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तमिलनाडु के कम लोकप्रिय शहर नागरकोइल की सैर

तमिलनाडु के कम लोकप्रिय शहर नागरकोइल के बारे में पढ़ें।

By Namrata Shatsri

तमिलनाडु के नागरकोइल में घुसते ही आपको ठंडी हवाओं के बीच नारियल के पेड़ मिलेंगें और इस शहर में हवा के साथ हमेशा मंदिर की घंटियों की आवाज़ सुनाई देगी। इस शहर में आपको हर जगह कई तरह की आवाज़ें सुनाई देंगीं। मार्केट में मंदिर की घंटियों की आवाज़ के साथ मोलभाव करते लोग, बच्‍चों की हंसी और महिलाओं के पायल की खनक सुनाई देगी।

इस शहर में कॉफी और जैसमीन की खुशबू आपको सड़कों पर फैली मिल जाएगी। नागरकोइल, भारतीय पेनिंसुला के शिखर और पश्चिमी घाट की सीमा पर स्थित है। यही इस स्‍थान का मुख्‍य आकर्षण भी माना जाता है।

इतिहास
नागरकोइल शहर का रंगीन इतिहास है। यहां पर चेरा, चोला और पांड्य वंश के राजाओं का शासन हुआ करता था। नागरकोइल का मतलब होता है नागाओं का मंदिर और इसे यह नाम यहां पर स्थित नागराज मंदिर से मिला है। इस स्‍थान पर आपको सुपार और रबड़ के खेत मिल जाएंगें और यहां पर कन्‍याकुमारी जिले का प्रशासनिक हेडक्‍वार्टर भी है।

नागराज मंदिर

नागराज मंदिर

वासुकि और भगवान कृष्‍ण को समर्पित नागराज मंदिर महेंद्रगिरी पर्वत की तलहटी में स्थित है। मान्‍यता है कि रामायण के अनुसार दस स्‍थान पर नागा रहते हैं। परंपरा के अनुसार इस मंदिर के पंडित नमभूथिरी ब्राह्मण होते हैं जिन्‍हें केरल के पमबुम्‍मेकट्टु द्वारा चुना जाता है। इस स्‍थान पर बड़ी संख्‍या में श्रद्धालु आकर नागराज को हल्‍दी और दूध अर्पित करते हैं और अपनी मनोकामना की पूर्ति हेतु प्रार्थना करते हैं।
PC:Natesh Ramasamy

सैंट जेवियर कैथेड्रल

सैंट जेवियर कैथेड्रल

सन् 1600 में बना रोमन कैथेलिक लैटिन राइट का तीर्थस्‍थल कोट्टर बाज़ार में स्थित है। किवदंती है कि सैंट जेवियर कोट्टर आए थे और उन्‍होंने अपने क्रॉस का प्रयोग कर पदागास के आक्रमण से संपूर्ण वेनाद साम्राज्‍य की रक्षा की थी। उस समय के राजा उन्‍नी केरल वर्मा ने जेवियर को चर्च बनाने के लिए एक स्‍थान दिया था और तभी से यहां पर यह गिरजाघर स्‍थापित है।PC: infocaster

सीएसआई होम चर्च

सीएसआई होम चर्च

एशिया के सबसे प्राचीन और विशाल गिरजाघरों में से एक है होम चर्च। इस गिरजाघर को ग्रीक शिल्‍पकला की शैली में औपनिवेशिक काल के दौरान साल 1819 की शुरुआत में बनाया गया था। इस गिरजाघर को नागराज मंदिर के हाथियों और कैदियों की मदद से विशाल पत्‍थरों से बनाया गया था इसीलिए इसे कालकोयिल और स्‍टोन चर्च भी कहा जाता है।

थानुमलायन मंदिर

थानुमलायन मंदिर

नागरकोइल से 6 किमी दूर शुचिंद्रम में स्थित थानुमालायन मंदिर को स्‍थानुमलायन मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर त्रिदेवों यानि भगवान शिव, ब्रह्मा जी और भगवान विष्‍णु को स‍मर्पित है। इस मंदिर के नाम के अनुसार स्‍थानु का मतलब शिव, माला का अर्थ विष्‍णु और यन का अर्थ ब्रह्मा है।

मंदिर की वर्तमान इमारत को 17वीं शताब्‍दी में बनवाया गया था और यह मंदिर अपनी अद्भुत शैली के लिए लोकप्रिय है। यहां पर 18 फीट लंबे चांर संगीत पिलर भी हैं जिन पर नक्‍काशी की गई है।

PC:Ssriram mt

समुद्रतट

समुद्रतट

नागरकोइल में अनेक समुद्रतट भी हैं जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। मुट्टोम, संगुथुराई, सोथाविलाई, थेकुरूचि और ठेंगापट्टिनत जैसे कुछ लोकप्रिय समुद्रतट हैं। मुट्टोम बीच पर समुद्र से निकलते हुए पत्‍थर इस तट का मुख्‍य आकर्षण है।PC:Rafimmedia

कैसे पहुंचे

कैसे पहुंचे

वायु मार्ग : नागरकोइल से 73 किमी की दूरी पर स्थित तिरुवंद्रम एयरपोर्ट सबसे निकटतम हवाई अड्डा है। इस एयरपोर्ट पर प्रमुख शहरों जैसे बेंगलुरु, चेन्‍नई, मुंबई और दिल्‍ली से फ्लाइइट आती हैं। यहां पर कुछ अंतर्राष्‍ट्रीय फ्लाइट भी आती हैं।

रेल मार्ग : यहां का समीपतम रेलवे स्‍टेशन नागरकोइल जंक्‍शन है जोकि देश के प्रमुख शहरों और राज्‍यों से अच्‍छी तरह से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग : नागरकोइल शहर में तिरुवंद्रम, कन्‍याकुमारी और अन्‍य बड़े शहरों और राज्‍यों से बस सुविधा मिलती है।PC:w:user:PlaneMad

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