चुनावों के समय प्रत्याशियों की व्यस्तता बढ़ जाती है। बैंड-बाजे और समर्थकों की पूरी टोली के साथ हर गली-मोहल्ले के हर एक घर का दरवाजा खटखटाकर वोट देने की अपील करते हुए अलग-अलग पार्टी के प्रत्याशियों की तस्वीरें तो चुनावों में आम होती है। लेकिन क्या कभी ऐसा भी हो सकता है कि चुनाव के समय किसी एक गांव में वोट मांगने गये प्रत्याशी को 1 नहीं...2 नहीं...10 भी नहीं बल्कि पूरे 24 राज्यों का चक्कर लगाना पड़ जाए?

जरा सोचिए...उस बेचारे उम्मीदवार की क्या हालत हो जाती होगी...है न। यह सिर्फ एक कल्पना नहीं है जनाब, बल्कि ऐसा सच में होता है। गुजरात के साबरकांठा जिले में स्थित वीरपुर गांव में आने वाला हर व्यक्ति चौंक उठता है।
गुजरात के साबरकांठा जिले में हिम्मतनगर म्यूनिसिपैलिटी के अंतर्गत आता है वीरपुर गांव। यूं तो गुजरात के हर आम गांव की तरह ही है वीरपुर गांव। तो फिर क्यों इस गांव में आने वाले लोग चौंक जाते हैं? दरअसल, लोग गांव में घरों या गली-मुहल्लों के नाम-पता के बारे में जैसे ही सुनते हैं, वे चौंक उठते हैं। इस एक गांव में बसता है मिनी भारत।
यहीं वजह है कि चुनाव के समय जब प्रत्याशी वोट मांगने के लिए इस गांव में कदम रखता है तो उसे देश के '24 राज्यों' का चक्कर लगाना पड़ जाता है। अभी तक नहीं समझे कि आखिर है क्या पूरा माजरा...तो चलिए आपको थोड़ा और विस्तार से बताते हैं।

वीरपुर गांव में अलग-अलग गली-मुहल्लो या यूं कहें सोसायटी बनी हुई है, जिनका नाम भारत के 24 अलग-अलग राज्यों के नाम पर रखा गया है। जी हां, आप सही समझ रहे हैं। अगर आपको पड़ोस वाले मुहल्ले में रहने वाले जिगनेश या हेतल से कोई सामान मंगवाना होगा, तो आपको अपने घर के बच्चों को हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश या उत्तराखंड में जाकर वह सामान लेकर आने के लिए कहना पड़ेगा।
वीरपुर गांव में सिर्फ राज्यों ही नहीं बल्कि केंद्रशासित प्रदेशों के नाम पर भी सोसायटी के नाम रखे गये हैं। यहां किसी सोसायटी का नाम कश्मीर तो किसी का नाम केरल, किसी का मिजोरम तो किसी का असम या हरियाणा है। यहीं वजह है कि जब कोई चुनाव प्रत्याशी वोट मांगने के लिए गांव के अलग-अलग मुहल्लो या सोसायटी में घूमता है तो वह संग-संग में ही इस मिनी भारत के 24 राज्यों के चक्कर भी लगा लेता है।
Read Also :
लॉकडाउन के समय सील की गयी थी राज्यों की सीमाएं

साल 2020 में देशभर में लगे लॉकडाउन वाला समय तो हर किसी ताउम्र याद रहेगा। उस समय जिस तरह हर राज्य को दूसरे राज्य से अलग कर सीमाओं को सील कर दिया गया था, वीरपुर गांव में भी अलग-अलग सोसायटी या यूं कहें मुहल्लों को भी उनकी सीमाओं में ठीक उसी तरह से सील कर दिया गया था। सिर्फ इतना ही नहीं, हर सोसायटी के बाहर गुजराती भाषा में बोर्ड भी लगाया गया था, जिसमें यह कहा गया था 'माफ करना, लॉकडाउन तक इस इलाके को सील किया गया है। कृपया फोन से काम चलाएं।'
है न कितना अनोखा यह गांव!



Click it and Unblock the Notifications














