राम नवमी (17 अप्रैल) के बाद ही भगवान श्रीराम के परमभक्त हनुमान की जयंती (23 अप्रैल) होगी। हमारे देश में पवनपुत्र हनुमान को जीवित देवता के रूप में पूजा जाता है। माना जाता है कि जहां भी श्रीरामचरित मानस का सच्चे मन से पाठ होगा, हनुमान वहां किसी न किसी रूप में जरूर उपस्थित रहेंगे।
ज्योतिष शास्त्र में विश्वास करने वाले लोगों का मानना है कि अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि देव का कोई अशुभ असर पड़ा हो, तो हनुमान जी की कृपा से उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। शनि देव को न्याय का देवता और काफी क्रुर ग्रह कहा जाता है। इसलिए हर व्यक्ति उनसे डरता है। लेकिन...
क्या आप जानते हैं गुजरात में एक मंदिर ऐसा भी है, जहां शनि देव न सिर्फ एक स्त्री रूप में बल्कि हनुमान जी के चरणों में विराज करते हैं!
कहां है हनुमान जी का मंदिर
हनुमान जी का वह अनोखा मंदिर, जहां उनके चरणों में शनि महाराज एक स्त्री के रूप में विराजमान हैं, गुजरात में भावनगर के पास सारंगपुर में मौजूद है। इस मंदिर को कष्टभंजन हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है। मुख्य रूप से हर शनिवार को इस मंदिर में वैसे भक्तों की भीड़ उमड़ती है, जिनकी कुंडली में शनि दोष पाया जाता है।
दूर से देखने पर कष्टभंजन हनुमान मंदिर किसी किले से कम नहीं दिखाई देता है। यहां हनुमान जी सोने के सिंहासन पर विराज करते हैं, जिन्हें महाराजाधिराज के नाम से जाना जाता है।

क्या है इस मंदिर की खासियत
कष्टभंजन हनुमान मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा में ही है। इस मूर्ति के चारों तरफ वानरों की सेना है, जिनका हनुमान जी के आसपास रहना काफी स्वभाविक भी माना जाता है। लेकिन यहां हनुमान जी के चरणों के पास एक स्त्री की मूर्ति बनी हुई है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह स्त्री रूप में शनि महाराज की मूर्ति है। लेकिन शनि महाराज जैसे क्रुर देवता को एक स्त्री का रूप धारण कर हनुमान जी के चरणों में आने के पीछे की कहानी क्या है?
क्या है शनिदेव की कहानी
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में शनिदेव का प्रकोप काफी बढ़ गया था। लोगों को उनकी वजह से काफी दुःख और परेशानियां झेलनी पड़ रही थी। शनिदेव के प्रकोप से बचाने के लिए लोगों ने हनुमान जी से याचना की। बताया जाता है कि तब हनुमान जी ने यह निश्चय किया कि शनिदेव को दंड दिया जाना जरूरी है। जब शनिदेव को इस बात का पता चला तो वे डर गये।
उन्हें इस बात का पता था कि हनुमान बाल ब्रह्मचारी थे और वह स्त्रियों पर हाथ नहीं उठाते थे। इसलिए शनिदेव ने एक स्त्री का रूप धारण किया और हनुमान जी से श्रमा याचना करने लगे। हनुमान जी को यह पता था कि स्त्री रूप में वह शनि महाराज ही थे, लेकिन हनुमान जी ने उन्हें फिर भी क्षमादान दिया। कहा जाता है कि तभी से यह बात प्रचलित हो गयी कि शनिदेव के प्रकोप से एकमात्र हनुमान जी ही किसी व्यक्ति को बचा सकते हैं।

कैसे पहुंचे कष्टभंजन हनुमान मंदिर
कष्टभंजन हनुमान मंदिर अहमदाबाद से 153 किमी की दूरी पर मौजूद है। सुबह 10.30 से 12.30 बजे के बीच अहमदाबाद से सारंगपुर के बीच बसें चलती हैं। इस मंदिर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन बोतड़ स्टेशन है। इसके अलावा भावनगर से भी सारंगपुर आसानी से पहुंचा जा सकता है।



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