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गुजरात विधानसभा 2017: तो क्या गुजरात के मंदिर पार लगायेंगे राहुल गाँधी की नैय्या?

Written By: Goldi

इन दिनों गुजरात में विधानसभा चुनाव चल रहा है। जिसमे देश पार्टियां जनता को रिझाने के लिए रैलियां आयोजित कर रहे हैं। गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी कई धार्मिक स्थलों पर जा रहे हैं,और उन्होंने गुजरात के कई मन्दिरों के दर्शन भी किये।

लेकिन, राहुल गांधी का मंदिर-मंदिर घूमना और भगवान के दरबार में माथा टेकना वो भी गुजरात विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, उनकी नि:स्वार्थ भक्ति से ज्यादा स्वार्थ -सिद्धि के तौर पर ही देखी जा रही है। हालांकि यह काम तो सभी करते हैं,फिर चाहे वह राजा हो या रंक..विपत्ति के समय सभी को सिर्फ भगवान ही याद आते हैं। पिछले 22 सालों से कांग्रेस गुजरात में सत्ता के आस-पास फटक भी नहीं पा रही है। इसी आस में राहुल गांधी दानवीर के दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं।

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राहुल गांधी अब तक करीबन 25 मन्दिरों का दौरा कर चुके हैं.. वह सितंबर की आखिर में अपने सौराष्ट्र के दौरे के वक्त द्वारकाधीश के मंदिर गए थे। 11 अक्टूबर को अपने मध्य गुजरात के दौरे के वक्त राहुल गांधी खेड़ा जिले के फागवेल गांव में करीब दो सौ साल पुराने भाथी जी महाराज के मंदिर में जाकर माथा भी टेका था।

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भाथी जी महाराज को लेकर गुजरात के पिछड़े तबके में आस्था मानी जाती है। इसके अलावा राहुल गांधी कागवाड के खोदलधाम, वीरपुर के जलाराम बापा और जसदान के दासीजीवन मंदिर में भी माथा टेक चुके हैं। इसके अलावा राहुल अक्षरधाम मंदिर, नादियाड के शांताराम मंदिर, खेड़ा के रणछोड़ राय मंदिर,पावगढ़ में महाकाली माता मंदिर के भी दर्शन कर चुके हैं।

आइये जानते हैं इन खास मन्दिरों को

द्वारकाधीश मंदिर

द्वारकाधीश मंदिर

द्वारकाधीश मंदिर द्वारका का मुख्य मंदिर है जिसे जगत मंदिर (ब्रह्मांड मंदिर) भी कहा जाता है। किवदंती है कि जगत मंदिर - द्वारकाधीश मंदिर का मुख्य मंदिर लगभग 2500 वर्ष पुराना है और इसका निर्माण भगवान कृष्ण के पड़ पोते वज्रनाभ ने किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध के बाद जब द्वारका जो भगवान कृष्ण का राज्य था, पानी में डूब गई थी तब इस मंदिर का निर्माण किया गया था। यह मंदिर मुलायम चूने के पत्थर का बना हुआ है जिसमें दो द्वार हैं जिन्हें स्वर्ग द्वार और मोक्ष द्वार कहा जाता है जहाँ से भक्त क्रमश: प्रवेश करते हैं और बाहर निकलते हैं। द्वारकाधीश मंदिर आम जनता के लिए सुबह 7 बजे से रात 9:30 बजे तक खुला रहता है। यह दोपहर 12:30 से शाम 5 बजे तक बंद रहता है।PC: Ramkumar TD

अक्षरधाम मंदिर

अक्षरधाम मंदिर

अक्षरधाम गुजरात के महान मंदिरों में से एक है। यह भक्ति, वास्तुकला, कलाकार्यों ओर प्रदर्शनियों का एक दुर्लभ संयोग है। भगवान स्वामीनारायण की मूर्ति इस मंदिर की सैद्धांतिक मूर्ति है। गांधीनगर आने वाले यात्री इस स्मारक और मंदिर की अनूठी सुंदरता को देखने आते हैं। अक्षरधाम की टैगलाइन है-'यह वह स्थान है जहाँ कला चिरयुवा है, संस्कृति असीमित है और मूल्य कालातीत हैं।PC: Harsh4101991

सोमनाथ मंदिर

सोमनाथ मंदिर

सोमनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंग के लिए प्रसिद्ध है। ये पूरे भारत के हिंदूओं के बीच पवित्र और पूजनीय माना जाता है। इस मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में किया गया था और इसमें दो अनुषंगिकों के साथ भगवान सूर्य की प्रतिमा रखी हुई है। यहां के भालुका तीर्थ पर श्री कृष्ण को गलती से एक भील शिकारी ने मार दिया था और देहोत्सर्ग तीर्थ पर भगवान श्री कृष्ण का अंतिम संस्कार किया गया था। ऐसा माना जाता है कि मुख्य मंदिर को स्वंय चंद्रदेव सोम ने सोने से बनवाया था, क्योंकि वह दक्ष प्रजापति के श्रप से मुक्ति पाना चाहता था। इसके बाद इसे सूर्य देवता ने चांदी से और फिर श्री कृष्ण ने इसे लकड़ी से बनवाया। 11वीं शताब्दी में सोलंकी राजपूत ने चलुकयान शैली में पत्थर से एक नए मंदिर का निर्माण करवाया, जिसका शिखर 50 मीटर ऊंचा था।PC: Anhilwara

