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Independence Day Special : Then and Now - कोलकाता के 5 प्रसिद्ध स्मारक व इमारतें

15 अगस्त 2024 को भारत आजादी के 77 साल पूरे होने का जश्न मनाएगा। आजादी के इस जश्न के मौके पर हम आपको भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक जगहों के बारे में पिछले कई दिनों से जानकारी दे रहे हैं। इसी क्रम में आज हम बात करने वाले हैं City Of Joy - कोलकाता के बारे में। हम सभी जानते हैं ब्रिटिश काल में कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) ही भारत की राजधानी हुआ करती थी।

कोलकाता शहर में आज भी ब्रिटिश शासनकाल की छाप देखने को मिलती है। कोलकाता में कई ऐसे स्मारक व इमारतें हैं जिनका निर्माण भारत की आजादी (1947) से पहले हुआ था। उस समय इन स्मारकों व इमारतों का निर्माण किसी और मकसद से किया गया था लेकिन आज कोलकाता की उन इमारतों का उपयोग किसी और काम में किया जाता है।

victoria memorial kolkata

आइए देख लेते हैं भारत की आजादी के पहले बनी स्मारकों या इमारतों में आजादी के बाद आए बदलाव 'कोलकाता - Then And Now Since 1947'

विक्टोरिया मेमोरियल

Then - विक्टोरिया मेमोरियल आज कोलकाता की पहचान बन चुका है। 64 एकड़ के क्षेत्र में फैले विक्टोरिया मेमोरियल का निर्माण वर्ष 1906 में प्रिंस ऑफ वेल्स ने करवाया था। इसका निर्माण महारानी विक्टोरिया की मृत्यु (1901) के बाद उनकी याद में किया गया था। दावा किया जाता है विक्टोरिया मेमोरियल किसी भी सम्राट अथवा साम्राज्ञी को समर्पित सबसे विशाल स्मारक है।

Now - वर्तमान में विक्टोरिया मेमोरियल कोलकाता का एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन चुका है। कोलकाता घूमने आने वाला हर सैलानी यहां घूमने जरूर जाता है। विक्टोरिया मेमोरियल के अंदर म्यूजियम भी है जहां महारानी विक्टोरिया से जुड़ी विभिन्न वस्तुओं को प्रदर्शित किया जाता है। इसके अलावा भी यहां देखने लायक काफी कुछ देखने लायक है।

फोर्ट विलियम

fort william

Then - हुगली नदी के पूर्वी तट पर स्थित फोर्ट विलियम का निर्माण 1696 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा किया गया था। उस समय इसे एक विशाल फोर्ट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था, जहां मूल रूप से मिलीट्री के जवान रहते थे।
Now - आज भी फोर्ट विलियम भारतीय सेना का ही हिस्सा है। इसका इस्तेमाल भारतीय सेना ने पूर्वी कमांड मुख्यालय के रूप में किया जाता है। हालांकि यह एक स्मारक ही है, लेकिन इसके अंदर प्रवेश करने के लिए पर्यटकों को काफी कड़े पहरे से गुजरना पड़ता है। साथ ही फोर्ट विलियम के हर हिस्से में पर्यटकों को जाने की अनुमति भी नहीं दी जाती है।

राइटर्स बिल्डिंग

righter s building

Then - वर्ष 1690 के शुरुआत में अंग्रेजी हुकूमत के दौरान कोलकाता में राइटर्स बिल्डिंग का निर्माण किया गया था। पता है, कोलकाता की पहली तीन मंजिला इमारत भी राइटर्स बिल्डिंग ही थी। अपने नाम के अनुरुप इस बिल्डिंग का निर्माण ईस्ट इंडिया कंपनी के जूनियर राइटर्स (Writers) के रहने के लिए किया गया था।
Now - वर्तमान में राइटर्स बिल्डिंग को 'महाकरण' के नाम से भी जाना जाता है। किसी जमाने में इस इमारत का इस्तेमाल पश्चिम बंगाल सरकार के जरूरी दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड्स को रखने के लिए बतौर रिकॉर्ड रूम किया जाता था, लेकिन बाद में यह काम नवान्न में होना शुरू होने के बाद अब राइटर्स बिल्डिंग एक ऐतिहासिक इमारत भर बनकर रह गयी है।

निजाम पैलेस

nizam palace

Then - कोलकाता का एक प्रमुख लोकेशन। निजाम पैलेस का निर्माण 19वीं सदी के शुरुआत में किया गया था। माना जाता है कि इस बंगले का निर्माण जे.सी. गलस्तौं ने अपनी पत्नी की याद में करवाया था जिसका नाम उस वक्त 'गलस्तौं पार्क' रखा गया था। वर्ष 1933 में हैदराबाद के 7वें निजाम मीर ओस्मान अली खान ने इसे गस्तौं से कोलकाता में अपने निवास बनाने के लिए खरीदा था। कहा जाता है कि किंग एडवर्ड VIII भी इस बंगले पर आए थे। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस बंगले का इस्तेमाल अस्पताल के रूप में किया गया था।
Now - अब निजाम पैलेस एक सरकारी ऑफिस के रूप में इस्तेमाल होता है। निजाम पैलेस में मुख्य रूप से CBI का मुख्यालय है जहां अक्सर पुछताछ के लिए अपराधियों या संदेहास्पद व्यक्तियों को CBI के अधिकारी बुलाते हैं।

शहीद मीनार

shaheed minar kolkata

Then - वर्ष 1828 में नेपाल पर अपनी जीत के प्रतीक के तौर पर सर डेविड ऑक्टरलॉनी ने इस मीनार का निर्माण करवाया था। 48 मीटर ऊंचे शहीद मीनार को ऑक्टरलॉनी मॉन्यूमेंट के रूप में भी जाना जाता है।
Now - अब शहीद मीनार एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। कोलकाता के मैदान इलाके में स्थित शहीद मीनार परिसर और इसके आसपास के क्षेत्र को विभिन्न मुद्दों पर विरोध-प्रदर्शन या धरना मंच के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा यहां शदीहों को श्रद्धांजलि भी दी जाती है।

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