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ये हैं भारत की प्राकृतिक-रहस्मयी जगहें..

भारत में कुछ ऐसी जगहें भी मौजूद है, जो अपने आप में एक रहस्यमयी है, जिन्हें देखने के बाद उनके बारे में जानने की दिलचस्पी और भी बढ़ जाती है।

By Goldi

इसके अलावा यहां कुछ ऐसी जगहें भी मौजूद है, जो अपने आप में एक रहस्यमयी है, जिन्हें देखने के बाद उनके बारे में जानने की दिलचस्पी और भी बढ़ जाती है।

आज मै आपको कुछ ऐसी ही रहस्यमयी चीजों के बारे में बताने जा रहीं हूं जो अपने अंदर काई राज समेटे हुए हैं..लेकिन ये जगहे हैं बेहद ही खूबसूरत, एक बार जिन्दगी में इन जगहों की आपको सैर जरुर करनी चाहिए।

हवेली, चुरू, राजस्थान

हवेली, चुरू, राजस्थान

राजस्थान अपने समृद्ध विरासत शाही महल और रियासतों के लिए मशहूर है। राजस्थान में एक ऐसी ही जगह है चुरू जोकि ऐतिहासिक दृष्‍टि से काफी महत्वपूर्ण है।यह जगह प्रमुख रूप से हवेली, मंदिर और किलों के लिए जानी जाती है। जयपुर से सिर्फ़ 200 किलोमीटर की दूरी पर चुरू की आश्चर्य चकित करने वाली हवेलियां हैं, जो वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे ग्रैंड हवा महल के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें 1,111 दरवाजे और खिड़कियों के साथ-साथ चमकीले रंगों से रंगी कई दीवारें हैं।PC: Apar Singh Bataan

सिजु गुफा, मेघालय

सिजु गुफा, मेघालय

मेघालय में स्थित सिजू गुफा भारत की पहली गुफा है जोकि नैचुरल लाइमस्टोन गुफा है। गुफा से थोड़ी दूर पर ही एक पुल बना हुआ है, जोकि देखने में बेहद ही कमजोर सा नजर आता है, यह पुल दो पहाड़ियों को आपस में जोड़ता है।इस पुल के जरिये दूसरी पहाड़ी तक पहुंचना एकदम थोड़ा खतरनाक है।यह गुफा भारत की तीसरी सबसे लंबी गुफायों में से एक है जोकि भूमिगत पानी के लिए भी जानी जाती है।
PC:James Gabil Momin

 लॉन्ग आईसलैंड, अंडमान और निकोबार

लॉन्ग आईसलैंड, अंडमान और निकोबार

अगर आप बीच पर अपने हनीमून को बेहद यादगार बनाना चाहते हैं तो अंडमान निकोबार का लॉन्ग आईसलैंड सबसे परफेक्ट जगह है.. यह आईलैंड औरों से ज़्यादा कुछ अलग नहीं है, बल्कि सफेद रेतीले समुद्री तट और नीले पानी के साथ यह बेहतर और बेताज स्वर्ग की तरह लगता है।यह आईसलैंड पोर्ट ब्लेयर से 125 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

मन्नार की खाड़ी, तमिलनाडु

मन्नार की खाड़ी, तमिलनाडु

तमिलनाडु के शहर रामेश्वरम के नजदीक एक छोटे से मछली पकड़ने वाले समुद्री तट पर एक शानदार खाड़ी है।इस सुंदर समुद्री तट की जानकारी काफ़ी कम लोगों को होने के कारण यह भीड़-मुक्त स्थल है। यहां स्मुन्द्र्के साफ़ पानी को बखूबी देखा जा सकता है...ये खाड़ी समुद्री कछुए, व्हेल और हजारों प्रवासी पक्षियों का निवास स्थल है।
PC: Deepak2017ind

जंगल में स्थित मंदिर, गोरसोप्पा , कर्नाटक

जंगल में स्थित मंदिर, गोरसोप्पा , कर्नाटक

यूं तो मंदिर का निर्माण ऐसी जगह किया जाता है कि,भक्त आसानी से भगवान के दर्शन करने पहुंच सके..लेकिन कर्नाटक के गोरसोप्पा में जंगलों के बीचों बीच मन्दिरों का एक समूह है। इस अविश्वसनीय, अतुलनीय और हैरान कर देने वाली जगह पर मंगलोर से तीन घंटे की यात्रा के बाद पहुंचा जा सकता है।इन मंदिरों का निर्माण होयसल शैली में किया गया है। 13वीं सदी में जैन धर्मावलंबियों द्वारा इन मंदिरों को शानदार पत्थरों और चट्टानों से तराश कर बनाया गया है। ये mnir पर्यटकों के बीच खासा आकर्षण है, जिसके चलते अब इस मंदिर के आसपास ढेरो दुकाने आदि देखी जा सकती है।

तैरने वाला गिरिजाघर शेट्टीहल्ली, कर्नाटक

तैरने वाला गिरिजाघर शेट्टीहल्ली, कर्नाटक

तैरने वाला गिरिजाघर दक्षिणी कर्नाटक के बेंगलुरु के पास हासन से 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित शेट्टीहल्ली में स्थित है। ये स्थान अपने विशेष चर्च के लिए जाना जाता है,जिसका निर्माण 1860 में फ्रेंच मिशनरीज ने करवाया था।हेमवती नदी के बैकवॉटर के किनारे बने इस चर्च की खासियत ये है कि मॉनसून के दौरान ये नदी के पानी में डूब जाता है। इस चर्च की वास्तुकला बेहद ही खूबसूरत है..हालांकि छतों के ढह जाने के कारण अब ये काफी जर्जर हो चुका है..लेकिन अभी भी जब आप इसे सूरज की रौशनी में निहारेंगे तो बहुत ही मनोरम प्रतीत होता है।

PC:ಪ್ರಶಸ್ತಿ

 टेराकोटा मंदिर, विष्णुपुर, पश्चिम बंगाल

टेराकोटा मंदिर, विष्णुपुर, पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में हरी-भरी घासों के बीच लाल रंग के इन टेराकोटा के मंदिरों का निर्माण 17वीं और 18वीं सदी में किया गया था। विष्णुपुर का ये मंदिर भगवान कृष्ण और राधा को समर्पित है। इन मंदिरों को गंगा नदी डेल्टा की जलोढ़ मिट्टी से बनाया गया है।

बागेश्वर, उत्तराखंड

बागेश्वर, उत्तराखंड

सरयू और गोमती नदी के संगम पर बसा बागेश्वर एक धार्मिक शहर है। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव एक बार इस क्षेत्र में बाघ का भेष धरने आए थे। हिन्दू पौराणिक कथाओं में भी इस शहर का वर्णन मिलता है। कौसानी से 28 किमी दूर स्थित यह शहर हर साल बड़ी संख्या में सैलानियों को आकर्षित करता है। यह शहर दो ओर से भीलेश्वर और नीलेश्वर पहाड़ से घिरा हुआ है। उत्तरायनी मेले का आयोजन यहां हर साल किया जाता है।PC:sushanta mohanta

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