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ट्रेवल गाइड:जाने बौद्ध तीर्थ शहर कुशीनगर के बारे में

कुशीनगर महत्‍वपूर्ण बौद्ध तीर्थ शहर है...बुद्धा के समय में कुशीनगर को पहले कुश्वाटी के नाम से जाना जाता था। मल्ल राजाओं की यह राजधानी तब 'कुशीनारा' के नाम से जानी जाती थी।

By Goldi

आज मै आपको अपने आर्टिकल के जरिये बताने जा रहीं हूं उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थल कुशीनगर के बारे में।जोकि गोरखपुर से महज 54 किमी की दूरी पर स्थित है। कुशीनगर महत्‍वपूर्ण बौद्ध तीर्थ शहर है,बौद्ध धर्म के ग्रंथों के अनुसार, गौतम बुद्ध ने अपनी मृत्‍यु के बाद पारिनिर्वाण को हीरान्‍यावती नदी के पास प्राप्‍त किया था। उस कान के दिनों में इस स्‍थल को कुशवटी के रूप में जाना जाता था और महाकाव्‍य रामायण में भगवान राम के पुत्र कुश के नाम के रूप में इसका उल्‍लेख भी मिलता है।

बुद्धा के समय में कुशीनगर को पहले कुश्वाटी के नाम से जाना जाता था। मल्ल राजाओं की यह राजधानी तब 'कुशीनारा' के नाम से जानी जाती थी। पांचवी शताब्दी के अंत तक या छठी शताब्दी की शुरूआत में यहां भगवान बुद्ध का आगमन हुआ था। कुशीनगर में ही उन्होंने अपना अंतिम उपदेश देने के बाद महापरिनिर्माण को प्राप्त किया था।

हालांकि, यह शहर यहां फैली बौद्ध धर्म की जड़ों वजह से ज्‍यादा विख्‍यात है। इस शहर में 3 और 5 वीं शताब्‍दी के कई प्राचीन स्‍तुप और विहार स्थित है। इनमें से अधिकाश: स्‍मारकों को मौर्य सम्राट अशोक के द्वारा तैयार करवाया गया है।
19 वीं सदी में पुर्नविष्‍कार करने से पूर्व, कुशीनगर केवल एक खंडहरों का शहर था, जहां पहले हुए कई हिंसक हमलों के कारण इस शहर को काफी क्षति हुई थी।

कैसे जाये
कुशीनगर तक एयर, रेल और सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।

हवाई जहाज
वाराणसी विमानक्षेत्र यहां का निकटतम प्रमुख हवाई-अड्डा है। दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता और पटना आदि शहरों से यहां के लिए नियमित उड़ानें हैं। इसके अतिरिक्त लखनऊ और गोरखपुर भी वायुयान से आकर यहाँ आया जा सकता है।

ट्रेन द्वारा
कुशीनगर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन गोरखपुर है जोकि कुशीनगर से 52 किमी की दूरी पर स्थित है...यह रेलवे स्टेशन मुख्य शहरों से जुड़ा हुआ है।

बस
कुशीनगर से जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग 28 इसे अन्य प्रमुख शहरों से जोड़ता है। राज्य के प्रमुख शहरों से यहां के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं।
कुशीनगर की प्रमुख शहरों से दूरी-
लखनऊ 323 किमी
गोरखपुर 54 किमी
पटना 233 किमी
गया 330 किमी
वाराणसी 245 किमी

कुशीनगर भ्रमण का सबसे अच्‍छा मौसम
कुशीनगर भ्रमण का सबसे अच्‍छा मौसम नवंबर से मार्च के बीच होता है।

