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ये है भारत की ग्रेट वाल ऑफ़ इंडिया

By Goldi

क्या आप जानते हैं कि, भारत में दुनिया की दूसरी सबसे ऊँची दीवार मौजूद है...जी हां यह दीवार है राजस्थान के गांव कुम्भलगढ़ में। कुम्भलगढ़, राजस्थान के राजसमन्द जिले में स्थित एक एतिहासिक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। यह स्थान

राज्य के दक्षिणी भाग में स्थित है और कुम्भलमेर के नाम से भी जाना जाता है। कुम्भलगढ़ किला राजस्थान राज्य का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण किला है। इसका निर्माण पंद्रहवीसदी में राणा कुम्भा ने करवाया था। पर्यटक किले के ऊपर से

आस पास के रमणीय दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। शत्रुओं से रक्षा के लिए इस किले के चारों ओर दीवार का निर्माण किया गया था। ऐसा कहा जाता है कि चीन की महान दीवार के बाद यह एक सबसे लम्बी दीवार है।इस दुर्ग के अंदर

360 से ज्यादा मंदिर हैं जिनमे से 300 प्राचीन जैन मंदिर तथा बाकि हिन्दू मंदिर हैं।

कुम्भलगढ़ का इतिहास

कुम्भलगढ़ का इतिहास

1443 में राणा कुम्भा ने इसका निर्माण शुरू करवाया पर निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पाया, निर्माण कार्य में बहुत अड़चने आने लगी। राजा इस बात पर चिंतित हो गए और एक संत को बुलाया। संत ने बताया यह काम तभी आगे बढ़ेगा जब स्वेच्छा से कोई मानव बलि के लिए खुद को प्रस्तुत करे। राजा इस बात से चिंतित होकर सोचने लगे कि आखिर कौन इसके लिए आगे आएगा। तभी संत ने कहा कि वह खुद बलिदान के लिए तैयार है और इसके लिए राजा से आज्ञा मांगी।

PC: Nirvani gandhi

संत ने दी अपनी बलि

संत ने दी अपनी बलि

संत ने कहा कि उसे पहाड़ी पर चलने दिया जाए और जहां वो रुके वहीं उसे मार दिया जाए और वहां एक देवी का मंदिर बनाया जाए। संत की बात पर राजा ने वैसा ही किया। संत 36 किलोमीटर तक चलने के बाद रुक गया तभी उसका सिर धड़ से अलग कर दिया गया। जहां पर उसका सिर गिरा वहां किले का मुख्य द्वार है और जहां पर उसका शरीर गिरा वहां दूसरा मुख्य द्वार है। यह किला चारो तरफ से अरावली

की पहाडिय़ों की मजबूत ढाल से सुरक्षित है।

PC: wikimedia.org

15 साल में बना किला

15 साल में बना किला

ऐसा कहा जाता है कि चीन की दीवार के बाद यह सबसे लम्बी दीवार है। यह किला 1,914 मीटर की ऊंचाई पर समुद्र स्तर से परे क्रेस्ट शिखर पर बनाया गया है। इस किले के निर्माण को पूरा करने में 15 साल का समय लागा।

PC: wikimedia.org

दीवार पर दौड़ सकते है दस घोड़े

दीवार पर दौड़ सकते है दस घोड़े

इस किले की दीवार की चौड़ाई इतनी ज्यादा है कि 10 घोड़े एक ही समय में उसपर दौड़ सकते हैं। एक मान्यता यह भी है कि महाराणा कुंभा अपने इस किले में रात में काम करने वाले मजदूरों के लिए 50 किलो घी और 100 किलो रूई का प्रयोग करते थे जिनसे बड़े बड़े लेम्प जला कर प्रकाश किया जाता था। इस दुर्ग के बनने के बाद ही इस पर आक्रमण शुरू हो गए लेकिन एक बार को छोड़ कर ये दुर्ग प्राय: अजेय ही रहा है।इस दुर्ग के राजा के आगे मुगल तक हर मान गये थे, उसी राजा को उसके बेटे उदय कर्ण द्वारा राज्य लिप्सा में मारे गए।

