आज हम बात करने जा रहे हैं भारत की सबसे स्वच्छ नगरी इंदौर की.. जो मध्य प्रदेश में सबसे अधिक आबादी वाला जिला होते हुए भी ये शहर अपनी इसी सफाई के लिए जाना जाता है। पिछले 6 साल से ये शहर इस लिस्ट में टॉप पर बना है। क्षिप्रा नदी की सहायक नदियों सरस्वती और कान (खान) यहां से गुजरती हैं। इस शहर का सम्बन्ध मौर्य काल से भी बताया जाता है। शहर में खुदाई के दौरान तत्कालीन वंश से संबंधित अवशेष भी मिले हैं। इस शहर का रामायण काल से भी संबंध बताया जाता है।
इंदौर का पौराणिक काल से संबंध
इंदौर का पौराणिक काल से संबंध बताया जाता है। शहर के पास में स्थित सांवेर में स्थित 'पाताल विजय हनुमान मंदिर' है। इस मंदिर में हनुमान जी उल्टी प्रतिमा स्थित है। कहा जाता है कि रामायण काल में जब अहिरावण भगवान श्रीराम व लक्ष्मण जी को पाताल उठाकर ले गया था, तब हनुमान जी ने इसी रास्ते जाकर अहिरावण का वध किया और प्रभु श्रीराम व लक्ष्मण जी को बचा कर लाए। यही कारण है कि मंदिर में स्थापित हनुमान जी की मूर्ति उल्टी है।

इंदौर का मौर्य काल से संबंध
कहा जाता है कि इंदौर का इतिहास करीब 2300 साल पुराना है। इसका संबंध मौर्य काल से बताया जाता है। कुछ साल पहले जब खुदाई की गई तो यहां से मौर्य काल से संबंधित कई अवशेष मिले थे। ऐसे में माना जाता है कि प्राचीन समय में इस शहर पर मौर्य का शासन था और वे यहां के राजा थे। लेकिन उसके बाद ये क्षेत्र कई शाताब्दियों तक जनविहीन रहा।
इंदौर का प्राचीन इतिहास
इंदौर का इतिहास तो हजारों सालों पुराना है, इसका जिक्र पौराणिक काल में भी किया गया है और मौर्य काल से भी इसका संबंध बताया जाता है। लेकिन अगर इतिहास में लिखित आधार पर देखा जाए तो इसका इतिहास करीब 300 साल पहले से बताया गया है। इस शहर की स्थापना 3 मार्च 1716 ईस्वी को राव राजा नंदलाल मंडलोई ने की थी, जो एक जमींदार थे। हालांकि, 16वीं शाताब्दी में दक्कन और दिल्ली के बीच व्यापारिक केंद्र के रूप में भी इंदौर का जिक्र किया गया है। 1741 ईस्वी में शहर में इंद्रेश्वर मंदिर का निर्माण किया गया, जिसके नाम पर ही इस शहर का नाम इंदौर पड़ा। इसे पहले इंद्रपुर और फिर इंदूर के नाम भी जाना जाता था।

18 मई 1724 ईस्वी को यहां मराठा साम्राज्य ने अपना अधिकार जमाया और 1733 ईस्वी में बाजीराव पेशवा ने इंदौर को मल्हारराव होल्कर को पुरस्कार के रूप में दे दिया। फिर मल्हारराव ने ही मालवा के दक्षिण-पश्चिम भाग में अधिपत्य हासिल कर होल्कर वंश की नींव रखी और इंदोर को अपनी राजधानी बनाया। वंश के दो अयोग्य शासकों के बाद इस वंश की तीसरी शासिका अहिल्याबाई होल्कर (1756-95 ईस्वी) बनीं, जो मल्हारराव की पुत्रवधु थीं। इन्होंने देश के कई मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया, इनमें प्रमुख - बनारस का काशी विश्वनाथ मंदिर (1780 ईस्वी) व गुजरात का सोमनाथ मंदिर..।
इंदौर का मुगलों से संबंध
करीब 300 साल पहले राव राजा नंदलाल मंडलोई ने इस शहर को टैक्स फ्री जोन बनाया था और ये मुगल बादशाह के फरमान से ही हुआ था।

ब्रिटिश काल में इंदौर
साल 1818 में तीसरे आंग्ल मराठा युद्ध के दौरान महिदपुर की लड़ाई में होल्कर वंश ब्रिटिश से हार गया। लेकिन तात्या जोग के प्रयासों के कारण होल्कर ने इंदौर पर शासन जारी रखा। 1875 ईस्वी में यहां रेलवे की शुरुआत हुई थी। वहीं, साल 1906 में शहर में बिजली की आपूर्ति शुरू की गई और 1909 ईस्वी में फायर ब्रिगेड स्थापित किया गया।
इंदौर के प्रसिद्ध त्योहार
1. भगोरिया त्यौहार
2. रंगपंचमी
जोधपुर में घूमने लायक स्थान
1. राजवाड़ा - (होलकर राजवंश के शासकों की ऐतिहासिक हवेली)
2. महात्मा गांधी हॉल - (इसे 1904 में निर्मित करवाया गया था, जिसका नाम किंग एडवर्ड हॉल रखा गया था)
3. लाल बाग महल - (महल का निर्माण महाराजा शिवाजी राव होलकर ने करवाया था)
4. केंद्रीय संग्रहालय
5. खजराना गणेश मंदिर - (मंदिर का निर्माण अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था। मंदिर में स्थापित मूर्ति स्वयंभू मानी जाती है)
6. मांडू का किला - (भारत का सबसे बड़ा किला माना जाता है)
7. रालामंडल वन्यजीव अभयारण्य
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