आइये जानते झी कुशीनगर में घूमने की जगहों के बारे में

महापरिनिर्वाण मंदिर,

महापरिनिर्वाण मंदिर,

कुशीनगर में स्थित महापरिनिर्वाण मंदिर का निर्माण 1926 में किया गया था इस मंदिर में भगवान बुद्ध की 6.1 मीटर ऊंची मूर्ति लेटी हुई मुद्रा में रखी है। यह मूर्ति उस काल को दर्शाती है जब 80 वर्ष की आयु में भगवान बुद्ध ने अपने पार्थिव शरीर को छोड़ दिया था और सदा - सदा के लिए जन्‍म और मृत्‍यु के बंधन से मुक्‍त हो गए थे, यानि उन्‍हे मोक्ष की प्राप्ति हो गई थी।PC: wikipedia.org

रामाभर स्तूप

रामाभर स्तूप

15 मीटर ऊंचा यह स्तूप महापरिनिर्वाण मंदिर से लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी पर है। माना जाता है कि यह स्तूप उसी स्थान पर बना है जहां महात्मा बुद्ध को 483 ईसा पूर्व दफनाया गया था। प्राचीन बौद्ध लेखों में इस स्तूप को मुकुट बंधन चैत्य का नाम दिया गया है। कहा जाता है कि यह स्तूप महात्मा बुद्ध की मृत्यु के समय कुशीनगर पर शासन करने वाले मल्ल शासकों द्वारा बनवाया गया था।PC:Manfred Sommer

निर्वाण चैत्य

निर्वाण चैत्य

यह मंदिर महापरिनिर्वाण मंदिर के ठीक पीछे ही बना है, इस विशाल स्तूप को 1876 में कार्लाइल द्वारा खोजा गया था। इस स्तूप की ऊंचाई 2.74 मीटर है। इस स्थान की खुदाई से एक तांबे की नाव मिली है। इस नाव में
खुदे अभिलेखों से पता चलता है कि इसमें महात्मा बुद्ध की चिता की राख रखी गई थी।PC: Tati@

माथाकौर मंदिर

माथाकौर मंदिर

यह मंदिर निर्वाण स्तूप से लगभग 400 गज की दूरी पर है। भूमि स्पर्श मुद्रा में महात्मा बुद्ध की प्रतिमा यहां से प्राप्त हुई है। यह प्रतिमा बोधिवृक्ष के नीचे मिली है। इसके तल में खुदे अभिलेख से पता चलता है कि इस मूर्ति का संबंध 10-11वीं शताब्दी से है। इस मंदिर के साथ ही खुदाई से एक मठ के अवशेष भी मिले हैं।PC: flickr.com

सूर्य मंदिर

सूर्य मंदिर

तमकुही मार्ग पर स्थित है जिसे तुर्कपट्टी के नाम से जाना जाता है, यह स्‍थल कुशीनगर से 17 किमी. की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर का अस्तित्‍व प्राचीन काल के पुराणों, ग्रंथों आदि में मिलता है। यह काफी पुराना मंदिर है। सूर्य मंदिर के बारे में स्‍ंकद पुराण और मार्केंडय पुराण में भी पढ़ा जा सकता है।

चाइनीज मंदिर

चाइनीज मंदिर

चाइनीज मंदिर को लिन सुन चाइनीज मंदिर भी कहा जाता है जो कुशीनगर में निर्मित सबसे आधुनिक मंदिरों में से एक है। यह एक पहला बौद्ध स्‍मारक है जो लोगों का ध्‍यान बरबरस अपनी ओर आकर्षित करता है और इसे शहर के प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता है।यह प्रतिमा ही पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए आकर्षण का एक बड़ा केंद्र है।मुख्‍य मंदिर और बुद्ध भगवान की मूर्ति के अलावा, इस मंदिर का परिसर काफी बड़ा है और यहां कई जगहों व शहरों के बौद्ध मंदिरों के मॉडल का
प्रदर्शन भी किया गया है जिनमें उत्‍तर भारत के राजगीर, बिहार का बोधगया, नेपाल का लुम्बिनी, उत्‍तर प्रदेश के सारावती और निर्वाण मंदिर और कुशीनगर में स्‍तुप शामिल हैं।

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