Halloween Day - ऐसा दिन जब इंसानों में चुड़ैल और भूत बनने की होड़ लग जाती है। हैलोवीन डे, वो दिन होता है जब डरावना बनना भी मजेदार बन जाता है। हैलोवीन की थीम पर पार्टी रखी जाती है जिसमें आने वाले सभी गेस्ट न सिर्फ भूत-प्रेतों की तरह तैयार होकर आते हैं बल्कि उनके लिए खाने-पीने की जिन चीजों की व्यवस्था की जाती है वो भी डरावनी होती है।

लाल रंग के खून जैसा शरबत, आंखों की पुतलियों की तरह दिखने वाली मिठाई और कटी हुई इंसानी ऊंगली की तरह दिखने वाला फिंगर चिप्स। आम दिनों में अगर किसी के सामने इन व्यंजनों को परोस दिया जाए तो वह डर कर भाग खड़ा होगा। पर हैलोवीन फेस्टिवल होता क्या है? भारत में तो भूतों को समर्पित एक दिन होता है जिसे नर्क चतुर्दशी कहा जाता है। क्या हैलोवीन और नरक चौदस या चतुर्दशी में कोई समानता है? हैलोवीन में कद्दू का क्या रोल होता है? कब मनायी जाती है हैलोवीन और क्या है इसका इतिहास?
क्या है हैलोवीन का इतिहास?

हैलोवीन डे मूल रूप से अमेरिका में मनाया जाने वाला एक सांस्कृतिक कार्यक्रम है। इसे अक्टूबर के सबसे आखिरी दिन यानी 31 अक्टूबर को मनाया जाता है। अमेरिका के अलावा इसे इंग्लैंड और दूसरे यूरोपिय देशों में भी मनाया जाता है। लेकिन क्या आपको पता है हैलोवीन की शुरुआत आयरलैंड और स्कॉटलैंड में हुई थी। हैलोवीन का इतिहास 10-50 या 100-200 नहीं बल्कि 2000 से भी अधिक साल पुराना है।
इसकी शुरुआत उत्तरी यूरोपिय देशों में 'ऑल सेंट्स डे' के रूप में हुई थी। उस समय ऑल सेंट्स डे को 1 नवंबर को मनाया जाता था। अब इस दिन को हैलोवीन ईव के नाम से मनाया जाता है। इस उत्सव को मुख्य रूप से पूर्वजों की याद में मनाया जाता है।
क्यों मनाया जाता है हैलोवीन?

भारत में जैसे दिवाली और दशहरा को बुराई पर अच्छाई के प्रतीक और नरक चतुर्दशी को पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान करने वाले दिन के तौर पर मनाया जाता है, हैलोवीन डे को भी ठीक उसी तरह से मनाया जाता है। पश्चिमी सभ्यता की मान्यताओं के अनुसार हैलोवीन के दिन बुरी आत्माएं अच्छी जीवित आत्माओं को परेशान करने के लिए धरती पर आती हैं। इसलिए उस दिन चुड़ैल और डरावने भूतों के गेटअप में लोग तैयार होकर खुद डेविल बनते हैं, जिससे बुरी आत्माएं डर जाएं और अच्छी जीवित आत्माओं के पास ना फटके। बुरी आत्माओं को भगाने के लिए आग जलाकर उसमें जानवरों की हड्डीयां फेंकी जाती है।
वहीं हैलोवीन में बनाया और जलाया जाने वाला कद्दू का लालटेन पूर्वजों का प्रतीक है। इस दिन लोग कद्दू को खोखला करके उसके अंदर मोमबत्ती रखकर घर के बाहर रख देते हैं या किसी पेड़ से लटका देते हैं। कद्दू को काटकर उसका डरावना चेहरा बना दिया जाता है जो अंधेरे में काफी डरावना दिखता है, जिसे हैलोवीन कहा जाता है। यह हैलोवीन ही पूर्वजों का प्रतीक होता है, जिसे त्योहार खत्म होने के बाद मिट्टी में दफना दिया जाता है।
हैलोवीन और कद्दू की कहानी

पश्चिमी देशों में प्रचलित एक लोककथा के अनुसार जैक और आयरिश 2 दोस्त थे। इनमें से जैक कंजूस शराबी तो आयरिश शैतान था। एक बार जैक ने आयरिश को अपने घर पर शराब पिलाने के लिए तो बुलाया लेकिन उसने शराब पिलाने से मना कर दिया। पहले तो जैक ने अपने घर में रखा कद्दू खरीदने पर आयरिश को शराब पिलाने के लिए कहा लेकिन इसके बाद भी उसने शराब पिलाने से इंकार कर दिया।
इसके नाराज होकर आयरिश ने गुस्से में जैक की दी हुई कद्दू में डरावनी शक्ल बनाकर, उसमें जलता हुआ कोयला डालकर उसे अपने घर के बाहर पेड़ पर टांग दिया। बाद में आयरिश की देखा-देखी दूसरे लोगों ने भी जैक-ओ-लालटेन बनाना शुरू कर दिया। तब से इस लालटेन को पूर्वजों की आत्माओं को रास्ता दिखाने वाला और बुरी आत्माओं से उनकी रक्षा करने के प्रतीक के तौर पर जलाया जाने लगा है।
भारत में भी हो रहा है लोकप्रिय

हैलोवीन धीरे-धीरे पश्चिमी देशों की सीमाओं को लांघकर अब भारत में भी काफी लोकप्रिय हो रहा है। खास तौर पर भारत के बड़े शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली, कोलकाता आदि में हैलोवीन के दिन डेविल थीम पार्टी का आयोजन किया जाता है, जिसमें लोग भूतों और चुड़ैलों के डरावने गेटअप में पहुंचते हैं। खास तौर पर मुंबई फिल्म और फैशन इंडस्ट्री में यह फेस्टिवल इन दिनों खूब लोकप्रिय हो रहा है। पश्चिमी देशों में इस दिन बच्चे घर-घर जाकर 'ट्रिक या ट्रिट' मांगते हैं। जवाब में लोग उन्हें ट्रिट बोलकर हैलोवीन की थीम पर ही बना चॉकलेट, कैंडी और केक देते हैं।



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