बादलों का महल

बादलों का महल

राजस्थान के अन्य स्थलों की तरह, कुम्भलगढ़ भी अपने शानदार महलों के लिए प्रसिद्ध है जिसमें बादल महल भी शामिल है ।यह ईमारत ‘बादलों के महल' के नाम से भी जानी जाती है। मर्दाना महल और जनाना महल इस महल के आपस में जुड़े हुए दो भाग हैं। इस महल के शानदार कमरे पेस्टल रंगों से निर्मित भित्ति चित्रों से सुसज्जित हैं। इनके मंडप अद्वितीय वातानुकूलन पद्धति के लिए विख्यात हैं। PC: wikimedia.org

कुंभलगढ़ अभ्यारण्य

कुंभलगढ़ अभ्यारण्य

कुंभलगढ़ आने वाले पर्यटक कुंभलगढ़ अभ्यारण्य को भी घूम सकते हैं। इस अभ्यारण्य में सैलानी चार सींगों वाले हिरन यानी चौसिंघा, काला तेंदुआ, जंगली सूअर, भेडिय़ों, भालू, सियार, सांभर हिरन, चिंकारा, तेंदुओं, लकड़बघ्घे, जंगली बिल्ली, नीलगाय और खरगोश आदि देख सकते हैं। राज्य में केवल इस अभ्यारण्य में ही पर्यटक भेडिय़ों को देख सकते हैं। PC: flickr.com

किले में है 360 मंदिर

किले में है 360 मंदिर

किले के अंदर प्रवेश के लिए सात द्वार बने हुए हैं जिसमें, राम द्वार, पग्र द्वार, हनुमान द्वार आदि प्रसिद्ध है। इस किले के अंदर कुल 360 मंदिरों का समूह है जिसमें 300 जैन मंदिर और 60 हिन्दू मंदिर हैं। इनमें से नीलकंठ महादेव के मंदिर का महत्व अन्य मंदिरों से ज्यादा है।PC: wikimedia.org

कैसे पहुंचे कुम्भलगढ़

कैसे पहुंचे कुम्भलगढ़

पर्यटक आसानी से रेलमार्ग, वायुमार्ग या सडक द्वारा इस स्थान तक पहुँच सकते हैं।

हवाईजहाज द्वारा

कुम्भलगढ़ का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट उदयपुर का महाराणा प्रताप हवाईअड्डा है , विदेशी पर्यटक नई दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से यहाँ पहुँच सकते हैं। यहां से सैलानी टैक्सी या बस द्वारा कुम्भलगढ़ पहुंच सकते हैं। विदेशी पर्यटक नई दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से यहाँ पहुँच सकते हैं।

ट्रेन द्वारा

फालना जंक्शन रेलवे स्टेशन कुम्भलगढ़ के सबसे नज़दीक है। मुख्य भारतीय शहर जैसे मुंबई, अजमेर, दिल्ली, अहमदाबाद, जयपुर और जोधपुर लगातार अन्तराल पर चलने वाली रेल गाड़ियों द्वारा इस स्थान से जुड़े हुए हैं। पर्यटक रेलवे स्टेशन से टैक्सी द्वारा कुम्भलगढ़ पहुँच सकते है।

सड़क द्वारा

निजी एवं सरकारी बसें, उदयपुर, अजमेर, जोधपुर और पुष्कर से कुम्भलगढ़ पहुँचने के लिए उपलब्ध हैं।

कब जायें

कब जायें

कुम्भलगढ़ में साल भर मौसम सामान्य रहता है। हालाँकि कुम्भलगढ़ में अक्टूबर से लेकर मार्च के बीच का सुहाना मौसम पर्यटन के लिए आदर्श समय है। इस समय के दौरान आने वाले पर्यटक कुम्भलगढ़ में पर्यटन स्थलों केभ्रमण का एवं वन्य जीवन का आनंद उठा सकते हैं।

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