जंगलों में कई तरह के जानवर होते हैं जिन्हें देखकर हम आश्चर्यचकित रह जाते हैं। लेकिन क्या आप किसी हाथी अथवा हथिनी के बारे में सुनकर आश्चर्यचकित हुए हैं? नहीं ना...तो चलिए हम आपको भारत में रहने वाली एक हथिनी के बारे में बताते हैं जिसका नाम सुनते ही आप चौंक उठेंगे।

मध्य प्रदेश में रहने वाली हथिनी वत्सला के बारे में जानते हैं आप? नहीं जानते...कोई बात नहीं हम आपको बता देते हैं। वत्सला दुनिया की सबसे अधिक उम्रदराज हथिनी है। वत्सला की आयु 100 साल से ज्यादा हो चुकी है।
बना चुकी है रिकॉर्ड
वत्सला मध्य प्रदेश के पन्न टाइगर रिजर्व में रहती है। पिछले साल पन्ना टाइगर रिजर्व के फॉरेस्ट ऑफिसर सुशांत नंदा ने ट्वीट कर वत्सला के बारे में लोगों को जानकारी दी थी। उन्होंने अपने ट्वीट में उस वक्त लिखा था कि वत्सला 100 साल से ज्यादा समय तक जिंदा रहकर रिकॉर्ड कायम किया है। वत्सला की आयु लगभग 106 साल है। उससे पहले सबसे अधिक आयु तक जीने का रिकॉर्ड Changalloor के नाम था जो 89 सालों तक जिंदा रहा। अपने ट्वीट में उन्होंने बताया कि वत्सला ने बाघों की निगरानी में काफी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि वत्सला एक पालतु हथिनी है।

बता दें, चेंगालोर दक्षिणायनी की मृत्यु साल 2019 में हुई थी, जो एशिया का सबसे उम्रदराज हाथी था और उसने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया था। उसे 'गज मुथस्सी' यानी हाथी दादी के नाम से पुकारा जाता था, जो केरल के चेंगलोर महादेव मंदिर में आयोजित होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लेती थी।
कहां हुआ था वत्सला का जन्म
वत्सला के जन्म के संबंध में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। उसके बारे में केवल इतना ही पता है कि वत्सला का जन्म केरल के निलांबर के जंगलों में हुआ था, जहां वह लगभग 55 सालों तक रही। इसके बाद उसे बोरी लाया गया। बोरी में वह 1991 तक जंगलों से लकड़ी ढोने का काम करती थी। बोरी के जंगलों में किसी नर हाथी के नहीं होने के कारण वत्सला वहां कभी गर्भवती नहीं हुई। बोरी में वत्सला गीता नाम की एक हथिनी के काफी करीबी थी। निलांबर के जंगलों में भी वत्सला कभी गर्भवती क्यों नहीं हुई, इस बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कितने साल जीते हैं हाथी
हाथियों की औसत आयु 50 से 70 साल मानी जाती है। जो हाथी दीर्घायु होते हैं उनकी आयु 82 साल तक दर्ज की गयी है। लेकिन वत्सला इन सभी रिकॉर्ड्स को तोड़कर 106 सालों तक जीने का रिकॉर्ड कायम कर चुकी है।
- एशियाई हाथी - 48 साल
- अफ्रिकी हाथी - 60-70 साल
खो चुकी है अपनी आंखें

वत्सला पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की निगरानी, पर्यटकों को अपने पीठ पर ढोना और सामानों को ढोने का काम करती थी। साल 2010 में वत्सला रिटायर हुई। वत्सला की आंखों में मोतियाबिंद हो चुका है, इस वजह से उसने अपनी आंखों की रोशनी खो दी है। वत्सला की देखरेख करने वाले वन्य प्राणी चिकित्सक डॉक्टर संजीव कुमार गुप्ता का कहना है कि वत्सला की उम्र 100 साल से अधिक हो चुकी है जिसका असर उसके शरीर व अन्य अंगों पर पड़ने लगा है। वह पन्ना टाइगर रिजर्व के हाथी कैंप में अपनी लंबी सूंड और कुनबे के दूसरे हाथियों के सहारे घूमा-फिरा करती है। उसके दूसरे हाथी भी अपने कुनबे की बुजूर्ग सदस्य का अच्छी तरह से ख्याल रखते हैं। वत्सला के स्वास्थ्य की नियमित रूप से जांच की जाती है और उसे ऐसा आहार ही दिया जाता है जो आसानी से पच जाए। हाथियों के आंखों का लेंस अभी तक नहीं बन पाया है, इस वजह से वत्सला की आंखों का इलाज नहीं हो पा रहा है।
किसी धरोहर से कम नहीं है वत्सला
वत्सला ना सिर्फ दुनिया की सबसे अधिक उम्र तक जीने वाली हथिनी है, बल्कि उसने दो-दो बार मौत को भी चकमा दिया है। जानकारी के मुताबिक टाइगर रिजर्व में ही रहने वाले नर हाथी से वत्सला को ना जाने किस बात का बैर था। साल 2003 और 2008 में दो बार उसने वत्सला पर जानलेवा हमला किया था। दोनों बार वत्सला गंभीर रूप से घायल हो गयी थी। नर हाथी ने अपने नुकीले दांतों से वत्सला का पेट चीर डाला था लेकिन बेहतर उपचार के कारण दोनों बार वत्सला की जान बचा ली गयी। वत्सला को पन्ना टाइगर रिजर्व ही नहीं बल्कि दुनिया भर के लिए एक धरोहर कहा जा सकता है।
हमारी यहीं प्रार्थना है कि वत्सला यूं ही स्वस्थ और दीर्घायु बनी रहे।



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