पावागढ़ महाकाली मंदिर

पावागढ़ महाकाली मंदिर

पावागढ़ चंपानेर के निकट स्थित एक पहाड़ी है और एक ऐसी पहाड़ी है जिस पर प्रसिद्ध महाकाली मंदिर स्थित है।बताया जाता है कि, यहां स्थित मंदिर जगतजननी के स्तन गिरने के कारण इस जगह को बेहद पूजनीय और पवित्र माना जाता है। यहां की एक खास बात यह भी है कि यहां दक्षिण मुखी काली मां की मूर्ति है, जिसकी दक्षिण रीति अर्थात तांत्रिक पूजा की जाती है। नवरात्र के समय इस मंदिर में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ती है। लोगों की यहां गहरी आस्था है। उनका मानना है कि यहां दर्शन करने के बाद मां उनकी हर मुराद पूरी कर देती है..PC:Hardik D.Trivedi

भाथी जी महाराज के मंदिर

भाथी जी महाराज के मंदिर

भाखड़ी महाराज मंदिर भारत में गुजरात राज्य के खेड़ा जिले के फगल गांव का लोक देवता है। वह क्षेत्र के एक प्रख्यात योद्धा-नायक हैं। हिन्दू और मुसलमान समान रूप से उनका सम्मान करते हैं।

दासी जीवन मंदिर

दासी जीवन मंदिर

गोंडल से 6 किलोमीटर की दूरी पर घोघावदार में स्थित है दासी जीवन मंदिर और यह संत दासी जीवन का जन्म स्थान भी है। हर साल यहाँ पर लोग गुजराती नए साल पर इकठ्ठा होते हैं और दासी जीवन के जन्म दिवस को मनाते हैं।PC: Shital Dafda

चामुंडा मंदिर, चोटिला

चामुंडा मंदिर, चोटिला

चामुंडा माताजी मंदिर में चोटिला पहाड़ी की चोटी पर स्थित है सुरेंद्रनगर जिले, राजकोट, गुजरात के पास स्थित है। इस मंदिर तक जाने के लिए करीब 1000 सीढ़ी चढ़नी होती हैं।

रणछोड़दासजी मंदिर

रणछोड़दासजी मंदिर

गुजरात के डाकोर स्थित मंदिर में रणछोड़ जी पश्चिममुखी होकर विराजमान है। एक किले की दीवार से घिरा मुख्य मंदिर डाकोर के मुख्य बाजार के बीच पवित्र झील गोमती के तट के पास स्थित है। मन्दिर का मुख्य गुम्बद 27 मीटर ऊंचा है।

उनई माता मंदिर,नवसारी

उनई माता मंदिर,नवसारी

नवसारी जिले के वसादा तालुका में स्थित उनाई गांव, विभिन्न गर्म पानी जलाशय के लिए लोकप्रिय है। यह माना जाता है कि भगवान राम ने यज्ञ के लिए कई ब्राह्मणों को यहां बुलाया था। ब्राह्मणों के गर्म पानी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए, उन्होंने जमीन में अपने तीर से छेद किया, जिसके परिणामस्वरूप गंगा नदी के गर्म पानी का प्रवाह पैदा हो गया। गांव में यूनानी माताजी मंदिर में अम्बाजी की मूर्ति की स्थापना माता सीता द्वारा की गयी थी।

खोडियार मंदिर

खोडियार मंदिर

खोडियार मंदिर भावनगर में खोडियार झील के तट पर स्थित है। मंदिर अपने सिद्ध देवता, खोडियार मां को समर्पित है और 1911 में बनाया गया था। मंदिर में अक्सर आसपास के इलाकों से पर्यटक आते हैं।

बहुचरा माता का मंदिर

बहुचरा माता का मंदिर

बहुचरा माता का प्रसिद्ध मंदिर गुजरात के मेहसाणा जिले के बेचराजी नामक कस्बे में स्थित है। बहुचरा माता को बेचराजी भी कहा जाता है। यह मंदिर ऊंचे प्राचीर से घिरे हुए एक विस्तृत आंगन के मध्य में स्थित है। मंदिर का मुख्य पीठ बालायंत्र है। देवी का वाहन मुर्गा है। श्रृंगार के बाद माँ बहुचराजी के दर्शन किए जाते हैं। यहां पाषाण या किसी धातु की मूर्ति नहीं है। मंदिर के पीछे की ओर एक वृक्ष के नीचे माता जी का मूल स्थान है। यहां एक स्तंभ और एक छोटा सा मंदिर है। मुख्य मंदिर के सामने एक अग्निकुंड भी बना हुआ है। हर वर्ष यहाँ लाखो श्रद्धालु दूर-दूर से माँ के दर्शन के लिए आते हैं। जिन लोगों को संतान सुख प्राप्त नहीं होता वो विशेष तौर पर माँ के दरबार में माथा टेकने आते हैं जिनके आशीर्वाद से उनको संतान की प्राप्ति होती है।

बाबा जलाराम का मंदिर

बाबा जलाराम का मंदिर

बाबा जलाराम को भगवान राम के कट्टर अनुयायी बहुत मानते है। यह बाबा जलाराम का घर था, जिसे बाद में एक मंदिर में बदल दिया गया, इस मंदिर में बाबा जलाराम की मूर्ति रखी हुई है। यह इस मंदिर की मुख्‍य विशेषता है कि यहां तीर्थयात्रा पर दूर से आएं लोगों से कोई पैसा स्‍वीकार्य नहीं है। यह राजकोट से 53 किमी. की दूरी पर स्थित है।PC:Jethwarp