आखिरकार हैदराबाद की प्रसिद्ध लाख की चूड़ियों को GI (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) टैग मिल गया। पिछले 2 सालों से चल रहा सस्पेंस 2 मार्च को खत्म हो गया जब चेन्नई के ज्योग्राफिकल इंडिकेशन ने लाख की चूड़ियों के लिए हैदराबाद को GI टैग दे दिया।
हैदराबाद के क्रिसेंट हैंडीक्राफ्ट आर्टिसंस वेलफेयर एसोसिएशन ने जून 2022 को हैदराबाद की लाख की चूड़ियों को GI टैग प्रदान करने के लिए आवेदन किया था। इस बाबत आधिकारिक रूप से सर्टिफिकेट भी जारी किया जाएगा।

हैदराबाद में लाख की चूड़ियों का इतिहास काफी पुराना माना जाता है। यहां लाख की चूड़ियां बनाने का काम कब से शुरू हुआ, इस बाबत कोई स्पष्ट जानकारी तो उपलब्ध नहीं है। लेकिन इतिहासकारों का मानना है कि हैदराबाद में लगभग 300 से 350 साल पहले पहली बार कुतुब शाही के समय में लाख की चूड़ियां बनायी गयी थी। हैदराबाद में लाख की चूड़ियों का सबसे फेमस मार्केट लाड बाजार है।
यह मार्केट चारमीनार के पास ही मौजूद है। गोलकोंडा किले तक का रास्ता इस मार्केट से होकर गुजरता था, इसलिए इस रास्ते को ही लाख की चूड़ियों के मार्केट के तौर पर चुना गया था। इतिहासकारों का कहना है कि सबसे पहले जब लाख की चूड़ियां बनायी जाती थी, तब उसमें असली हीरे का इस्तेमाल किया जाता था। समय के साथ-साथ बाद में लाख की चूड़ियों में सामान्य पत्थरों का प्रयोग किया जाने लगा।

लाख की चूड़ियों के लिए हैदराबाद को GI टैग देने का आवेदन करने वाले आवेदनकारी शुभजीत साहा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि लोकसभा चुनावों के बाद इसका सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया जाएगा।
हैदराबाद की इस खास चीज को भी मिला है GI टैग
लाख की चूड़ियों से पहले हैदराबाद की हलीम को भी GI टैग प्रदान किया जा चुका है। साल 2010 में हैदराबाद को हलीम के लिए GI टैग दिया गया था। उस समय यह साबित किया गया था कि हैदराबाद में हलीम का जो मार्केट है, भारत में और किसी भी शहर में ऐसा मार्केट नहीं है। साल 2019 में यह टैग एक्सपायर भी हो गया था जिसे फिर से रिन्यू किया गया था।

एक बार रिन्यू होने के बाद यह GI टैग अगले 10 सालों के लिए वैध हो गया था। साल 2022 में हैदराबाद की हलीम ने सबसे लोकप्रिय GI टैग का खिताब जीता था। इस प्रतियोगिता की फूड श्रेणी में कोलकाता का रसगुल्ला, बिकानेरी भुजिया, रतलामी सेव आदि भी थे, जिन्हें हराकर हैदराबाद के हलीम ने सबसे लोकप्रिय GI का खिताब फूड श्रेणी में जीता था। इस प्रतियोगिता का आयोजन वाणिज्य मंत्रालय ने किया था।



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