और मुख्य विष्णु भक्त पेरियालवार और आंडाल की जन्मभूमि भी है।

अन्नामलाई जो है एक प्रतिष्ठित गोपुरम

अन्नामलाई जो है एक प्रतिष्ठित गोपुरम

तिरुवन्नमलई के अरुणाचल में आने वाले इस मंदिर परिसर के चारों प्रवेश द्वार पर चार विशाल चार गोपुरम हैं। इस मंदिर परिसर का प्रमुख या राजा गोपुरम पूर्व दिशा में है। इस गोपुरम के निर्माण की शुरुआत विजयनगर साम्राज्य के कृष्णदेवराय द्वारा की गयी थी जबकि इसको पूर्ण निर्मित सेवप्पा नायक ने करवाया।

 एक़म्बरेश्वर मंदिर , बेहद सुन्दर मंदिर

एक़म्बरेश्वर मंदिर , बेहद सुन्दर मंदिर

नायनार या शैव साधकों की साधना और शिव के प्रति अपनी अटूट भक्ति से लोगों के बीच प्रसिद्ध हुआ एक़म्बरेश्वर मंदिर भगवान शिव के साधकों का मंदिर है।

यहां का गोपुरम हमेशा से ही कांचीपुरम और यहां के विजयनगर राजाओं की शान रहा है क्यों कि ये यहां का सबसे लंबा गोपुरम है। दस हेक्टेयर में फैला ये मंदिर अपने पांच विशाल आँगन और हज़ार खंबों वाले हॉल के लिए जाना जाता है।

चिदंबरम खूबसूरती का ज़िंदा नमूना

चिदंबरम खूबसूरती का ज़िंदा नमूना

चिदंबरम का थिल्लई नटराज मंदिर एक बेहद खूबसूरत मंदिर है जहाँ आपको चार गोपुरम देखने को मिल जाएंगे । ये चारों गोपुरम चारों दिशाओं की ओर बने हैं । ये गोपुरम सात मंजिला ऊंचे गोपुरम हैं जिनपर पौराणिक हिन्दू गाथाओं को चित्रित किया गया है।

बताया जाता है की पश्चिम दिशा में बना गोपुरम 12 वीं शताब्दी का है। साथ ही अगर आप पूर्व दिशा में बने गोपुरम को ध्यान से देखें तो आपको मिलेगा कि इनमें भरतनाट्यम के 108 अलग अलग पोजों को दर्शाया गया है।

तो यदि आपको मंदिर और उनकी ऊंचाइयां अपनी तरफ आकर्षित करती हैं तो एक बार तमिलनाडु अवश्य आइये और इन गोपुरमों की सुंदरता में खो जाइये।

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