
महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जहां के किले इस राज्य की ऐतिहासिक कहानियों को तो बयां करते ही हैं साथ ही ट्रैकर्स के लिए भी परफेक्ट माने जाते हैं। इतिहास प्रेमी और ट्रैकर महाराष्ट्र के पहाड़ी किलों में खूब आते हैं और आप भी यहां के ऐतिहासिक शानदार किले देखकर अचंभित रह जाएंगें। महाराष्ट्र राज्य में मराठों का शासन रहा है और राज्य के अधिकतर किले इन्हीं से संबंधित हैं।
महाराष्ट्र की पहाडियों में ही एक और खूबसूरत एवं शानदार किला स्थित है जिसका नाम है तोरणा किला। पुणे जिले में स्थित तोरणा किला पिछले कुछ सालों में ट्रैकर्स के बीच बहुत लोकप्रिय हुआ है। हालांकि, यहां पर पर्यटन के समय में इतिहास प्रेमियों की भी खूब भीड़ रहती है। तो चलिए जानते हैं मराठों के इस खूबसूरत किले के बारे में।

तोरणा किले आने का सही समय
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मौसम और खूबसूरत वातावरण की वजह से सालभर तोरणा किले में ऑफबीट ट्रैवलर्स का जमावड़ा लगा रहता है। हालांकि, ट्रैकर्स यहां मानसून के बाद आना पसंद करते हैं, क्योंकि इस समय हरियाली ये घिरे इस किले के आसपास का मौसम ठंडा और सुहावना हो जाता है।
अगर आप पहाड़ों पर ट्रैक करना चाहते हैं और इस किले के इतिहास के बारे में जानना चाहते हैं तो तोरना किले आने का सबसे सही समय अक्टूबर से लेकर मार्च के अंत तक का है।

तोरणा किले का इतिहास
PC- Amogh Sarpotdar
4603 फीट की ऊंचाई पर स्थित तोरणा किला पुणे जिले का सबसे ऊंचा किला माना जाता ह। इसलिए कई ट्रैकर्स और कैंपर्स यहां आना पसंद करते हैं। ये जगह प्राकृतिक सौंदर्य से सराबोर है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार तोरना किले को 13वीं शताब्दी में भगवान शिव के उपासक ने बनवाया था। हालांकि, जब 17वीं शताब्दी के दौरान मराठा शासक शिवाजी ने इसे जीत लिया, तो यह मराठा साम्राज्य का केंद्र बन गया।
इसलिए ये कहा जा सकता है मराठा साम्राज्य का उदय तोरना किले के आसपास ही हुआ है। हालांकि, बाद में इस पर मुगल साम्राज्य का कब्जा बन गया, लेकिन पेशवाओं और मुगलों द्वारा एक सिद्धांत पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद इसे मराठों को वापस कर दिया गया।

क्यों आएं तोरणा किला
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अगर आपको पहाड़ों पर चढ़ना पसंद है और आप मराठा साम्राज्य के इतिहास के बारे में जानना चाहते हैं तो आपकी ये दोनों ही इच्छाएं एकसाथ तोरना किले पर पूरी हो सकती हैं। इतिहास प्रेमियो और ट्रैकर्स के लिए पुणे का तोरणा किला परफैक्ट है। शहर की भागदौड़ से दूर तोरना की हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच मन को बहुत सुकून मिलेगा। ट्रैकिंग और इतिहास के बारे में जानने के अलाववा आप यहां की ठंडी हवाओं और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद भी ले सकते हैं।
तोरना किले के आसपास आप राजगढ़ का किला, राजगढ़, सिंहाबाद और पुरंदर किला भी देख सकते हैं। इतिहास और प्रकृति से प्रेम रखने वाले पर्यटकों को इस जगह पर जरूर आना चाहिए। सबसे खास बात तो ये है कि यहां पर आप ट्रैकिंग का भी भरपूर मज़ा ले सकते हैं।

कैसे पहुंचे तोरणा किला
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वायु मार्ग द्वारा : हवाई यात्रा द्वारा तोरणा किला जाना चाहते हैं तो पुणे एयरपोर्ट पर उतरें और फिर यहां से तोरणा किले के लिए कैब बुक करें। एयरपोर्ट से किले की दूरी महज़ 60 किमी है और इस सफर में लगभग 1 घंटा 30 मिनट का समय लग सकता है।
रेल मार्ग द्वारा : निकटतम रेलवे स्टेशन पुणे में स्थित है जोकि 52 किमी दूर है। स्टेशन पहुंचने के बाद आपको तोरना किले के लिए टैक्सी करनी पड़ेगी।
सड़क मार्ग द्वारा : तोरना किले का क्षेत्र आसपास के शहरों और गांवों से सड़क द्वारा जुड़ा हुआ है और इसलिए आप सड़क मार्ग से सीधा तोरना किले पहुंच सकते हैं।



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