गुजरात के जामनगर के महाराज दिग्विजय सिंह जडेजा ने कुछ ऐसा काम किया कि उनकी मृत्यु के लंबे अर्से बाद आज भी पोलैंड में उन्हें बड़े ही सम्मान की नज़रों से देखा जाता है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि उनके नाम पर पोलैंड की कई सड़कों का नाम भी रखा गया है और कई परियोजनाएं उनके नाम से चलती हैं।
पर गुजरात के एक महाराज ने ऐसा कौन सा काम कर दिया कि एक यूरोपिय देश पोलैंड ने उन्हें अपने सिर-आंखों पर बैठा लिया? चलिए जानते हैं क्या है तत्कालिन नवानगर (जामनगर का पुराना नाम) के 'जाम साहेब दिग्विजय सिंह जडेजा' का इतिहास।

जामनगर के महाराज दिग्विजय सिंह जडेजा का पूरा नाम दिग्विजय सिंह रणजीत सिंह जडेजा है। वह वर्ष 1933 में जामनगर के महाराज जाम साहेब बने। इससे पहले 1919 से लेकर 1931 तक वह ब्रिटिश सेना में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके थे। उनके महाराज बनने के कुछ सालों बाद ही द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो गया।
हिटलर (जर्मनी) ने पोलैंड पर हमला कर दिया और इस युद्ध में पोलैंड की हालत काफी खराब होने लगी। जब कोई रास्ता नजर नहीं आया तो पोलैंड का एक जहाज, जिसमें 700 से अधिक पोलैंड निवासी (अधिकांश महिलाएं और बच्चे) सवार थे, को लेकर समुद्र के रास्ते निकल पड़ा।

पोलैंड से निकलते वक्त तय किया गया था कि जहाज को जहां शरण मिलेगी, वहीं रूक जाएगा। इतिहासकारों का कहना है कि तुर्की, सेशेल्स, ईरान आदि कई देशों से होता हुआ जहाज भारत की तरफ ही बढ़ रहा था, क्योंकि उसे किसी ने भी शरण नहीं दी थी। ज्यादातर देश जर्मनी के गुस्सा होने से डर रहे थे।
जहाज जामनगर के तट पर पहुंचा और इस बात की जानकारी तत्कालिन जाम साहेब दिग्विजय सिंह जडेजा को हुई। बताया जाता है कि पूरा मामला जानने के बाद उन्होंने यहूदियों को शरण देने का फैसला लिया। उस समय जामनगर ब्रिटिश शासन के अधीन था। इसलिए ब्रिटेन की वॉर कैबिनेट के साथ जाम साहेब को बैठक करनी पड़ी।
बैठक में लंबी बहस के बाद आखिरकार उन्होंने ब्रिटिश सरकार को मना लिया और यहूदी महिलाओं व बच्चों को रहने की जगह दी। कहा जाता है कि जामनगर से लगभग 25 किमी दूर महाराजा दिग्विजय सिंह जडेजा ने उनके रहने की व्यवस्था के साथ-साथ बच्चों के लिए स्कूल की व्यवस्था भी की।

वह पोलैंड के इन शरणार्थियों के साथ उनके हर त्योहार में भी शामिल होते थे। ये शरणार्थी जामनगर में लगभग 9 साल रहे। कहा तो यह भी जाता है कि इन्हीं शरणार्थी बच्चों में एक बच्चा आगे चलकर पोलैंड का प्रधानमंत्री भी बना था।
पोलैंड दे चुका है सर्वोच्य नागरिक सम्मान
लगभग 82 सालों से अधिक लंबा समय बीत जाने के बावजूद पोलैंड में जामनगर के महाराजा दिग्विजय सिंह को आज भी एक हीरो के तौर पर माना जाता है। दिग्विजय सिंह जडेजा का निधन 1966 में हुआ था। पोलैंड ने अपने शरणदाता जाम साहेब दिग्विजय सिंह जडेजा को सर्वोच्य नागरिक सम्मान कमांडर्स क्रास ऑफ द ऑर्डर ऑफ मेरिट से सम्मानित भी किया है। जामनगर के इस महाराज के नाम पर पोलैंड में सड़कें और स्कूल ही नहीं बल्कि कई योजनाएं भी चलाई जाती हैं। पोलैंड में भारत के गुजरात के जामनगर को 'लिटिल पोलैंड' के नाम से जाना जाता है।



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