हैदराबाद, सिटी ऑफ निज़ाम की भीड़भाड़ से दूर किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं, जहां कुछ पल बैठकर उसकी खूबसूरती का दीदार कर सकें। ऐसी खूबसूरती जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल होता है...तो चले आइए हैदराबाद के चार मीनार से बस थोड़ी दूरी पर ही मौजूद पैगाह मकबरा पर।
यह ऐसी जगह है जिसके बारे में पर्यटकों को काफी कम ही पता होता है और यहीं वजह है कि इस दौड़ते-भागते शहर में इतनी सुन्दर कलात्मक जगह होने के बावजूद यहां आपको शांति मिलेगी।

पैगाह मकबरा चुना और गारे से बनाया हुआ है जिसपर संगमरमर की सुन्दर नक्काशी की गयी है। ये मकबरे करीब 200 साल पुराने पैगाह रईसों की कई पीढ़ियों का अंतिम विश्राम स्थल है। पैगाह मकबरा एक कब्रिस्तान है, जिसमें पैगाह रईसों की कुल 27 कब्रें हैं। शायद आपको पता भी नहीं होगा कि यहां आपको ताजमहल में मुमताज महल के मकबरे की प्रतिकृति भी देखने को मिल जाएगी। आगे हम आपको बताएंगे कि पैगाह रईस वास्तव में कौन थे और इन मकबरों की और क्या खासियतें हैं।

कौन थे पैगाह
पैगाह हैदराबाद के सबसे कुलीन परिवार थे, जिन्हें इस्लाम के दूसरे खलीफा उमर बिन अल-खत्ताब के वंशज माना जाता है। पैगाह, निज़ामों के वफादार हुआ करते थे और ये निज़ामों की बेटियों से शादी करते थे। निज़ामों के अधीन राजनेता, जनरल के रूप में पैगाह परिवार के सदस्य ही काम करते थे। हैदराबाद रियासत में पैगाह ही एकलौते ऐसे लोग थे, जिन्हें सुल्तानों ने निजी सेना रखने की अनुमति दी थी। हैदराबाद में चार मीनार के पास एक छोटी गली में संतोष नगर के पास ओवैसी अस्पताल के पास मौजूद है पैगाह कब्रगाह।

शानदार है यहां की भारतीय-अरबी वास्तुकला
30-40 एकड़ के क्षेत्र में फैले इस कब्रगाह में कुल 27 संगमरमर के मकबरे हैं। मकबरों पर किया गया बारीक काम और इनकी दीवारों और खंभों पर की गयी जटिल नक्काशी देखने लायक होती है। सुबह और शाम के समय जब दीवारों पर बनी जालियों से छनकर सूर्य की रोशनी संगमरमर पर आती है तो वह कई तरह के पैटर्न बनाती है। कहा जाता है कि इस कब्रगाह की शुरुआत 18वीं सदी के अंत में हुई थी।

कब्रगाह में पर्यटकों की सबसे ज्यादा भीड़ असमान जाह और बेगम खुर्शिद जाह के कब्र पर होती है। कहा जाता है कि बेगम खुर्शिद जाह, जो 5वें निज़ाम की बेटी थी, का मकबरा ताजमहल में मुमताज महल के मकबरे की प्रतिकृति है। मकबरे पर कई तरह के कीमती पत्थर जड़े हुए हैं, जो मौसम के अनुरुप अपना रंग बदलते हैं। कब्रगाह की हर दीवार पर कई तरह के फल, फूल, फूलदान, बेल-पत्तों और भी कई तरह की नक्काशियां की गयी हैं।
कब्रगाह में कोई प्रवेश शुल्क नहीं लगता है। हैदराबाद में जब भी जाएं तो थोड़ा समय निकाल कर चारमीनार के पास मौजूद इस शानदार कब्रगाह में कुछ पल जरूर बिताएं।



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