हमारे देश में कई शहर ऐसे हैं जिनको वहां से होकर बहने वाली नदियों से ही पहचान मिलती है। जैसे बिहार का शहर पटना - गंगा नदी के किनारे बसे इस शहर की मुख्य धारा से गंगा नदी पूरी तरह से जुड़ चुकी है। ठीक वैसे ही उत्तराखंड का ऋषिकेश और हरिद्वार - इन दोनों शहरों की संस्कृति के साथ भी गंगा नदी रच बस गयी है।
वहीं उत्तर प्रदेश का शहर बनारस - जहां से होकर गंगा नदी के अलावा और भी करीब 10 नदियां गुजरती हैं। इसके अलावा प्रयागराज में तीन नदियों, गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है। ये सभी शहर नदियों के इर्द-गिर्द ही बसे और यहां की संस्कृति भी इन नदियों से ही प्रेरित है।

ठीक उसी प्रकार उत्तर प्रदेश के शहर हाथरस को यहां से होकर बहने वाली नदियों से ही पहचान मिलती है। क्या आप जानते हैं हाथरस से होकर एक या दो नहीं बल्कि 5 नदियां बहती हैं और 4 नहरें भी यहीं से निकलते हैं।
हाथरस से होकर बहने वाली नदियां और यहां से निकलने वाले नहर :
1. करवन नदी अपवाह तन्त्र
2. सेंगर नदी अपवाह तन्त्र
3. काली नदी अपवाह तन्त्र
4. ईशन नदी अपवाह तन्त्र
5. अरिन्द नदी अपवाह तन्त्र
6. माट नहर
7. हाथरस नहर
8. इटावा नहर
9. कानपुर नहर
आइए इन नदियों और नहरों से आपका थोड़ा विस्तार से परिचय करवा दें :
1. करवन नदी अपवाह तन्त्र :-
करवन नदी जनपद की सबसे लम्बी नदी है जो जनपद अलीगढ़ की ओर से इस क्षेत्र में प्रवेश करती है। यह नदी जनपद में 49.47 किमी की लम्बाई में बहती है। यह यमुना की सहायक नदी है तथा पूरे वर्ष भर प्रवाहित होती है।
2. सेंगर नदी अपवाह तन्त्र :-
सेंगर नदी जनपद अलीगढ़ से अध्ययन क्षेत्र की सीमा में प्रवेश करती है। यह जनपद में 43.65 किमी की लम्बाई तय करती है तथा यमुना की सहायक नदी है।
3. काली नदी अपवाह तन्त्र :-
यह नदी सदावाहिनी है किन्तु नौकायान के लिए अनुपयुक्त है। वर्षा ऋतु के अतिरिक्त साल के अन्य समय में इसमें पानी की मात्रा बहुत कम रहती है। किन्तु वर्षा काल में बाढ़ आ जाती है जिससे इसके आसपास की जमीन पर मौजूद खेतों में खड़ी फसलों को क्षति पहुंचती है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने इसके पानी का उत्तम प्रकार से उपयोग करने के उद्देश्य से मुहारा झाल पर एक चेकडैम बनाया है। इससे निकलने वाली नहरों से सिंचाई कार्य होता है। इससे काली नदी का पानी खतरे के निशान के नीचे से प्रवाहित होती है। यह नदी जनपद में 11.06 किमी की लम्बाई तय करती हुई पूर्वी सीमा को छूती हुई निकल जाती है।
4. ईशन नदी अपवाह तन्त्र :-
यह नदी जनपद हाथरस के विकासखण्ड सिकन्दराराऊ के पूर्व स्थित निम्न स्थलों से निकलकर दक्षिण-पूर्व दिशा में बहती है। इसका प्रभाव मार्ग स्पष्ट रूप से निर्मित है। वर्षा काल में इसमें बाढ़ आ जाती है। वर्षा काल के अतिरिक्त अन्य मौसमों में यह सूख जाती है। इसलिए सिंचाई की दृष्टि से इसका कोई महत्व नहीं है। जनपद में इसका मार्ग 12.61 किमी लम्बा है।
5. अरिन्द नदी अपवाह तन्त्र :-
यह नदी अलीगढ़ जनपद के नानऊ गांव से कुछ दूर दक्षिण में स्थित सुहावली-ताल से निकलकर जनपद हाथरस में प्रवेश करती है। इसका प्रवाह मार्ग स्पष्ट रूप से निर्मित है। इसे रेतवा, स्तवा और रिन्द नामों से भी स्थानीय लोग पुकारते हैं। वर्षाकाल में इसके बाढ़ का पानी सैकड़ों हेक्टेयर भूमि को आप्लावित कर देता है।
बाढ़ के दिनों में यह खड़ी फसलों के भारी विनाश का कारण भी बनता है। बारिश के मौसम में यह नदी समीपस्थ ग्रामवासियों के आवागमन में भारी अवरोध उत्पन्न करती है। यह नदी वर्षा के अतिरिक्त वर्ष के शेष समय में सूखी रहती है। इस नदी का प्रवाह मार्ग 21.34 किमी है ।

इन नदियों के अतिरिक्त जनपद में गंगा की नहरें भी प्रवाहित होती हैं जो अपवाह तन्त्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। साथ ही सिंचाई का प्रमुख साधन है। इनका विवरण निम्न प्रकार है :-
1. मॉट नहर :-
मॉट नहर मथुरा जनपद से क्षेत्र में प्रवेश करती है जो जनपद में 18.43 किमी तक विस्तृत है।
2. हाथरस नहर :-
हाथरस नहर जनपद अलीगढ़ से क्षेत्र में प्रवेश करती है। इस नहर का अपवाह क्षेत्र 41.32 किमी का है।
3. इटावा नहर :-
इटावा नहर अलीगढ़ जनपद से क्षेत्र में प्रवेश करती है। जिसका अपवाह क्षेत्र 194 किमी है। यह नहर जनपद से होती हुई एटा जनपद में प्रवेश करती है।
4. कानपुर नहर :-
कानपुर नहर अलीगढ़ से जनपद हाथरस में प्रवेश करती है। इस नहर का प्रवाह 18.82 किमी है ।



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